रिफाइनरी लागत, महिला आरक्षण और चुनावों पर सरकार घिरी; नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के आरोप, भाजपा ने कहा—विकास कार्य जारी
जयपुर
राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने बुधवार को प्रदेश की भाजपा सरकार और केंद्र की नीतियों को लेकर कई मुद्दों पर सवाल उठाए। उन्होंने रिफाइनरी परियोजना की लागत बढ़ने, महिला आरक्षण बिल की टाइमिंग और स्थानीय निकाय व पंचायत चुनावों में देरी को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए।
रिफाइनरी लागत पर सवाल
जूली ने कहा कि वर्ष 2013 में यूपीए सरकार के दौरान सोनिया गांधी द्वारा शुरू किए गए रिफाइनरी प्रोजेक्ट की लागत शुरुआती अनुमान 37 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर करीब 80 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि परियोजना में देरी के कारण यह बढ़ोतरी हुई, जिससे राज्य को आर्थिक नुकसान और युवाओं को रोजगार के अवसरों में देरी हुई।
वहीं, भाजपा सरकार का पक्ष है कि परियोजना में तकनीकी और व्यावहारिक कारणों से लागत में संशोधन हुआ है और काम तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री पर तंज, भाजपा का जवाब
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर टिप्पणी करते हुए जूली ने कहा कि केवल कार्यक्रमों और व्यवस्थाओं तक सीमित रहने के बजाय सरकार को परियोजना की समयबद्ध पूर्णता पर ध्यान देना चाहिए।
दूसरी ओर, भाजपा नेताओं का कहना है कि वर्तमान सरकार परियोजनाओं को गति देने और निवेश बढ़ाने पर काम कर रही है।
महिला आरक्षण पर राजनीति
महिला आरक्षण बिल को लेकर जूली ने कहा कि यह पहल कांग्रेस की पुरानी सोच का हिस्सा रही है और इसे चुनावी समय में लाना राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश हो सकती है। उन्होंने जनगणना और परिसीमन के बाद ही इसे लागू करने की शर्त पर भी सवाल उठाए।
भाजपा का कहना है कि महिला सशक्तिकरण के लिए यह एक ऐतिहासिक कदम है और इसे लागू करने की प्रक्रिया संवैधानिक प्रावधानों के तहत आगे बढ़ेगी।
चुनावों में देरी पर विवाद
स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों को लेकर जूली ने आरोप लगाया कि सरकार संभावित हार के डर से चुनाव टाल रही है। उनका कहना है कि इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
सरकार की ओर से तर्क दिया गया है कि चुनावों की प्रक्रिया कानूनी और प्रशासनिक कारणों के अनुसार तय की जाती है और समय आने पर चुनाव कराए जाएंगे।
शिक्षा और अन्य मुद्दे
शिक्षा विभाग की पहलों पर टिप्पणी करते हुए जूली ने कहा कि जर्जर स्कूल भवनों की मरम्मत प्राथमिकता होनी चाहिए।
वहीं, सरकार का कहना है कि शिक्षा क्षेत्र में बुनियादी ढांचे और सुधार दोनों पर समान रूप से काम किया जा रहा है।
इस तरह, नेता प्रतिपक्ष ने कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश की है, जबकि भाजपा ने अपने स्तर पर विकास कार्यों और नीतिगत फैसलों का बचाव किया है।