टोंक की सोडा पंचायत में छवि राजावत की वापसी, तीसरी बार बनीं सरपंच
देश की पहली MBA सरपंच के रूप में पहचान बनाने वाली छवि राजावत एक बार फिर चर्चा में हैं। राजस्थान के टोंक जिले की सोडा ग्राम पंचायत से उन्होंने तीसरी बार सरपंच का चुनाव जीत लिया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 400 से अधिक वोटों से हराया। इससे पहले वह 2010 से 2020 तक लगातार दो कार्यकाल सरपंच रह चुकी हैं। उनके पिछले कार्यकालों में गांव में जल संरक्षण, सड़क, बैंकिंग और महिला सशक्तीकरण से जुड़े कई काम हुए।

मुख्य बातें
- देश की पहली MBA सरपंच छवि राजावत की वापसी, तीसरी बार बनीं सरपंच
- MBA के बाद गांव की सेवा, जानिए छवि राजावत का पूरा सफर
- 10 साल सरपंच रहीं छवि राजावत, अब तीसरी बार संभालेंगी जिम्मेदारी
TONK,06 NOV.2026:
तीसरी बार सरपंच बनने के साथ लौटीं ग्रामीण राजनीति में
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, छवि राजावत ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 400 से अधिक वोटों से हराया है। इस जीत के साथ वह तीसरी बार सोडा ग्राम पंचायत की सरपंच बनी हैं। इससे पहले वह 2010 से 2020 तक लगातार दो कार्यकाल इस पद पर रह चुकी हैं। ग्रामीणों की मांग पर उन्होंने 2026 के पंचायत चुनाव में दोबारा मैदान में उतरने का फैसला किया था। चुनाव से पहले प्रकाशित रिपोर्टों में भी उनके सोडा से उम्मीदवार बनने की जानकारी दी गई थी।
MBA की पढ़ाई के बाद गांव की राजनीति में रखा कदम
छवि राजावत की शैक्षणिक पृष्ठभूमि ने उन्हें देशभर में अलग पहचान दिलाई। उन्होंने आंध्र प्रदेश के ऋषि वैली स्कूल और अजमेर के मेयो कॉलेज गर्ल्स स्कूल में पढ़ाई की। इसके बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी श्रीराम कॉलेज से स्नातक किया। उन्होंने पुणे के बालाजी इंस्टीट्यूट ऑफ मॉडर्न मैनेजमेंट से MBA की डिग्री हासिल की। कॉर्पोरेट क्षेत्र में काम करने के बाद उन्होंने अपने पैतृक गांव सोडा की जिम्मेदारी संभालने का फैसला किया। उन्हें देश की पहली MBA सरपंच के रूप में पहचान मिली।
तालाब से लेकर सड़कों तक विकास कार्यों पर रहा जोर
छवि राजावत के पिछले कार्यकालों में गांव की बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया। उनके आधिकारिक परिचय के अनुसार, सोडा में जल संरक्षण, सौर ऊर्जा, पेयजल और सड़क निर्माण से जुड़े प्रयास किए गए। गांव में करीब 40 पक्की सड़कों का निर्माण कराया गया। सामुदायिक भागीदारी से घरों में शौचालय बनाने का अभियान भी शुरू किया गया। सूखे की समस्या से निपटने के लिए तालाब के जीर्णोद्धार और वर्षा जल संरक्षण पर काम हुआ। इन पहलों में स्थानीय लोगों और संस्थाओं का सहयोग भी शामिल रहा।
गांव में बैंकिंग और महिला सशक्तीकरण की पहल
सोडा के ग्रामीणों को बैंकिंग सुविधाओं के लिए दूर नहीं जाना पड़े, इसके लिए गांव में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की शाखा खुलवाने की पहल की गई। इसके अलावा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कौशल विकास और डिजिटल साक्षरता से जुड़े कार्यक्रमों पर काम हुआ। गांव में सौर ऊर्जा और शिक्षा से संबंधित प्रयास भी किए गए। इन पहलों का उद्देश्य ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर सुविधाएं उपलब्ध कराना और विकास में उनकी भागीदारी बढ़ाना था।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मिली पहचान
छवि राजावत ने ग्रामीण विकास और स्थानीय प्रशासन से जुड़े विषयों पर कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी बात रखी है। वर्ष 2011 में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र से जुड़े एक सम्मेलन में ग्रामीण विकास और गरीबी उन्मूलन के मुद्दे उठाए थे। उन्हें पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम से सम्मान मिला। इसके अलावा पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उन्हें प्रथम महिला राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया था। उनके काम को लेकर विभिन्न संस्थाओं ने भी उन्हें सम्मानित किया है।
तीसरी जीत के बाद फिर संभालेंगी गांव की जिम्मेदारी
सोडा ग्राम पंचायत से तीसरी बार चुनाव जीतने की खबर के बाद छवि राजावत की राजनीतिक वापसी चर्चा में है। उनके सामने अब गांव की मौजूदा जरूरतों के अनुरूप विकास कार्यों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी। जल संरक्षण, शिक्षा, रोजगार, महिला सशक्तीकरण और बुनियादी सुविधाएं ग्रामीण विकास के अहम मुद्दे बने रहेंगे। उनकी नई पारी पर गांव के लोगों की उम्मीदें टिकी हैं।
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