‘पाकिस्तान की राह पर चलने की जरूरत नहीं’, ईरान संकट पर भारत के राजदूत का स्पष्ट संदेश
ईरान संकट और वैश्विक संघर्षों में भारत की भूमिका को लेकर उठ रहे सवालों के बीच चीन में भारत के राजदूत विक्रम दोरईस्वामी ने भारत का रुख साफ कर दिया है। उन्होंने कहा कि जिन मुद्दों पर पहले से कई देश सक्रिय हैं, वहां केवल दिखावे के लिए मध्यस्थता करना भारत की नीति नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत की विदेश नीति स्वतंत्र है और उसकी तुलना पाकिस्तान से करना उचित नहीं है।
ईरान संकट पर भारत ने क्यों नहीं निभाई मध्यस्थ की भूमिका?
बीजिंग में आयोजित 14वें वर्ल्ड पीस फोरम के दौरान ईरान संकट पर भारत की भूमिका को लेकर सवाल पूछे गए। इस पर जवाब देते हुए भारतीय राजदूत ने कहा कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय विवाद में मध्यस्थता करना हर देश का अपना रणनीतिक फैसला होता है। उन्होंने कहा कि जब पहले से कई देश किसी मुद्दे पर सक्रिय हों, तब भारत के लिए केवल प्रतीकात्मक रूप से शामिल होने का कोई विशेष लाभ नहीं है। भारत हमेशा अपने राष्ट्रीय हितों और वैश्विक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर ही फैसला करता है।
‘भारत और चीन का रुख काफी हद तक एक जैसा’
विक्रम दोरईस्वामी ने कहा कि हाल के अंतरराष्ट्रीय संकटों, चाहे वह पश्चिम एशिया हो या पूर्वी यूरोप, दोनों मामलों में भारत और चीन का दृष्टिकोण काफी हद तक समान रहा है। उन्होंने कहा कि न तो चीन और न ही भारत ने इन संघर्षों में औपचारिक मध्यस्थ बनने की पहल की है। दोनों देशों ने संतुलित और जिम्मेदार कूटनीतिक रुख अपनाया है, जिसमें संवाद और स्थिरता को प्राथमिकता दी गई है।
पाकिस्तान से तुलना को बताया अनुचित
राजदूत ने भारत की तुलना पाकिस्तान से किए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की आर्थिक क्षमता, वैश्विक प्रभाव और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियां पूरी तरह अलग हैं। ऐसे में पाकिस्तान की विदेश नीति या उसके कदमों को भारत के संदर्भ में मापना उचित नहीं है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत को किसी दूसरे देश के तौर-तरीकों का अनुसरण करने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि वह अपनी स्वतंत्र और दीर्घकालिक रणनीति के आधार पर फैसले लेता है।
वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका
अपने संबोधन में विक्रम दोरईस्वामी ने कहा कि आज दुनिया के साथ भारत का जुड़ाव लगातार मजबूत हो रहा है। यूरोपीय देशों, आसियान देशों और अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के साथ भारत के आर्थिक और रणनीतिक संबंध लगातार विस्तार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि शांति, सुरक्षा और वैश्विक सहयोग जैसे विषयों पर भारत रचनात्मक भूमिका निभाने के लिए हमेशा तैयार रहता है। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की विश्वसनीयता और प्रभाव लगातार बढ़ रहा है।
भारत की विदेश नीति का केंद्र है राष्ट्रीय हित
भारतीय राजदूत के बयान से यह स्पष्ट संदेश गया कि भारत की विदेश नीति किसी दूसरे देश की रणनीति की नकल करने के बजाय अपने राष्ट्रीय हितों, वैश्विक संतुलन और व्यावहारिक कूटनीति पर आधारित है। भारत हर अंतरराष्ट्रीय संकट का मूल्यांकन उसके व्यापक प्रभाव, रणनीतिक जरूरतों और अपने दीर्घकालिक हितों को ध्यान में रखकर करता है। यही संतुलित दृष्टिकोण भारत को वैश्विक मंच पर एक जिम्मेदार और भरोसेमंद साझेदार के रूप में स्थापित करता है।