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अजमेर में जर्जर मकान गिरा, मलबे में दबे दंपति; पत्नी की मौत, पति गंभीर

राजस्थान के अजमेर में रविवार तड़के एक दर्दनाक हादसा हुआ, जब लोहागल क्षेत्र की बीपीएल आवास कॉलोनी में एक जर्जर मकान अचानक ढह गया। हादसे के समय घर में सो रहा दंपति मलबे में दब गया, जिसमें पत्नी की मौत हो गई जबकि पति गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना ने कॉलोनी की बदहाल स्थिति और प्रशासनिक लापरवाही पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

तेज हवा बनी हादसे की वजह

रविवार सुबह करीब 4 बजे तेज हवा चल रही थी, उसी दौरान जर्जर मकान अचानक भरभराकर गिर गया। मकान गिरते ही इलाके में अफरा-तफरी मच गई और लोगों की चीख-पुकार सुनकर आसपास के निवासी मौके पर पहुंच गए। स्थानीय लोगों ने बिना देरी किए मलबा हटाने का प्रयास शुरू किया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मकान की हालत पहले से ही बेहद खराब थी और हल्की प्राकृतिक मार भी उसे गिराने के लिए काफी साबित हुई।

मलबे में दबे दंपति, पत्नी की मौत

हादसे के वक्त सोनू वाल्मीकि और दीपक वाल्मीकि घर के अंदर सो रहे थे। मकान गिरने के कारण दोनों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला और वे सीधे मलबे के नीचे दब गए। स्थानीय लोगों ने कड़ी मशक्कत के बाद दोनों को बाहर निकाला। गंभीर रूप से घायल सोनू वाल्मीकि को बचाया नहीं जा सका और उसकी मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दीपक वाल्मीकि को घायल अवस्था में अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसका इलाज जारी है।

अस्पताल में चल रहा पति का इलाज

घटना के तुरंत बाद लोगों ने घायल दीपक वाल्मीकि को नजदीकी अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों के अनुसार उसकी हालत गंभीर बनी हुई है और उसे लगातार निगरानी में रखा गया है। हादसे की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस टीम भी मौके पर पहुंची और पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। इस घटना ने कॉलोनी में रहने वाले अन्य लोगों को भी दहशत में डाल दिया है।

किराए पर रह रहा था दंपति, मेंटेनेंस में लापरवाही

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह क्वार्टर दंपति को आवंटित नहीं था, बल्कि वे यहां किराए पर रह रहे थे। नियमों के अनुसार जिन लोगों को आवास आवंटित होते हैं, उन्हीं पर उसकी देखरेख और मरम्मत की जिम्मेदारी होती है। लेकिन संबंधित अलॉटी ने न तो मकान की मरम्मत कराई और न ही सुरक्षा का ध्यान रखा, बल्कि उसे किराए पर दे दिया। इसी लापरवाही को हादसे की बड़ी वजह माना जा रहा है।

25 साल पुराने क्वार्टर, कई मकान जर्जर हालत में

जानकारी के अनुसार, इस बीपीएल आवास कॉलोनी में करीब 25 साल पहले 504 क्वार्टर बनाए गए थे, जिन्हें वर्ष 2011 में पात्र परिवारों को आवंटित किया गया था। लेकिन समय के साथ अधिकांश मकान जर्जर हो चुके हैं और उनकी मरम्मत नहीं की गई। कई क्वार्टर किराए पर चल रहे हैं, जिससे उनकी स्थिति और खराब होती गई। यह हादसा एक चेतावनी के रूप में सामने आया है कि अगर समय रहते मरम्मत नहीं की गई, तो ऐसे हादसे दोबारा हो सकते हैं।

प्रशासन और सिस्टम पर उठे सवाल

इस दर्दनाक घटना के बाद कॉलोनी की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से जर्जर मकानों की शिकायत की जा रही थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब इस हादसे के बाद लोग जिम्मेदारों पर कार्रवाई और कॉलोनी के सभी जर्जर मकानों की जांच की मांग कर रहे हैं, ताकि भविष्य में इस तरह की त्रासदी से बचा जा सके।

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