सोलर कैमरों से जासूसी का शक: अलवर-बिकानेर समेत कई जिलों में नेटवर्क खंगाल रहीं जांच एजेंसियां
अलवर।
प्रदेश के अलवर सहित कुछ अन्य जिलों में सैन्य छावनियों और संवेदनशील इलाकों के आसपास सोलर सीसीटीवी कैमरों के जरिए जासूसी किए जाने की आशंका सामने आई है। हालांकि इस मामले में आर्मी इंटेलिजेंस और स्थानीय पुलिस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
सूत्रों के अनुसार, अलवर और बीकानेर में लगे संदिग्ध सोलर कैमरों को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा हटवाया गया है। बताया जा रहा है कि ये कैमरे सैन्य गतिविधियों पर नजर रखने के उद्देश्य से संवेदनशील स्थानों के आसपास लगाए गए थे।
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, इन कैमरों की लाइव फुटेज विदेशी खुफिया एजेंसी तक पहुंचाए जाने की आशंका जताई जा रही है। मामले में अलवर से एक संदिग्ध व्यक्ति को हिरासत में लिए जाने की चर्चा भी सामने आई है, हालांकि इसकी भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि करीब पांच दिन पहले एक विशेष टीम अलवर पहुंची थी, जिसके बाद से विभिन्न एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की गहन जांच में जुटी हुई हैं।
आतंकी संगठन से जुड़े होने की आशंका
जानकारी के अनुसार, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के कई जिलों—जैसे कपूरथला, जालंधर, पठानकोट, पटियाला, मोगा, अंबाला, कठुआ, बीकानेर और अलवर—में सैन्य और सुरक्षा ठिकानों के आसपास इस तरह के कैमरे लगाए जाने की बात सामने आई है। इनकी संख्या करीब नौ बताई जा रही है, जिन्हें आरोपियों की निशानदेही पर बरामद किया गया है।
सूत्र यह भी संकेत दे रहे हैं कि यह नेटवर्क पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और प्रतिबंधित आतंकी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल (बीकेआई) से जुड़ा हो सकता है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी शेष है।
जासूसी के लिए बनाया गया था तंत्र
बताया जा रहा है कि इस नेटवर्क से जुड़े लोगों को सेना और अर्धसैनिक बलों की गतिविधियों की जानकारी जुटाने, फोटो-वीडियो रिकॉर्ड करने और संवेदनशील स्थानों पर कैमरे लगाने का जिम्मा सौंपा गया था।
इस मामले के तार दिल्ली और पंजाब तक जुड़े होने की बात भी सामने आ रही है, जहां से करीब 11 संदिग्धों को हिरासत में लिए जाने की चर्चा है। फिलहाल एजेंसियां पूरे मामले की गहनता से जांच कर रही हैं और आधिकारिक पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है।