26 दिन बाद सोनम वांगचुक ने खत्म किया अनशन, परीक्षा सुधार पर सरकार के भरोसे के बाद लिया फैसला
करीब 26 दिनों तक चली भूख हड़ताल के बाद सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त कर दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर जारी वीडियो संदेश में कहा कि यह आंदोलन किसी सरकार या राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि देश के लाखों छात्रों के भविष्य और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था की मांग के लिए था। सरकार और विभिन्न दलों के सांसदों से मिले आश्वासन के बाद उन्होंने यह निर्णय लिया।
वीडियो जारी कर अनशन खत्म करने की बताई वजह
अनशन समाप्त करने के बाद सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो साझा किया। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य केवल परीक्षा प्रणाली में सुधार और छात्रों को न्याय दिलाने की मांग उठाना था। वांगचुक ने बताया कि सरकार और विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने संसद में परीक्षा व्यवस्था, जवाबदेही और पारदर्शिता के मुद्दे पर गंभीर चर्चा कराने का भरोसा दिया है। इसी आश्वासन के बाद उन्होंने अपना अनशन समाप्त करने का फैसला लिया।
परीक्षा व्यवस्था में सुधार की उठाई मांग
सोनम वांगचुक ने कहा कि केवल परीक्षा आयोजित कराना पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसी व्यवस्था भी जरूरी है जिसमें किसी भी गड़बड़ी या लापरवाही के लिए जिम्मेदारी तय हो। उनका कहना है कि मेहनत करने वाले छात्रों का भविष्य किसी प्रशासनिक चूक या पेपर लीक जैसी घटनाओं की वजह से प्रभावित नहीं होना चाहिए। उन्होंने परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और विश्वसनीय बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
NEET विवाद के बाद बढ़ी छात्रों की चिंता
हाल के महीनों में परीक्षा प्रणाली और विशेष रूप से नीट परीक्षा से जुड़े विवादों ने देशभर के छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी थी। कई छात्रों ने आरोप लगाया कि अनियमितताओं के कारण उनकी मेहनत प्रभावित हुई और परीक्षा व्यवस्था पर भरोसा कमजोर पड़ा। इन्हीं मुद्दों को लेकर व्यापक स्तर पर सुधार की मांग उठी, जिसे लेकर सोनम वांगचुक ने अपना आंदोलन शुरू किया था।
सरकार के आश्वासनों पर टिकी उम्मीदें
सरकार की ओर से परीक्षा सुधार के मुद्दे पर संसद में चर्चा कराने और व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में कदम उठाने का भरोसा दिया गया है। साथ ही यह भी कहा गया है कि परीक्षा सुधार की मांग को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों के प्रति संवेदनशील रुख अपनाया जाएगा। अब देशभर के लाखों छात्र और उनके परिवार इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि इन आश्वासनों को किस तरह ठोस फैसलों में बदला जाता है।