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अलवर में निर्माण की नई दिशा, देश के पहले प्रोजेक्ट से 50% तेज काम का लक्ष्य

अलवर में निर्माण क्षेत्र में नई तकनीक के इस्तेमाल की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट तैयार किया जा रहा है। देश के पहले ऐसे प्रोजेक्ट के तौर पर विकसित किए जा रहे इस मॉडल में औद्योगीकृत निर्माण प्रणाली का इस्तेमाल होगा। इसके जरिए पारंपरिक निर्माण प्रक्रिया की तुलना में काम की रफ्तार करीब 50 फीसदी तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी PSP ग्रुप को मिली है। इसमें स्टे-इन-प्लेस PVC फॉर्मवर्क तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। खास बात यह है कि निर्माण के बाद PVC फॉर्मवर्क को हटाया नहीं जाएगा, बल्कि यह भवन का स्थायी हिस्सा बन जाएगा।

फैक्ट्री से साइट तक पहुंचेगा निर्माण का सामान

इस प्रोजेक्ट में निर्माण प्रक्रिया को पारंपरिक तरीके से अलग रखा गया है। फैक्ट्री में तैयार किए गए इंटरलॉकिंग PVC पैनल निर्माण स्थल तक पहुंचाए जाएंगे।साइट पर इन पैनलों को तय डिजाइन के अनुसार असेंबल किया जाएगा। इसके बाद इसमें सरिया और जरूरी सर्विस कंड्यूट लगाए जाएंगे। सभी व्यवस्थाएं पूरी होने के बाद पैनलों के अंदर कंक्रीट की ढलाई की जाएगी।इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य निर्माण के अलग-अलग चरणों में लगने वाले समय को कम करना है।

PVC फॉर्मवर्क बनेगा भवन का स्थायी हिस्सा

इस तकनीक की खासियत स्टे-इन-प्लेस फॉर्मवर्क है। सामान्य निर्माण प्रक्रिया में कंक्रीट जमने के बाद फॉर्मवर्क को हटाया जाता है।लेकिन इस प्रोजेक्ट में PVC पैनल को हटाने की जरूरत नहीं होगी। कंक्रीट जमने के बाद यही पैनल भवन की संरचना का स्थायी हिस्सा बने रहेंगे।इससे निर्माण प्रक्रिया के एक चरण को हटाने के साथ श्रम और समय की बचत का लक्ष्य रखा गया है।

निर्माण की रफ्तार 50 फीसदी तक बढ़ाने का लक्ष्य

प्रोजेक्ट के जरिए पारंपरिक निर्माण प्रणाली की तुलना में निर्माण की गति को करीब 50 फीसदी तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।इसके लिए फैक्ट्री में पहले से तैयार सामग्री और साइट पर व्यवस्थित असेंबली प्रक्रिया का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे साइट पर होने वाले काम को अधिक योजनाबद्ध तरीके से पूरा करने की कोशिश होगी।साथ ही अलग-अलग विशेषज्ञ ट्रेड पर निर्भरता कम करने और श्रम उत्पादकता बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

दीवार और स्लैब की होगी मोनोलिथिक ढलाई

प्रोजेक्ट में दीवार और स्लैब को एक साथ मोनोलिथिक तरीके से तैयार करने की दिशा में काम किया जा रहा है।इसका उद्देश्य निर्माण के अलग-अलग चरणों के बीच होने वाले समय अंतर को कम करना है। एकीकृत ढलाई से काम के क्रम और साइट पर गतिविधियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने का प्रयास किया जाएगा।इससे निर्माण प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और समयबद्ध बनाने की उम्मीद है।

रोबोटिक्स का भी किया जा रहा परीक्षण

प्रोजेक्ट में तकनीक के साथ ऑटोमेशन पर भी काम किया जा रहा है। सरिया बांधने के काम में रोबोटिक्स के परीक्षण और चरणबद्ध इस्तेमाल की दिशा में तैयारी की जा रही है।इसका उद्देश्य श्रम आधारित गतिविधियों को अधिक व्यवस्थित करना और निर्माण की उत्पादकता बढ़ाना है। यदि परीक्षण सफल रहता है तो भविष्य में इस तकनीक का इस्तेमाल निर्माण के दूसरे चरणों में भी बढ़ाया जा सकता है।

समय और सामग्री का रखा जाएगा पूरा रिकॉर्ड

प्रोजेक्ट के दौरान निर्माण प्रक्रिया से जुड़े आंकड़ों को भी व्यवस्थित तरीके से दर्ज किया जाएगा। इसमें समय, श्रम-घंटे, सामग्री की खपत, निर्माण के दौरान निकलने वाला अपशिष्ट और ऊर्जा उपयोग शामिल रहेगा।इन आंकड़ों के जरिए यह आकलन किया जाएगा कि औद्योगीकृत निर्माण प्रणाली का वास्तविक प्रभाव कितना रहा।इससे तकनीक के फायदे और सीमाओं का आंकड़ों के आधार पर मूल्यांकन करने में मदद मिल सकती है।

PSP ग्रुप ने बताया भविष्य का मॉडल

PSP ग्रुप के चेयरमैन बी.के. श्रीवास्तव के मुताबिक, अलवर का यह प्रोजेक्ट निर्माण क्षेत्र में नई दिशा देने की कोशिश है।उनका कहना है कि फैक्ट्री में सटीकता, साइट पर उत्पादकता और तय योजना के अनुसार क्रियान्वयन को एक साथ जोड़कर भविष्य के निर्माण का नया मॉडल तैयार किया जा रहा है।प्रोजेक्ट की प्रगति और दर्ज किए जाने वाले आंकड़ों से यह स्पष्ट होगा कि नई तकनीक निर्माण की गति, श्रम और संसाधनों के इस्तेमाल में कितना बदलाव ला पाती है।

निर्माण क्षेत्र में बदलाव की उम्मीद

अलवर में तैयार किया जा रहा यह प्रोजेक्ट निर्माण प्रक्रिया में तकनीक और औद्योगीकरण के इस्तेमाल की दिशा में एक प्रयोग के तौर पर देखा जा रहा है।यदि निर्धारित लक्ष्य के मुताबिक निर्माण की गति और उत्पादकता में सुधार होता है, तो भविष्य में इसी तरह की तकनीकों का इस्तेमाल बड़े निर्माण प्रोजेक्ट्स में बढ़ सकता है। फिलहाल इस प्रोजेक्ट के परिणाम और इसके दौरान जुटाए जाने वाले आंकड़ों पर नजर रहेगी।

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Stv News Rajasthan

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