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US Fed का फैसला: ब्याज दरों में यथास्थिति, ग्लोबल बाजारों की बढ़ी निगरानी

अमेरिकी सेंट्रल बैंक फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों को लेकर बड़ा फैसला लेते हुए फिलहाल किसी भी तरह का बदलाव नहीं किया है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब वैश्विक बाजार पहले से सतर्क हैं और अमेरिका की आंतरिक राजनीति में भी हलचल बनी हुई है। फेड के इस कदम का असर अब दुनियाभर के शेयर बाजारों पर देखा जा रहा है, जिसमें भारत भी शामिल है।


ब्याज दरें स्थिर: फेड ने क्यों लिया इंतजार का फैसला?

फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों को 3.5 से 3.75 प्रतिशत के दायरे में ही बनाए रखा है। जुलाई 2025 के बाद यह पहला मौका है जब दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया। इससे पहले लगातार तीन बैठकों में फेड ब्याज दरों में कटौती कर चुका था। फेड का कहना है कि अर्थव्यवस्था में मजबूती तो है, लेकिन महंगाई अभी पूरी तरह काबू में नहीं आई है।


अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर फेड का आकलन

फेड चेयरमैन जेरोम पॉवेल के अनुसार अमेरिका में उपभोक्ता खर्च मजबूत बना हुआ है और कॉर्पोरेट निवेश भी जारी है। हालांकि रियल एस्टेट सेक्टर अभी दबाव में है। रोजगार के नए अवसरों की रफ्तार थोड़ी धीमी जरूर हुई है, लेकिन बेरोजगारी दर स्थिर बनी हुई है। महंगाई अब भी फेड की सबसे बड़ी चिंता बनी हुई है।


भारतीय शेयर बाजार के लिए कितना अहम है यह फैसला?

भारतीय शेयर बाजार के लिहाज से फेड का यह फैसला पहले से अनुमानित माना जा रहा था। इसी वजह से बाजार पर किसी बड़े झटके की आशंका कम है। GIFT Nifty से संकेत मिल रहे हैं कि बाजार की शुरुआत सपाट या हल्की कमजोरी के साथ हो सकती है। एशियाई बाजारों में भी दबाव का माहौल दिख रहा है, जिससे निवेशकों का सेंटीमेंट थोड़ा सतर्क रह सकता है।


FII निवेश पर क्या पड़ेगा असर?

आमतौर पर अमेरिका में ब्याज दरों में कटौती होने पर विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) भारत जैसे उभरते बाजारों की ओर रुख करते हैं। लेकिन दरों में स्थिरता के चलते फिलहाल विदेशी निवेशक सतर्क रह सकते हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि आज बाजार में बड़ी तेजी या भारी गिरावट की संभावना कम है।


डॉलर मजबूत, रुपये पर बना दबाव

अमेरिका में ब्याज दरें यथावत रहने से डॉलर को सपोर्ट मिल सकता है। इसका असर रुपये पर पड़ सकता है, जो पहले से ही कमजोर स्तरों के आसपास कारोबार कर रहा है। ऐसे माहौल में विदेशी निवेशक भी नई पोजिशन लेने से पहले हालात साफ होने का इंतजार कर सकते हैं।


सोने में उछाल: फेड की स्वतंत्रता पर बहस का असर

फेड की स्वतंत्रता को लेकर अमेरिका में चल रही राजनीतिक बहस के बीच सोने में तेज़ी देखने को मिली है। निवेशकों को डर है कि भविष्य में नीतिगत फैसलों पर दबाव बढ़ सकता है। इसी कारण सोना 5500 डॉलर प्रति औंस के ऊपर पहुंच गया है। सामान्य हालात में स्थिर ब्याज दरें सोने को ज्यादा सपोर्ट नहीं देतीं, लेकिन मौजूदा स्थिति अलग है।


निवेशकों की नजर अब किन फैक्टर्स पर?

बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक भारतीय शेयर बाजार अब सिर्फ अमेरिका के फैसलों पर निर्भर नहीं है। निवेशकों का फोकस अब कंपनियों के तिमाही नतीजों, घरेलू निवेश की स्थिति, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और भारत-अमेरिका के बीच संभावित व्यापार समझौते पर टिका हुआ है।


क्या भारतीय बाजार को मिलेगी नई दिशा?

फेड के फैसले का भारतीय बाजार पर असर फिलहाल सीमित रहने की संभावना है। अगर भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर सकारात्मक संकेत मिलते हैं, तो रुपये को मजबूती मिल सकती है और बाजार में नई ऊर्जा आ सकती है। फिलहाल बाजार की चाल घरेलू फैक्टर्स और आने वाली बड़ी खबरों पर निर्भर करेगी।

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