पासपोर्ट सत्यापन केस में पूर्व IAS संजय दीक्षित को बड़ी राहत, राजस्थान हाईकोर्ट ने CBI की FIR की रद्द
राजस्थान हाईकोर्ट ने पासपोर्ट सत्यापन से जुड़े बहुचर्चित मामले में पूर्व आईएएस अधिकारी संजय दीक्षित और सह-आरोपी रणजीत सिंह को बड़ी राहत देते हुए सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया है। अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद माना कि मामले को लंबित रखने का पर्याप्त कानूनी आधार नहीं बचा है। इस फैसले के साथ दोनों आरोपियों के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही पर फिलहाल विराम लग गया है।
2009 के पासपोर्ट सत्यापन विवाद से जुड़ा है मामला
यह मामला वर्ष 2009 में सामने आया था, जब प्रहलाद गुर्जर नामक व्यक्ति ने पासपोर्ट कार्यालय में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि रणजीत सिंह को आपराधिक मामलों के बावजूद पासपोर्ट जारी किया गया। शिकायत में पासपोर्ट सत्यापन प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए थे। बाद में अदालत के निर्देश पर मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपी गई, जिसने जांच के बाद तत्कालीन आईएएस अधिकारी संजय दीक्षित सहित अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। इसके बाद मामला लंबे समय तक न्यायिक प्रक्रिया में विचाराधीन रहा।
पूर्व IAS की ओर से कोर्ट में रखा गया यह पक्ष
सुनवाई के दौरान पूर्व आईएएस संजय दीक्षित की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने अदालत को बताया कि जैसे ही रणजीत सिंह के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों और गिरफ्तारी की जानकारी मिली, तत्कालीन अधिकारी ने बिना देरी किए पुलिस को चरित्र सत्यापन वापस लेने की सूचना भेज दी थी। बचाव पक्ष ने दलील दी कि अधिकारी ने अपने अधिकार और जिम्मेदारी के अनुरूप कार्रवाई की थी तथा उनके खिलाफ दुर्भावनापूर्ण तरीके से मामला दर्ज किया गया। इसलिए उनके विरुद्ध आपराधिक कार्रवाई जारी रखना न्यायसंगत नहीं है।
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रणजीत सिंह ने भी FIR रद्द करने की मांग रखी
सह-आरोपी रणजीत सिंह की ओर से अदालत में कहा गया कि जिस मूल याचिका के आधार पर सीबीआई जांच शुरू हुई थी, वह पहले ही समाप्त हो चुकी है। ऐसे में उसी आधार पर दर्ज एफआईआर को बनाए रखने का कोई कानूनी औचित्य नहीं है। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि जब मूल न्यायिक आधार समाप्त हो चुका है, तब आपराधिक कार्यवाही जारी रखना कानून की भावना के अनुरूप नहीं माना जा सकता।
CBI ने किया विरोध, लेकिन चार्जशीट नहीं हो सकी दाखिल
सीबीआई की ओर से अदालत में एफआईआर रद्द करने का विरोध किया गया। एजेंसी ने कहा कि चरित्र सत्यापन ऐसे व्यक्ति का किया गया था, जिसके खिलाफ आपराधिक रिकॉर्ड मौजूद था। हालांकि सुनवाई के दौरान सीबीआई ने यह भी स्वीकार किया कि जांच पूरी होने के बावजूद विभिन्न कारणों से मामले में चार्जशीट दाखिल नहीं की जा सकी। इस तथ्य को भी अदालत ने सुनवाई के दौरान ध्यान में रखा।
हाईकोर्ट ने कहा- FIR जारी रखने का आधार नहीं
न्यायमूर्ति अनूप कुमार ढंड की एकल पीठ ने सभी दस्तावेजों, रिकॉर्ड और पक्षकारों की दलीलों का विस्तृत परीक्षण करने के बाद कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में एफआईआर को जारी रखने का पर्याप्त कानूनी आधार नहीं बचा है। अदालत ने इसी आधार पर पूर्व आईएएस संजय दीक्षित और रणजीत सिंह के खिलाफ दर्ज सीबीआई एफआईआर को रद्द करने के आदेश जारी कर दिए। इस फैसले से दोनों को बड़ी कानूनी राहत मिली है।
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