सोनिया गांधी ने इमरजेंसी, संजय गांधी और बाबरी मस्जिद पर रखी बात, इंदिरा गांधी की हत्या की यादें भी कीं साझा
कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अपनी आगामी किताब 'Belonging: A Journey of Love' से पहले दिए इंटरव्यू में देश के कई अहम ऐतिहासिक घटनाक्रमों पर बात की। उन्होंने 1975 की इमरजेंसी, संजय गांधी की भूमिका, इंदिरा गांधी की हत्या और 1992 में बाबरी मस्जिद गिराए जाने की घटना को याद किया। सोनिया के मुताबिक, इमरजेंसी के फैसले के लिए केवल संजय गांधी जिम्मेदार नहीं थे। इंदिरा गांधी पर उनके कुछ वरिष्ठ सहयोगियों का भी दबाव था। उन्होंने बाबरी मस्जिद गिराए जाने की तस्वीरें देखकर रोने और धर्मनिरपेक्ष भारत के लिए लंबी लड़ाई का एहसास होने की बात भी कही।

मुख्य बातें
- सोनिया गांधी ने इमरजेंसी और बाबरी मस्जिद पर क्या कहा?
- संजय गांधी को लेकर सोनिया गांधी का बड़ा बयान, इंदिरा गांधी का भी किया जिक्र
- इंदिरा गांधी की हत्या से लेकर बाबरी मस्जिद तक, सोनिया गांधी ने साझा की यादें
07 NOV. 2026:
इमरजेंसी के फैसले में संजय गांधी के साथ वरिष्ठ नेताओं की भूमिका का भी जिक्र
सोनिया गांधी ने द हिंदू और द गार्जियन को दिए इंटरव्यू में 1975 में लगी इमरजेंसी पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि आपातकाल के लिए केवल संजय गांधी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। उनके मुताबिक, तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पर कुछ वरिष्ठ सहयोगियों का भी काफी दबाव था।सोनिया ने बताया कि परिवार के भीतर भी इमरजेंसी को लेकर मतभेद थे। राजीव गांधी इस फैसले के खिलाफ थे। उन्होंने अपनी मां को अगला चुनाव आने तक इंतजार करने की सलाह दी थी। वहीं, संजय गांधी इमरजेंसी लगाने के पक्ष में थे। एक पारिवारिक बातचीत के दौरान उन्होंने विपक्ष से अपनी मां को खतरा बताया था।सोनिया ने अपनी किताब में लिखा है कि अगर संजय गांधी को नियंत्रित रखा जाता, तो बाद में हुए नुकसान का बड़ा हिस्सा रोका जा सकता था। उन्होंने यह भी बताया कि राजीव गांधी ने इंदिरा गांधी से इस मुद्दे पर बात करने की कोशिश की थी, लेकिन उनकी बात नहीं मानी गई।
इमरजेंसी की गंभीरता बाद में समझ आई: सोनिया गांधी
सोनिया गांधी ने कहा कि इमरजेंसी के दौरान लोकतांत्रिक अधिकारों पर रोक लगाई गई थी। बिना मुकदमे हिरासत में रखने के खिलाफ मिलने वाली कानूनी सुरक्षा भी प्रभावित हुई थी। उन्होंने कहा कि उस समय इन घटनाओं की गंभीरता उन्हें पूरी तरह समझ नहीं आई थी।हालांकि, इंदिरा गांधी के नजरिए से उस दौर को देखते हुए सोनिया ने हिंसक प्रदर्शनों, सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक परिवहन में आगजनी तथा संगठित अशांति का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सरकारी अधिकारियों और सेना से आदेश नहीं मानने की अपीलें भी की जा रही थीं।सोनिया के मुताबिक, इंदिरा गांधी ने बाद में हालात को समझा और मार्च 1977 में चुनाव कराने का फैसला किया। उन्होंने आपातकाल के दौरान हुई ज्यादतियों पर सार्वजनिक रूप से दुख जताया और माफी भी मांगी थी।
इंदिरा गांधी को अपनी हत्या की आशंका का अंदाजा था
सोनिया गांधी ने 31 अक्टूबर 1984 को इंदिरा गांधी की हत्या से जुड़ी यादें भी साझा कीं। उन्होंने बताया कि स्वर्ण मंदिर में सैन्य कार्रवाई के बाद इंदिरा गांधी को लगातार धमकियां मिल रही थीं।सोनिया के अनुसार, इंदिरा गांधी ने परिवार को पहले ही बता दिया था कि उनकी मृत्यु होने पर क्या करना है। उन्होंने अपने पोते-पोतियों को बहादुर रहने और रोने से बचने की सलाह भी दी थी। सोनिया का मानना है कि इंदिरा गांधी अपने परिवार से आखिरी विदाई लेना चाहती थीं।सोनिया ने बताया कि 31 अक्टूबर को उन्हें पटाखों जैसी आवाज सुनाई दी। वह इंदिरा गांधी के कार्यालय की ओर दौड़ीं, जहां उनकी सास खून से लथपथ पड़ी थीं। उनके सिख सुरक्षाकर्मियों ने स्वर्ण मंदिर में हुई सैन्य कार्रवाई का बदला लेने के लिए उन पर गोलियां चलाई थीं।सोनिया ने बताया कि वह इंदिरा गांधी को कार से अस्पताल ले जाते समय अपनी बाहों में थामे हुए थीं। उन्हें एहसास हो गया था कि इंदिरा गांधी अब उनके सवालों का जवाब नहीं दे रही थीं। यह घटना आज भी उनकी यादों में गहराई से दर्ज है।
राजीव गांधी की हत्या की सच्चाई सामने आने की उम्मीद कम
इंटरव्यू में सोनिया गांधी ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस मामले से जुड़े कई सवालों के जवाब अब तक नहीं मिले हैं।सोनिया का मानना है कि राजीव गांधी की हत्या के पीछे की व्यापक साजिश से जुड़ी पूरी सच्चाई सामने नहीं आई। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच के लिए गठित सबसे हालिया आयोग को मोदी सरकार ने बंद कर दिया था।उन्होंने निराशा जताते हुए कहा कि अब शायद उन्हें इस मामले की पूरी सच्चाई कभी पता नहीं चल पाएगी। यह सोनिया गांधी का अपना आकलन है।
बाबरी मस्जिद गिराए जाने की तस्वीरें देखकर रो पड़ी थीं सोनिया

सोनिया गांधी ने 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद गिराए जाने की घटना पर भी बात की। उन्होंने बताया कि टीवी पर मस्जिद गिराए जाने की तस्वीरें देखकर वह रो पड़ी थीं।सोनिया के मुताबिक, उसी समय उन्हें एहसास हुआ कि अब महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और उनके सहयोगियों के विचारों पर बने धर्मनिरपेक्ष भारत के लिए लंबी लड़ाई लड़नी होगी।उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि बीजेपी और उसकी हिंदुत्व राजनीति के विस्तार में कांग्रेस की अपनी गलतियों का भी कुछ योगदान रहा है। सोनिया ने कहा कि कई मामलों में उनकी पार्टी का रवैया लापरवाही भरा रहा और उसने घटनाओं को होने दिया।
10 नवंबर को प्रकाशित होगी सोनिया गांधी की किताब
ये बातें सोनिया गांधी ने अपनी किताब 'Belonging: A Journey of Love' के प्रकाशन से पहले दिए इंटरव्यू में कहीं। किताब में उन्होंने अपने निजी जीवन के साथ-साथ भारतीय राजनीति के कई महत्वपूर्ण दौर का जिक्र किया है।इसमें इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के साथ उनके संबंधों, आपातकाल, दोनों नेताओं की हत्याओं और कांग्रेस की राजनीतिक यात्रा से जुड़े अनुभव शामिल हैं। किताब 10 नवंबर 2026 को प्रकाशित होने वाली है।
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