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सीकर में बनेगा चौधरी चरण सिंह का देश का सबसे बड़ा स्मारक, 21 फीट की अष्टधातु प्रतिमा होगी खास आकर्षण

राजस्थान के सीकर में भारत रत्न और पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की स्मृति में देश का सबसे बड़ा स्मारक बनने जा रहा है। जयपुर रोड स्थित रामू का बास तिराहे पर बनने वाले इस स्मारक में 21 फीट ऊंची अष्टधातु की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। करीब चार टन वजन वाली इस प्रतिमा पर लगभग एक करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। स्मारक का शिलान्यास अगले महीने प्रस्तावित है।

21 फीट ऊंची अष्टधातु प्रतिमा होगी स्मारक की पहचान

सीकर शहर के पूर्वी प्रवेश द्वार पर बनने वाले चौधरी चरण सिंह स्मारक की सबसे बड़ी खासियत उनकी विशाल प्रतिमा होगी। भारत रत्न चौधरी चरण सिंह स्मृति संस्थान ने प्रतिमा का डिजाइन तैयार कर लिया है। प्रतिमा में चौधरी चरण सिंह को उनके पारंपरिक पहनावे धोती-कुर्ता और टोपी में दिखाया जाएगा। उनके हाथ जुड़े हुए अंदाज में होंगे, जबकि पैरों में जूतियां और हाथ में घड़ी भी दिखाई जाएगी। यह प्रतिमा अष्टधातु से तैयार होगी और इसका वजन करीब चार टन रहेगा।

दो करोड़ रुपये की लागत से तैयार होगा भव्य स्मारक

चौधरी चरण सिंह स्मृति संस्थान के अनुसार, करीब 1300 वर्गमीटर क्षेत्र में बनने वाले इस स्मारक पर लगभग दो करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। स्मारक को त्रिस्तरीय आधार पर विकसित किया जाएगा, जहां सात फीट ऊंचे पेडेस्टल पर 21 फीट की प्रतिमा स्थापित होगी। परिसर में चौधरी चरण सिंह के जीवन और विचारों को दर्शाने के लिए म्यूजियम और सार्वजनिक पुस्तकालय भी बनाया जाएगा। इसके अलावा स्मारक के चारों ओर आकर्षक पार्क विकसित करने की योजना है।

सियासत से ऊपर उठकर सभी दलों का मिल रहा सहयोग

इस स्मारक निर्माण की खास बात यह है कि इसमें विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की भागीदारी देखने को मिल रही है। संस्थान की अध्यक्षता कांग्रेस के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष नारायण सिंह कर रहे हैं, जबकि भाजपा से राज्यसभा सदस्य घनश्याम तिवाड़ी उपाध्यक्ष हैं। माकपा सांसद अमराराम भी संस्थान की बैठकों और कार्यक्रमों में शामिल होते हैं। विभिन्न संगठनों और नेताओं की ओर से आर्थिक सहयोग दिया जा रहा है। अब तक संस्थान को करीब 1.40 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त हो चुकी है।

किसान एकता और शेखावाटी की पहचान से जुड़ा स्मारक

चौधरी चरण सिंह को किसानों के हितों के लिए संघर्ष करने वाले नेताओं में प्रमुख माना जाता है। सीकर और शेखावाटी क्षेत्र का किसान आंदोलनों से पुराना जुड़ाव रहा है। वर्ष 1935 का कूदन किसान आंदोलन भी इसी क्षेत्र के इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। स्मारक निर्माण का उद्देश्य किसानों की एकता और ग्रामीण भारत के योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। चौधरी चरण सिंह के विचारों और किसान हितों से जुड़े योगदान के कारण उन्हें शेखावाटी क्षेत्र में विशेष सम्मान दिया जाता है।

शेखावाटी की ‘धड़कन’ के रूप में जानी जाती है चौधरी चरण सिंह की विरासत

चौधरी चरण सिंह का शेखावाटी से सामाजिक और वैचारिक जुड़ाव लंबे समय से रहा है। आर्य समाज और किसान आंदोलनों से जुड़े उनके योगदान ने उन्हें क्षेत्र में अलग पहचान दिलाई। इससे पहले नवलगढ़ रोड पर उनके नाम से बड़ा द्वार बनाया गया था और अब शहर में भव्य स्मारक की स्थापना की जा रही है। यह स्मारक आने वाले समय में किसान चेतना, सामाजिक एकता और क्षेत्रीय इतिहास का प्रमुख केंद्र बनने की उम्मीद है।

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Stv News Rajasthan

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