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‘₹370 बिरयानी’ विवाद में बढ़ीं प्रणित मोरे और हिमांशु जांगड़ा की मुश्किलें, NCW ने भेजा समन

स्टैंड-अप कॉमेडियन प्रणित मोरे के शो में सामने आए ‘₹370 की बिरयानी’ विवाद ने अब राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) का ध्यान खींच लिया है। आयोग ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए कॉमेडियन प्रणित मोरे और वेब डेवलपर हिमांशु जांगड़ा को तलब किया है, साथ ही हरियाणा के पुलिस महानिदेशक (DGP) से सात दिनों के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है।

NCW ने जताई गंभीर चिंता

राष्ट्रीय महिला आयोग ने वायरल वीडियो और मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर कहा कि शो के दौरान की गई टिप्पणियां महिलाओं की सहमति और गरिमा से जुड़े मुद्दों को हल्के में लेने और अनुचित व्यवहार को सामान्य बनाने जैसी प्रतीत होती हैं। आयोग ने इस तरह की टिप्पणियों को गंभीर सामाजिक चिंता का विषय बताया है।

हरियाणा DGP को दिए सख्त निर्देश

एनसीडब्ल्यू की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने हरियाणा के डीजीपी को पत्र लिखकर मामले में त्वरित और समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। आयोग ने सात दिनों के भीतर विस्तृत एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) मांगी है, जिसमें एफआईआर की स्थिति, जांच की प्रगति और संबंधित लोगों के खिलाफ उठाए गए कदमों की जानकारी देने को कहा गया है।

22 जून को आयोग के सामने पेश होंगे दोनों

राष्ट्रीय महिला आयोग ने प्रणित मोरे और हिमांशु जांगड़ा को नोटिस जारी कर 22 जून को शाम 4 बजे व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए कहा है। आयोग आयोजन से जुड़े कलाकारों, आयोजकों और वेन्यू मैनेजमेंट की भूमिका की भी जांच चाहता है।

क्या है ‘₹370 बिरयानी’ विवाद?

विवाद उस समय शुरू हुआ जब शो के दौरान हिमांशु जांगड़ा ने एक निजी अनुभव सुनाते हुए एक लड़की पर 370 रुपये खर्च करने का जिक्र किया। इस दौरान की गई टिप्पणी को लेकर सोशल मीडिया पर भारी आलोचना हुई। वीडियो वायरल होने के बाद मामला महाराष्ट्र साइबर सेल तक पहुंच गया।

माफी के बाद भी जारी है विवाद

विवाद बढ़ने के बाद प्रणित मोरे और हिमांशु जांगड़ा दोनों ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगी। हिमांशु जांगड़ा ने अपना इंस्टाग्राम अकाउंट भी डीएक्टिवेट कर दिया। वहीं, गुरुग्राम स्थित एक कंपनी ने कथित विवाद के बाद उन्हें नौकरी से भी हटा दिया।

महिलाओं की गरिमा से समझौता स्वीकार नहीं: NCW

राष्ट्रीय महिला आयोग ने स्पष्ट किया है कि महिलाओं की सहमति, सम्मान और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता। आयोग ने कहा कि वह इस मामले की निगरानी जारी रखेगा और उचित कानूनी कार्रवाई की उम्मीद करता है।

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