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‘BJP वाले सावधान रहें, ये पुराने पाप धोना चाहते हैं’, TMC पर शुभेंदु के मंत्री ने चेताया

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आ गया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की सरकार में शामिल मंत्री स्वपन दासगुप्त ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर जबरदस्त हमला बोला है। उन्होंने बीजेपी कार्यकर्ताओं को चेतावनी देते हुए कहा कि वे सावधान रहें, क्योंकि टीएमसी अपने ‘पुराने पापों’ को धोने की कोशिश कर रही है। यह बयान उस समय आया है जब टीएमसी में आंतरिक कलह चरम पर है और पार्टी के 58 विधायकों के एक गुट को विधानसभा में प्रतिपक्ष की मान्यता मिल गई है। इस गुट का नेतृत्व ऋतब्रत बनर्जी कर रहे हैं, जिन्हें ममता बनर्जी का समर्थन प्राप्त नहीं है।

स्वपन दासगुप्त का तीखा हमला: टीएमसी में मची है हाहाकार

पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री स्वपन दासगुप्त ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि तृणमूल कांग्रेस अब बिखर चुकी है और ममता बनर्जी के हाथ से पार्टी फिसलती हुई दिख रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी नेता अपनी गिरती छवि और बढ़ते भ्रष्टाचार के मामलों को छिपाने के लिए बीजेपी को निशाना बना रहे हैं। स्वपन दासगुप्त ने कहा, “बीजेपी वाले सावधान रहें, ये लोग अपने पुराने पाप धोना चाहते हैं। टीएमसी के अंदर जो चल रहा है, वह उनकी कमजोरी का सबूत है।” उनके इस बयान ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।

58 विधायकों के गुट को मिला प्रतिपक्ष का दर्जा, ममता को झटका

टीएमसी के लिए यह सबसे बड़ा झटका है कि विधानसभा में उनके ही 58 विधायकों के एक गुट को औपचारिक रूप से प्रतिपक्ष की मान्यता मिल गई है। इस गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी हैं, जो ममता बनर्जी के सख्त विरोधी माने जाते हैं। विधानसभा नियमावली के तहत, कुल सदस्यों के 10% से अधिक विधायकों वाला कोई भी गुट प्रतिपक्ष का दर्जा पाने का हकदार होता है। इस फैसले से ममता बनर्जी की ताकत कमजोर हुई है और विधानसभा में उनकी सरकार के खिलाफ एक मजबूत आवाज उठ खड़ी हुई है। यह घटना टीएमसी के टूटने के संकेत दे रही है।

ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई में विद्रोही गुट हुआ मजबूत

ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई में यह विद्रोही गुट लगातार ममता बनर्जी की नीतियों और नेतृत्व शैली पर सवाल उठा रहा है। विधायकों का कहना है कि पार्टी में लोकतंत्र खत्म हो चुका है और सभी निर्णय एक परिवार विशेष द्वारा लिए जा रहे हैं। प्रतिपक्ष का दर्जा मिलने से अब इस गुट को विधानसभा में अधिकारिक मंच मिल गया है, जहां वे सरकारी कामकाज पर सवाल उठा सकते हैं और बहस में हिस्सा ले सकते हैं। यह विकास टीएमसी के लिए एक बड़ी राजनीतिक चुनौती है, खासकर आगामी स्थानीय निकाय चुनावों और भविष्य के विधानसभा चुनावों की दृष्टि से।

बीजेपी की खुशी, टीएमसी के पतन की बात कही

इस घटनाक्रम से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में भी खुशी की लहर है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि यह टीएमसी के पतन की शुरुआत है। स्वपन दासगुप्त के बयान को इसी संदर्भ में देखा जा रहा है। बीजेपी का मानना है कि ममता बनर्जी का वर्चस्व अब खत्म हो चुका है और जनता उनके भ्रष्टाचार और गुंडागर्दी से तंग आ चुकी है। बीजेपी ने ऐलान किया है कि वह विधानसभा में इस विद्रोही गुट के साथ मिलकर ममता सरकार की नाकामियों को उजागर करेगी। राज्य में राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं।

आगे क्या होगा? राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत हो सकती है। अगर टीएमसी के अन्य विधायक भी इस गुट में शामिल होते हैं, तो ममता बनर्जी की सरकार अल्पमत में आ सकती है। हालांकि, अभी के लिए शुभेंदु अधिकारी की सरकार मजबूत है, लेकिन टीएमसी के टूटने से बीजेपी को सबसे ज्यादा फायदा होने की संभावना है। सभी की नजरें अब इस बात पर हैं कि ममता बनर्जी इस संकट से कैसे निपटती हैं और क्या वे अपने विद्रोही विधायकों को मनाने में सफल होती हैं या नहीं।

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