चाबहार बंदरगाह पर अमेरिकी हमले से बढ़ी चिंता, कंट्रोल टावर क्षतिग्रस्त; भारत के प्रोजेक्ट पर स्थिति स्पष्ट नहीं
ईरान के रणनीतिक महत्व वाले चाबहार बंदरगाह पर अमेरिकी हमले के बाद क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है। ईरानी अधिकारियों के अनुसार हमले में समुद्री यातायात नियंत्रण केंद्र (मैरीटाइम ट्रैफिक कंट्रोल टावर) को नुकसान पहुंचा है। हालांकि अब तक ऐसी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है कि भारत के सहयोग से विकसित हो रहे चाबहार पोर्ट प्रोजेक्ट को सीधा नुकसान पहुंचा है। घटनाक्रम ने भारत, ईरान और मध्य एशिया को जोड़ने वाले इस महत्वपूर्ण व्यापारिक गलियारे को लेकर नई चिंताएं जरूर बढ़ा दी हैं।
हमले में कंट्रोल टावर को पहुंचा नुकसान
ईरान के पोर्ट्स एंड मैरीटाइम अफेयर्स प्राधिकरण के अनुसार अमेरिकी हमले में चाबहार पोर्ट के समुद्री यातायात नियंत्रण केंद्र को क्षति पहुंची है। यह कंट्रोल टावर जहाजों की आवाजाही, समुद्री सुरक्षा और खोज एवं बचाव (Search and Rescue) अभियानों के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। रिपोर्टों के मुताबिक बंदरगाह परिसर के कुछ अन्य हिस्सों और डॉकिंग सुविधाओं को भी नुकसान पहुंचा, जबकि आसपास के क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हुई।
भारत के चाबहार प्रोजेक्ट पर क्या है स्थिति?
चाबहार बंदरगाह भारत के लिए रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह भारत को पाकिस्तान को बाईपास करते हुए ईरान, अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक व्यापारिक पहुंच उपलब्ध कराता है। फिलहाल किसी भी आधिकारिक एजेंसी ने यह पुष्टि नहीं की है कि भारत द्वारा विकसित या संचालित टर्मिनल और उससे जुड़ा बुनियादी ढांचा इस हमले से प्रभावित हुआ है। ऐसे में भारत के प्रोजेक्ट को नुकसान पहुंचने के दावों की अभी आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर रणनीतिक महत्व
चाबहार ईरान का एकमात्र प्रमुख गहरे पानी वाला बंदरगाह है, जो होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर ओमान की खाड़ी पर स्थित है। यही कारण है कि यह बंदरगाह क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का सैन्य हमला समुद्री व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय लॉजिस्टिक्स पर व्यापक असर डाल सकता है।
क्षेत्रीय तनाव के बीच बढ़ी वैश्विक चिंता
चाबहार पर हमले ने पश्चिम एशिया में जारी सैन्य तनाव को और गहरा कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस घटनाक्रम पर नजर रखी जा रही है, क्योंकि इसका असर वैश्विक समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है। भारत समेत कई देश हालात पर नजर बनाए हुए हैं। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि बंदरगाह की परिचालन क्षमता कितनी प्रभावित हुई है और आने वाले दिनों में व्यापारिक गतिविधियां किस तरह जारी रहेंगी।
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