परिसीमन के खिलाफ तमिलनाडु विधानसभा में प्रस्ताव, CM विजय बोले- ‘महिला आरक्षण में देरी नहीं हो’
चेन्नई। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने बुधवार को विधानसभा में लोकसभा सीटों के परिसीमन को लेकर विशेष प्रस्ताव पेश किया। प्रस्ताव में केंद्र से लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों की संख्या को स्थायी रूप से बनाए रखने की मांग की गई है। मुख्यमंत्री विजय ने साथ ही महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को जल्द लागू करने की पैरवी की। उनका कहना है कि महिला आरक्षण को परिसीमन की प्रक्रिया से जोड़ने के कारण इसके लागू होने में देरी नहीं होनी चाहिए। प्रस्ताव में उन राज्यों के हितों की सुरक्षा की भी मांग की गई है, जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण के प्रयासों को प्रभावी तरीके से लागू किया है।
लोकसभा की 543 सीटें स्थायी रखने की मांग
मुख्यमंत्री विजय की ओर से पेश प्रस्ताव में केंद्र सरकार से लोकसभा की वर्तमान 543 सीटों को स्थायी रूप से बनाए रखने का आग्रह किया गया है। परिसीमन के तहत जनसंख्या के आधार पर लोकसभा क्षेत्रों और सीटों के पुनर्गठन की संभावना को लेकर दक्षिणी राज्यों में चिंता जताई जाती रही है। तमिलनाडु सरकार का तर्क है कि जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया है, उन्हें इसका राजनीतिक नुकसान नहीं उठाना चाहिए। प्रस्ताव के जरिए केंद्र से ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की गई है, जिससे राज्यों के प्रतिनिधित्व पर असंतुलित प्रभाव न पड़े।
महिला आरक्षण को परिसीमन से अलग करने की मांग
सीएम विजय ने महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को लेकर भी स्पष्ट रुख रखा। उन्होंने कहा कि महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देना संवैधानिक अधिकार से जुड़ा विषय है और इसके लिए अनिश्चितकाल तक इंतजार नहीं किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, महिला आरक्षण को परिसीमन की प्रक्रिया से जोड़ने पर इसके लागू होने में देरी हो सकती है। विजय ने प्रस्ताव में 2029 के लोकसभा चुनावों से ही महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने का समर्थन किया है। उनका सुझाव है कि यह आरक्षण मौजूदा 543 लोकसभा सीटों के आधार पर लागू किया जा सकता है।
‘जनसंख्या नियंत्रण करने वाले राज्यों को नुकसान न हो’
तमिलनाडु सरकार की चिंता का एक बड़ा कारण परिसीमन के दौरान जनसंख्या को आधार बनाए जाने से जुड़ा है। प्रस्ताव में कहा गया है कि जिन राज्यों ने परिवार नियोजन और जनसंख्या नियंत्रण नीतियों को अपनाया, उन्हें इसके कारण लोकसभा में अपने प्रतिनिधित्व में नुकसान नहीं होना चाहिए। मुख्यमंत्री विजय ने केंद्र से ऐसी व्यवस्था तैयार करने की मांग की है, जिससे राज्यों के बीच राजनीतिक प्रतिनिधित्व का संतुलन बना रहे। तमिलनाडु लंबे समय से इसी मुद्दे पर दक्षिणी राज्यों के हितों की रक्षा की बात करता रहा है।
परिसीमन को लेकर दक्षिणी राज्यों में चिंता
लोकसभा सीटों के संभावित परिसीमन को लेकर दक्षिण भारत के राज्यों में राजनीतिक बहस तेज रही है। चिंता यह है कि यदि सीटों का बंटवारा मौजूदा जनसंख्या के आधार पर बड़े पैमाने पर बदला जाता है, तो अधिक जनसंख्या वाले राज्यों की सीटें बढ़ सकती हैं और कम जनसंख्या वाले राज्यों की हिस्सेदारी तुलनात्मक रूप से घट सकती है। तमिलनाडु का ताजा प्रस्ताव इसी आशंका के बीच आया है। राज्य सरकार चाहती है कि प्रतिनिधित्व तय करते समय जनसंख्या नियंत्रण में किए गए प्रयासों को भी ध्यान में रखा जाए।
विजय सरकार का राजनीतिक संदेश
मुख्यमंत्री विजय का यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है, जब परिसीमन को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक चर्चा जारी है। विधानसभा में प्रस्ताव पेश कर तमिलनाडु सरकार ने राज्य के हितों को प्राथमिकता देने का संदेश दिया है। प्रस्ताव में लोकसभा सीटों की मौजूदा संख्या को बनाए रखने के साथ महिलाओं के 33 प्रतिशत आरक्षण को जल्द लागू करने की मांग को एक साथ रखा गया है। इससे विजय सरकार ने परिसीमन और महिला राजनीतिक प्रतिनिधित्व—दोनों मुद्दों पर अपना रुख स्पष्ट किया है। अब इस प्रस्ताव पर केंद्र और अन्य राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी।