BJP-SAD गठबंधन की फिर आहट? 3 घटनाक्रमों से समझें पंजाब की नई सियासी हलचल
चंडीगढ़: पंजाब की राजनीति में बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल के बीच दोबारा नजदीकियों की चर्चा तेज हो गई है। सुखबीर सिंह बादल से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात, नांदेड़ में हमले के बाद पीएम मोदी का हरसिमरत कौर बादल को फोन और महिला आरक्षण जैसे मुद्दे पर SAD का केंद्र के रुख का समर्थन—इन घटनाक्रमों ने गठबंधन की अटकलों को हवा दी है। हालांकि, दोनों दलों की ओर से अभी किसी नए गठबंधन की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में सवाल यही है कि क्या 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले पुराना राजनीतिक समीकरण फिर आकार ले रहा है?
नांदेड़ हमले के बाद पीएम मोदी ने हरसिमरत कौर को किया फोन
13 अगस्त को महाराष्ट्र के नांदेड़ में सुखबीर सिंह बादल पर हमले की घटना के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ गई। हमले में सुखबीर बादल घायल हुए। घटना के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनकी पत्नी और सांसद हरसिमरत कौर बादल से फोन पर बात कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। हरसिमरत कौर ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए प्रधानमंत्री के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि मुश्किल समय में प्रधानमंत्री की चिंता और समर्थन उनके परिवार तथा पार्टी के लिए महत्वपूर्ण है। साथ ही उन्होंने जांच में केंद्रीय एजेंसियों के सहयोग के निर्देश देने के लिए भी पीएम का धन्यवाद किया।
पहला संकेत: मोदी और सुखबीर बादल की मुलाकात
गठबंधन की चर्चाओं को सबसे ज्यादा बल 7 अगस्त को हुई एक मुलाकात से मिला। सुखबीर सिंह बादल ने नई दिल्ली में संसद भवन परिसर स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय में नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। इस बैठक में किन मुद्दों पर बातचीत हुई, इसकी आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई। दोनों दलों के नेताओं ने भी इस मुलाकात को लेकर ज्यादा टिप्पणी नहीं की। लेकिन पंजाब की राजनीति में इसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। खासकर इसलिए क्योंकि 2027 का विधानसभा चुनाव करीब आ रहा है और दोनों दलों के सामने राज्य में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की चुनौती है।
दूसरा संकेत: महिला आरक्षण पर SAD का केंद्र के रुख को समर्थन
8 अगस्त को चंडीगढ़ में SAD के वरिष्ठ नेताओं की बैठक हुई। इसमें पार्टी ने महिला आरक्षण को जल्द लागू करने की मांग रखी। सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि पार्टी महिलाओं की समानता और अधिकारों का समर्थन करती है। SAD ने संसद में राज्यों की सीटों में समान वृद्धि के प्रस्ताव का भी समर्थन किया। पार्टी ने परिसीमन और महिला आरक्षण को जल्द लागू करने की बात कही। यह रुख केंद्र सरकार की प्रस्तावित व्यवस्था से मेल खाता दिखाई देता है। हालांकि किसी नीति पर समर्थन को सीधे बीजेपी के साथ गठबंधन का संकेत मानना जल्दबाजी होगी।
तीसरा संकेत: नांदेड़ के बाद बढ़ी राजनीतिक गर्माहट
सुखबीर सिंह बादल पर हमले के बाद प्रधानमंत्री का तुरंत फोन करना भी दोनों दलों के बीच संभावित नजदीकी की चर्चा का कारण बना है। हरसिमरत कौर बादल ने प्रधानमंत्री के इस कदम की सार्वजनिक रूप से सराहना की। उन्होंने कहा कि पीएम ने घटना का तत्काल संज्ञान लिया और जांच में केंद्रीय एजेंसियों के समन्वय की बात कही। हालांकि यह राजनीतिक सहयोग का औपचारिक प्रमाण नहीं है, लेकिन पंजाब के मौजूदा सियासी माहौल में इस तरह के संवाद को अहम माना जा रहा है। दोनों दलों के बीच भविष्य की रणनीति को लेकर चर्चाएं होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
बीजेपी और अकाली दल का रहा है लंबा राजनीतिक साथ
बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल का गठबंधन पंजाब की राजनीति में लंबे समय तक प्रभावशाली रहा। दोनों दलों का सामाजिक और चुनावी आधार एक-दूसरे से काफी अलग था। अकाली दल की पकड़ मुख्य रूप से ग्रामीण और सिख मतदाताओं के बीच रही, जबकि बीजेपी का प्रभाव शहरी क्षेत्रों और हिंदू मतदाताओं में मजबूत रहा। इस सामाजिक समीकरण ने दोनों दलों को लंबे समय तक एक-दूसरे का स्वाभाविक सहयोगी बनाए रखा। विधानसभा और लोकसभा चुनावों में सीट बंटवारे के तय फार्मूले के जरिए गठबंधन ने कई चुनावों में मजबूत प्रदर्शन किया।
कृषि कानूनों ने तोड़ा पुराना गठबंधन
दोनों दलों के रिश्तों में सबसे बड़ा बदलाव 2020 में आया, जब केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ पंजाब में किसान आंदोलन तेज हुआ। अकाली दल पर अपने पारंपरिक किसान और ग्रामीण वोट बैंक का दबाव बढ़ा। इसके बाद पार्टी ने बीजेपी से गठबंधन तोड़ने का फैसला किया। यह कदम दोनों दलों के बीच लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक रिश्ते के अंत के तौर पर देखा गया। इसके बाद पंजाब की राजनीति में नया समीकरण बना और आम आदमी पार्टी ने तेजी से अपनी स्थिति मजबूत कर ली।
2022 चुनाव में दोनों दलों का प्रदर्शन रहा कमजोर
2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में बीजेपी और SAD दोनों को बड़ा झटका लगा। आम आदमी पार्टी ने 117 में से 92 सीटें जीतकर सरकार बनाई। वहीं शिरोमणि अकाली दल और बीजेपी को केवल दो-दो सीटों पर संतोष करना पड़ा। चुनाव परिणामों ने यह स्पष्ट कर दिया कि अलग-अलग चुनाव लड़ने से दोनों दलों को बड़ा फायदा नहीं मिला। अब 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए राजनीतिक दल नए समीकरण बनाने में जुटे हैं। ऐसे में बीजेपी और अकाली दल के बीच संभावित नजदीकी पंजाब की चुनावी राजनीति को प्रभावित कर सकती है।
क्या 2027 से पहले फिर साथ आएंगे बीजेपी और SAD?
फिलहाल बीजेपी और अकाली दल के बीच गठबंधन तय होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन हाल के घटनाक्रमों ने राजनीतिक अटकलों को जरूर तेज कर दिया है। मोदी-बादल मुलाकात, सुखबीर पर हमले के बाद पीएम का फोन और कुछ नीतिगत मुद्दों पर SAD का केंद्र के रुख का समर्थन—इन घटनाओं को संभावित राजनीतिक संवाद के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। असली तस्वीर सीट बंटवारे, चुनावी रणनीति और दोनों दलों के बीच औपचारिक बातचीत के बाद ही साफ होगी। 2027 का पंजाब चुनाव इस पुराने गठबंधन की वापसी का बड़ा टेस्ट बन सकता है।