ट्रंप को सुप्रीम कोर्ट से दोहरा झटका, फेड की स्वायत्तता और चुनावी नियमों पर मिली करारी हार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सुप्रीम कोर्ट से एक ही दिन में दो अहम मामलों में बड़ा झटका लगा है। अदालत ने फेडरल रिजर्व की स्वतंत्रता को बरकरार रखते हुए फेड गवर्नर को हटाने की कोशिश पर रोक लगा दी। वहीं डाक-मतपत्रों से जुड़े चुनावी नियमों को भी यथावत रखते हुए रिपब्लिकन पक्ष की चुनौती खारिज कर दी। इन फैसलों को अमेरिकी लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वायत्तता के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
फेड गवर्नर को हटाने की कोशिश पर सुप्रीम कोर्ट की रोक
सुप्रीम कोर्ट ने 5-4 के बहुमत से ट्रंप प्रशासन की उस कोशिश को खारिज कर दिया, जिसके तहत फेडरल रिजर्व की गवर्नर लिसा कुक को उनके पद से हटाने का प्रयास किया गया था। अदालत ने स्पष्ट किया कि फेड गवर्नरों का कार्यकाल तय अवधि के लिए होता है और उन्हें केवल वैधानिक आधार पर ही हटाया जा सकता है। अदालत के इस फैसले को केंद्रीय बैंक की संस्थागत स्वतंत्रता की रक्षा के रूप में देखा जा रहा है।
केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता पर अदालत का स्पष्ट संदेश
मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने फैसले के दौरान कहा कि फेडरल रिजर्व जैसे संवैधानिक संस्थानों की स्वतंत्रता आर्थिक स्थिरता के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। अदालत ने संकेत दिया कि किसी भी राष्ट्रपति को केवल राजनीतिक असहमति के आधार पर ऐसे अधिकारियों को हटाने का अधिकार नहीं दिया जा सकता। फैसले के बाद लिसा कुक ने इसे अमेरिकी अर्थव्यवस्था और संस्थागत संतुलन के लिए महत्वपूर्ण बताया।
डाक-मतपत्रों के नियम भी बरकरार
सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी प्रक्रिया से जुड़े एक अन्य मामले में भी ट्रंप समर्थित याचिका को राहत नहीं दी। अदालत ने मिसिसिपी के उस कानून को वैध माना, जिसके तहत चुनाव दिवस तक पोस्टमार्क किए गए डाक-मतपत्र चुनाव के बाद निर्धारित अवधि के भीतर मिलने पर भी स्वीकार किए जा सकते हैं। इस फैसले से राज्य में डाक-मतपत्रों की मौजूदा व्यवस्था जारी रहेगी।
कंजर्वेटिव बहुमत के बावजूद ट्रंप को राहत नहीं
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट में कंजर्वेटिव विचारधारा के न्यायाधीशों का बहुमत होने के बावजूद ट्रंप को दोनों मामलों में सफलता नहीं मिली। दोनों फैसलों में कुछ कंजर्वेटिव न्यायाधीशों ने भी स्वतंत्र संस्थाओं और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता के पक्ष में मतदान किया। इससे यह संदेश गया कि संवैधानिक सिद्धांतों को राजनीतिक हितों से ऊपर रखा जाएगा।
लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता पर बड़ा संकेत
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इन फैसलों ने अमेरिकी न्यायपालिका की स्वतंत्र भूमिका को एक बार फिर रेखांकित किया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता लोकतांत्रिक व्यवस्था के अहम स्तंभ हैं। ऐसे में संवैधानिक संस्थाओं के अधिकारों की रक्षा न्यायपालिका की प्राथमिक जिम्मेदारी बनी रहेगी।