7 दिन तक मुर्दाघर में पड़ा रहा पत्नी का शव, आर्थिक तंगी ने पति को किया बेबस; उदयपुर में पुलिस ने कराई अंतिम विदाई
उदयपुर के सुखेर थाना क्षेत्र में गरीबी और बेबसी की ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने हर किसी को झकझोर दिया। गोगुंदा क्षेत्र की रहने वाली लीला उर्फ नीलम (40) की 18 सितंबर को एमबी अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। पत्नी की मौत के बाद उसका पति मदन गमेती आर्थिक तंगी के कारण अंतिम संस्कार कराने में सक्षम नहीं था। इसके चलते महिला का शव करीब सात दिनों तक मुर्दाघर में रखा रहा। बाद में पुलिस की पहल और मेवाड़ प्रताप संस्थान के सहयोग से महिला का अंतिम संस्कार कराया गया।
कई दिनों से बुखार से पीड़ित थी महिला
पुलिस के अनुसार, कालोड़ा गोवर्धन निवासी लीला उर्फ नीलम अपने पति मदन गमेती के साथ बेदला में निर्माणाधीन मकान पर चौकीदारी करती थी।महिला पिछले कुछ दिनों से बुखार से पीड़ित थी। तबीयत बिगड़ने पर उसके पति ने उसे 17 सितंबर को एमबी अस्पताल में भर्ती कराया। उपचार के दौरान अगले दिन यानी 18 सितंबर को उसकी मौत हो गई।
पत्नी की मौत के बाद सामने आई आर्थिक मजबूरी
लीला की मौत के बाद पति मदन गमेती के सामने अंतिम संस्कार की चुनौती खड़ी हो गई। पुलिस के अनुसार, मदन ने अपनी आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए बताया कि वह पत्नी का अंतिम संस्कार कराने में सक्षम नहीं है।आर्थिक तंगी के कारण शव को अस्पताल के मुर्दाघर में रखवाना पड़ा। एक ओर परिवार के सामने पत्नी और मां को खोने का दुख था, वहीं दूसरी ओर अंतिम संस्कार के लिए जरूरी संसाधन भी उपलब्ध नहीं थे।
मासूम बेटा भी पिता के साथ रहा
इस पूरे घटनाक्रम में परिवार का मासूम बेटा भी पिता के साथ मौजूद था। परिवार चाहता था कि लीला को अंतिम विदाई दी जाए, लेकिन आर्थिक स्थिति के कारण यह संभव नहीं हो पा रहा था।मृतका के पति ने अपनी मजबूरी एसआई मनोहर सिंह को बताई। इसके बाद पुलिस ने परिवार की स्थिति को देखते हुए मदद के लिए आगे की व्यवस्था शुरू की।
पुलिस ने संस्था से मांगी मदद
पुलिस ने अंतिम संस्कार के लिए मेवाड़ प्रताप संस्थान से सहयोग मांगा। संस्था ने परिवार की मदद के लिए आगे आते हुए अंतिम संस्कार की व्यवस्था में सहयोग किया।इसके बाद जरूरी प्रक्रिया पूरी कर शव परिवार को सौंपा गया। पुलिस के अनुसार, शव का पोस्टमॉर्टम नहीं कराया गया।
सात दिन बाद हुई अंतिम विदाई
करीब सात दिनों तक मुर्दाघर में रहने के बाद लीला का शव अंतिम संस्कार के लिए बाहर निकाला गया।पति मदन गमेती और उसके बेटे की मौजूदगी में अशोकनगर मोक्षधाम पर महिला का अंतिम संस्कार कराया गया। पुलिस और संस्था के सहयोग से परिवार को अपनी पत्नी और मां को अंतिम विदाई देने का अवसर मिल सका।
गरीबी और बेबसी की सामने आई तस्वीर
यह घटना केवल एक परिवार की परेशानी नहीं दिखाती, बल्कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के सामने आने वाली मुश्किलों को भी सामने लाती है।पत्नी की मौत के बाद पति के पास अंतिम संस्कार तक के संसाधन नहीं थे। ऐसे समय में पुलिस और सामाजिक संस्थाओं की मदद परिवार के लिए सहारा बनी।लीला के अंतिम संस्कार के साथ परिवार को उसकी अंतिम विदाई तो मिल गई, लेकिन यह घटना आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवारों के लिए सामाजिक सहयोग की जरूरत को भी सामने लाती है।