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PM मोदी के कार्यक्रम में BJP नेता को रोकने का वीडियो वायरल, जानिए क्या है पूरा मामला

राजस्थान के पचपदरा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम के दौरान भाजपा के प्रदेश महामंत्री श्रवण सिंह बागड़ी को मुख्य प्रवेश द्वार पर रोकने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। वीडियो के साथ दावा किया गया कि भाजपा के वरिष्ठ नेता को कार्यक्रम में प्रवेश नहीं दिया गया। हालांकि, जांच में सामने आया कि मामला एंट्री से इनकार का नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री की सुरक्षा व्यवस्था और तय प्रोटोकॉल का था।

वायरल वीडियो में क्या दिखा और क्या दावा किया गया?

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में भाजपा प्रदेश महामंत्री श्रवण सिंह बागड़ी वीवीआईपी पास दिखाते हुए सुरक्षाकर्मियों से बातचीत करते नजर आते हैं। वीडियो सामने आने के बाद कई तरह के दावे किए गए कि सत्तारूढ़ दल के वरिष्ठ नेता को भी कार्यक्रम में प्रवेश नहीं मिला। हालांकि उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह दावा पूरी तरह सही नहीं है। सुरक्षा एजेंसियों ने उन्हें स्थायी रूप से नहीं रोका था, बल्कि निर्धारित सुरक्षा प्रक्रिया के तहत कुछ समय के लिए प्रवेश रोका गया था।

देरी से पहुंचने के कारण लागू हुआ सुरक्षा प्रोटोकॉल

जानकारी के अनुसार श्रवण सिंह बागड़ी प्रधानमंत्री के पचपदरा कार्यक्रम में शामिल होने के लिए अधिकृत वीवीआईपी पास लेकर पहुंचे थे। लेकिन जब उनका काफिला कार्यक्रम स्थल के मुख्य प्रवेश द्वार पर पहुंचा, तब प्रधानमंत्री का मूवमेंट शुरू हो चुका था। ऐसे समय सुरक्षा एजेंसियां सभी प्रवेश द्वार अस्थायी रूप से बंद कर देती हैं और किसी भी व्यक्ति को अंदर जाने की अनुमति नहीं दी जाती। इसी वजह से उन्हें मुख्य गेट पर रोककर सुरक्षा नियमों का पालन किया गया।

उच्च अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद मिली एंट्री

कुछ देर तक गेट पर इंतजार करने के बाद श्रवण सिंह बागड़ी ने कार्यक्रम स्थल के भीतर मौजूद राज्य मंत्री के.के. विश्नोई और जिला पुलिस अधीक्षक से संपर्क किया। इसके बाद सुरक्षा अधिकारियों ने स्थिति की समीक्षा की। आवश्यक अनुमति मिलने के बाद श्रवण सिंह बागड़ी को अकेले कार्यक्रम स्थल में प्रवेश दे दिया गया। हालांकि उनके साथ आए अन्य समर्थकों को सुरक्षा कारणों से अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई।

सुरक्षा एजेंसियों ने निभाई प्रोटोकॉल की जिम्मेदारी

प्रधानमंत्री के कार्यक्रमों में सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त होती है। निर्धारित समय के बाद सभी प्रवेश द्वार बंद कर दिए जाते हैं और सुरक्षा एजेंसियां किसी भी व्यक्ति को, चाहे उसके पास वैध पास ही क्यों न हो, बिना अनुमति प्रवेश नहीं देतीं। इस मामले में भी शुरुआती रोक इसी सुरक्षा प्रक्रिया का हिस्सा थी। बाद में आवश्यक अनुमति मिलने पर संबंधित नेता को कार्यक्रम में प्रवेश दे दिया गया।

वायरल दावे और वास्तविकता में अंतर

पूरे घटनाक्रम से स्पष्ट होता है कि भाजपा नेता को कार्यक्रम से बाहर रखने या प्रवेश से स्थायी रूप से वंचित करने जैसी बात सामने नहीं आई। उपलब्ध तथ्यों के अनुसार, उन्हें केवल सुरक्षा प्रोटोकॉल के कारण अस्थायी रूप से रोका गया था और बाद में आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने पर कार्यक्रम में शामिल होने की अनुमति मिल गई। इसलिए सोशल मीडिया पर किए गए कई दावे वास्तविक घटनाक्रम से अलग और अधूरे संदर्भ में प्रस्तुत किए गए।

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