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दिल्ली में जज अमन कुमार शर्मा की संदिग्ध मौत: पारिवारिक विवाद, मानसिक तनाव और उकसावे के आरोपों ने खड़े किए गंभीर सवाल

सफदरजंग एन्क्लेव में तैनात युवा न्यायिक अधिकारी अमन कुमार शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने न केवल न्यायिक व्यवस्था बल्कि समाज को भी झकझोर दिया है। पुलिस ने मामले में आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में पत्नी स्वाति मलिक और उनकी आईएएस चचेरी बहन निधि मलिक समेत अन्य के खिलाफ केस दर्ज कर जांच तेज कर दी है। परिजनों के आरोप, अंतिम कॉल और घटनास्थल की परिस्थितियां इस मामले को बेहद संवेदनशील बना रही हैं।

घटना की रात: एक आखिरी कॉल और टूटा हुआ परिवार

घटना से ठीक पहले अमन कुमार शर्मा ने अपने पिता को फोन कर गहरे मानसिक तनाव और पारिवारिक विवाद की बात कही थी। पिता के अनुसार, बेटे की आवाज में दर्द और बेबसी साफ झलक रही थी। उन्होंने कहा कि “अब जीना मुश्किल हो गया है”, जिसे परिवार अब एक चेतावनी के रूप में देख रहा है। जब पिता अलवर से दिल्ली पहुंचे, तो घर का माहौल तनावपूर्ण था। कुछ ही देर बाद जब बाथरूम का दरवाजा तोड़ा गया, तो अमन फंदे से लटके मिले—यह दृश्य पूरे परिवार को जिंदगी भर का दर्द दे गया।

घरेलू कलह और प्रताड़ना के आरोपों ने बढ़ाई गंभीरता

परिजनों ने आरोप लगाया है कि अमन लंबे समय से मानसिक उत्पीड़न का सामना कर रहे थे। उनका कहना है कि घर में उनकी बातों को महत्व नहीं दिया जाता था और लगातार दबाव बनाया जाता था। पत्नी और उनके प्रभावशाली परिवार पर प्रताड़ना के आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, पुलिस सभी पहलुओं—घरेलू विवाद, मानसिक स्वास्थ्य और अन्य संभावनाओं—की निष्पक्ष जांच कर रही है। इस बीच, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, कॉल रिकॉर्ड और मोबाइल डेटा को खंगाला जा रहा है ताकि सच्चाई तक पहुंचा जा सके।

कम उम्र में बड़ी उपलब्धि, लेकिन अधूरी रह गई जिंदगी

महज 25 वर्ष की उम्र में अमन कुमार शर्मा ने अपनी मेहनत और प्रतिभा से न्यायिक सेवा में स्थान पाया था। दिल्ली न्यायिक सेवा में चयन के बाद वे अक्टूबर 2025 से कड़कड़डूमा कोर्ट में पदस्थ थे। उन्होंने सिम्बायोसिस लॉ स्कूल से कानून की पढ़ाई की थी। उनका करियर अभी शुरू ही हुआ था और परिवार को उनसे बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन अचानक आई इस घटना ने सभी सपनों को तोड़ दिया।

अंतिम संस्कार में पसरा सन्नाटा और उठते सवाल

अमन का अंतिम संस्कार अलवर में गमगीन माहौल में किया गया। सबसे दर्दनाक बात यह रही कि इस अंतिम विदाई में ससुराल पक्ष से कोई मौजूद नहीं था। पत्नी और छोटे-छोटे बच्चे भी नहीं पहुंचे, जिससे परिवार के दुख में और गहराई आ गई। पिता ने भारी मन से बेटे को मुखाग्नि दी—यह दृश्य हर किसी की आंखें नम कर गया। इस दौरान परिजन न्याय और सख्त कार्रवाई की मांग करते नजर आए।

माता-पिता का दर्द: सपनों का सहारा छिन गया

पिता प्रेम कुमार शर्मा के लिए यह सदमा असहनीय है। उन्होंने कहा कि उनका बेटा बेहद होनहार था और उसके सामने लंबा भविष्य था। मां की आंखों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे—जिस बेटे को उन्होंने पाल-पोसकर बड़ा किया, वही इस तरह चला गया। परिवार अब सिर्फ न्याय की उम्मीद कर रहा है। उनका कहना है कि अगर किसी की वजह से यह कदम उठाया गया है, तो उसे कानून के तहत कड़ी सजा मिलनी चाहिए।

जांच जारी: हर एंगल से हो रही पड़ताल

दिल्ली पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कई पहलुओं पर जांच शुरू कर दी है। मोबाइल फोन जब्त कर लिया गया है, सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि फिलहाल किसी बड़ी साजिश के स्पष्ट संकेत नहीं मिले हैं, लेकिन आत्महत्या के लिए उकसाने सहित सभी संभावनाओं की गहन जांच की जा रही है। यह मामला अब केवल एक मौत नहीं, बल्कि सामाजिक और पारिवारिक संबंधों पर भी कई गंभीर सवाल खड़ा कर रहा है।

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