सवाई माधोपुर के सूरवाल बांध की बदलेगी तस्वीर, 22 गांवों के 8 हजार किसान परिवारों को मिलेगा फायदा
सवाई माधोपुर जिले में छह दशक से अधिक पुराने सूरवाल बांध और उससे जुड़े नहरी तंत्र का जीर्णोद्धार तेजी से चल रहा है। जल संसाधन विभाग 25.36 करोड़ रुपए की लागत से बांध, मुख्य नहर और पांच माइनरों का पुनरोद्धार कर रहा है। नहरों में पक्की लाइनिंग की जा रही है, ताकि पानी का रिसाव और छीजत कम हो। परियोजना पूरी होने के बाद सूरवाल सहित आसपास के 22 गांवों की करीब 4,847.71 हेक्टेयर कृषि भूमि को बेहतर सिंचाई सुविधा मिलने की उम्मीद है। इससे करीब 8 हजार किसान परिवारों को लाभ मिलने की संभावना है।
1954 में रखी गई थी बांध की आधारशिला
सूरवाल गांव के पास स्थित इस बांध की आधारशिला वर्ष 1954 में रखी गई थी। लंबे समय से यह क्षेत्र की सिंचाई व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।समय के साथ बांध से जुड़े नहरी तंत्र में पानी के रिसाव और छीजत की समस्या सामने आती रही। अब जल संसाधन विभाग ने बांध और नहरों की संरचना को मजबूत करने का काम शुरू किया है।
35.701 किलोमीटर नहरी तंत्र का होगा पुनरोद्धार
सूरवाल बांध की कुल लंबाई करीब 4,200 मीटर बताई गई है। 15 फीट भराव क्षमता पर बांध में करीब 917.80 पामसीएफटी पानी का भराव होता है।बांध से एक मुख्य नहर और पांच माइनर निकलते हैं। परियोजना के तहत करीब 35.701 किलोमीटर नहरी तंत्र का पुनरोद्धार किया जा रहा है।नहरों की पक्की लाइनिंग से पानी के रिसाव को कम करने और सिंचाई का पानी नहर के अंतिम छोर यानी टेल तक पहुंचाने पर जोर है।
25.36 करोड़ की परियोजना, दो-तिहाई काम पूरा
सूरवाल सिंचाई परियोजना के लिए सरकार ने 25.36 करोड़ रुपए मंजूर किए हैं। विभाग के अनुसार, परियोजना का दो-तिहाई से अधिक काम पूरा हो चुका है।पूरे प्रोजेक्ट को जुलाई 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें बांध, मुख्य नहर और पांचों माइनरों की मरम्मत के साथ पक्की लाइनिंग का काम शामिल है।
किसानों की सुविधा के लिए बनेंगी कई संरचनाएं
परियोजना के तहत सिर्फ नहरों की मरम्मत नहीं होगी। किसानों और ग्रामीणों की आवाजाही तथा सिंचाई व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कई नई संरचनाएं भी बनाई जाएंगी।इनमें 10 पुलिया, 10 कैटल रैम्प, 10 फुटब्रिज, 64 डिग्गियां, दो जल उपयोगिता रंगमंच भवन, तीन फॉल, छह टेल क्रेटर और 110 आउटलेट पाइप प्रस्तावित हैं।इसके अलावा पहले से मौजूद पुरानी संरचनाओं की भी आवश्यकतानुसार मरम्मत की जाएगी।
22 गांवों के खेतों तक पहुंचेगा सिंचाई पानी
परियोजना से सवाई माधोपुर क्षेत्र के कुल 22 गांवों को लाभ मिलने की उम्मीद है। इनमें सूरवाल, महू, अजनोटी, नींनदड़ा, श्यामोता, मैनपुरा, कोशाली, भैंसखेड़ा, पड़ाना, गोगोर और जटवाड़ा कलां शामिल हैं।इसके अलावा खाट खुर्द, घनोली, गोतड़ा, दोबड़ा कलां, दुब्बी खुर्द, कांसीर, जड़ावता, खाट कलां, सेलू, चकेरी और दुब्बी बनास के किसानों को भी सिंचाई सुविधा का लाभ मिलेगा।
टेल तक पानी पहुंचाने पर रहेगा फोकस
नहरों में पानी की छीजत कम होने से परियोजना का सबसे बड़ा फायदा अंतिम छोर के किसानों को मिलने की उम्मीद है।पक्की लाइनिंग से नहर में बहने वाला पानी जमीन में रिसने के बजाय ज्यादा प्रभावी तरीके से खेतों तक पहुंच सकेगा। इससे सिंचाई क्षेत्र में पानी की उपलब्धता बेहतर होने की संभावना है।
बांध छलकने पर पानी निकासी की भी तैयारी
सूरवाल बांध के सुदृढ़ीकरण के साथ डाउनस्ट्रीम क्षेत्र में ओवरफ्लो पानी की निकासी की समस्या पर भी काम किया जा रहा है।मुख्यमंत्री बजट घोषणा 2026-27 के तहत इसके लिए 61.08 लाख रुपए का कार्यादेश जारी किया गया है। विभाग ने डाउनस्ट्रीम क्षेत्र का विस्तृत सर्वे शुरू कर दिया है।सर्वे के आधार पर बारिश या बांध के ओवरफ्लो होने की स्थिति में पानी की सुरक्षित निकासी के लिए जरूरी कार्यों की डीपीआर तैयार की जाएगी।
खेती के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी फायदा
सिंचाई व्यवस्था मजबूत होने से परियोजना का असर केवल खेतों तक सीमित नहीं रहने की उम्मीद है। पानी की उपलब्धता बेहतर होने पर कृषि गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है।इससे किसानों की उत्पादन क्षमता और ग्रामीण क्षेत्र में कृषि आधारित आर्थिक गतिविधियों को भी मजबूती मिलने की संभावना है। हालांकि इसका वास्तविक प्रभाव परियोजना पूरी होने और सिंचाई व्यवस्था के नियमित संचालन के बाद स्पष्ट होगा।
जुलाई 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य
सूरवाल बांध और नहरी तंत्र के पुनरोद्धार का दो-तिहाई से अधिक काम पूरा होने का दावा विभाग की ओर से किया गया है।अब शेष कार्य को तय समयसीमा में पूरा करना महत्वपूर्ण होगा। खासतौर पर नहरों की लाइनिंग, नई संरचनाओं और डाउनस्ट्रीम जल निकासी व्यवस्था के काम पूरे होने के बाद परियोजना का वास्तविक लाभ किसानों तक पहुंच सकेगा।