यमन में फिर बढ़ा युद्ध का खतरा! हूतियों को सऊदी की कड़ी चेतावनी, ईरान की उड़ान बनी नए विवाद की वजह
यमन में एक दशक बाद ईरान के नागरिक विमान के सना पहुंचने के बाद सऊदी अरब और ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के बीच तनाव फिर बढ़ गया है। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने हूतियों को कड़ी चेतावनी दी है, जबकि हूती विद्रोहियों ने सऊदी ठिकानों को निशाना बनाने की धमकी दी है। इस घटनाक्रम ने पूरे पश्चिम एशिया में नए टकराव की आशंका बढ़ा दी है।
ईरानी विमान के सना पहुंचते ही बढ़ा तनाव
यमन की हूती नियंत्रित राजधानी सना में करीब एक दशक बाद ईरान का सार्वजनिक रूप से पुष्टि किया गया नागरिक विमान उतरने के बाद क्षेत्रीय तनाव तेज हो गया है। इस विमान के सना पहुंचने को लेकर सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन और हूती विद्रोहियों के बीच विवाद सामने आया। हूती पक्ष का दावा है कि सऊदी लड़ाकू विमानों ने उड़ान को रोकने की कोशिश की, जिसके जवाब में एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय किया गया। इस घटना ने सऊदी अरब और ईरान के बीच पहले से मौजूद रणनीतिक प्रतिस्पर्धा को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।
सऊदी गठबंधन ने दी सख्त चेतावनी
सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी ने कहा कि सऊदी अरब या यमन की संप्रभुता को चुनौती देने की किसी भी कोशिश का “पूरी ताकत और दृढ़ता” से जवाब दिया जाएगा। उनके अनुसार, हूती विद्रोहियों की हालिया धमकियां क्षेत्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय स्थिरता के लिए खतरा हैं। गठबंधन ने आरोप लगाया कि हूती संगठन अपनी आंतरिक आर्थिक और राजनीतिक समस्याओं से ध्यान हटाने के लिए इस तरह के बयान दे रहा है। साथ ही नागरिक ठिकानों को खतरे में डालने के लिए भी हूतियों को जिम्मेदार ठहराया गया।
हूतियों ने सऊदी ठिकानों को निशाना बनाने की धमकी दी
हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने दावा किया कि उनकी सेना ने सऊदी लड़ाकू विमानों को रोकने के लिए एयर डिफेंस मिसाइलों का इस्तेमाल किया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सऊदी कार्रवाई जारी रहती है तो हवाई अड्डों, समुद्री ठिकानों और अन्य रणनीतिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया जा सकता है। हूती पक्ष का कहना है कि ईरानी विमान में 200 से अधिक मरीज और प्रतिनिधिमंडल के सदस्य सवार थे, जो तेहरान में आयोजित अंतिम संस्कार कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। इसी उड़ान को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद गहराया।
यमन सरकार ने ईरानी उड़ान पर जताई आपत्ति
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन की सरकार ने इस पूरे घटनाक्रम पर आपात बैठक बुलाई। राष्ट्रपति रशाद अल-अलीमी की अध्यक्षता में हुई बैठक में ईरानी विमान के सना पहुंचने को यमन की संप्रभुता का उल्लंघन बताया गया। सरकार ने कहा कि यह कदम अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों की भावना के विपरीत है। साथ ही संयुक्त राष्ट्र और क्षेत्रीय सहयोगियों से अपील की गई कि हूती विद्रोहियों को मिलने वाले सैन्य समर्थन और हथियारों की आपूर्ति पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित किया जाए।
बंदरगाहों और व्यापारिक मार्गों पर बढ़ी चिंता
सऊदी गठबंधन ने आरोप लगाया कि हूती विद्रोहियों की सैन्य गतिविधियों से होदेइदाह, रास ईसा और अस-सलीफ जैसे प्रमुख बंदरगाहों के अलावा सना अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, बिजली संयंत्रों और औद्योगिक ढांचे को खतरा पैदा हो गया है। गठबंधन ने यह भी कहा कि दक्षिणी लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य में जहाजों और वैश्विक व्यापारिक मार्गों पर हमलों का जोखिम बढ़ रहा है। ये समुद्री मार्ग अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
2015 से जारी संघर्ष, अब फिर बढ़ सकती है क्षेत्रीय अस्थिरता
यमन में संघर्ष 2015 से जारी है, जब हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना पर कब्जा कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार को सत्ता से बेदखल कर दिया था। इसके बाद सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने सैन्य हस्तक्षेप शुरू किया। वर्षों से जारी इस संघर्ष में लाखों लोग विस्थापित हुए हैं और संयुक्त राष्ट्र इसे दुनिया के सबसे गंभीर मानवीय संकटों में से एक मानता है। ताजा घटनाक्रम ने संकेत दिए हैं कि यदि तनाव कम नहीं हुआ तो पश्चिम एशिया में एक और बड़ा क्षेत्रीय टकराव खड़ा हो सकता है।