सीकर मास्टर प्लान पर सियासी संग्राम तेज, यूडीएच मंत्री खर्रा और PCC चीफ डोटासरा आमने-सामने
सीकर के बहुचर्चित मास्टर प्लान को लेकर राजस्थान की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। शिक्षानगरी सीकर के शहरी विकास को लेकर चल रही बहस अब सीधे सत्तापक्ष और विपक्ष के शीर्ष नेताओं के बीच टकराव का रूप ले चुकी है। यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा और PCC चीफ गोविंद सिंह डोटासरा आमने-सामने आ गए हैं। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे यह मुद्दा और अधिक राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गया है।
मास्टर प्लान को लेकर बढ़ा सियासी तनाव
सीकर मास्टर प्लान पिछले करीब दो वर्षों से लगातार विवादों में घिरा हुआ है। शहरी सीमा विस्तार, कॉलोनियों के विकास और 80 गांव-ढाणियों को शामिल किए जाने जैसे फैसलों को लेकर असहमति बनी हुई है। इसी बीच सरकार और विपक्ष के बीच बयानबाजी ने माहौल को और गर्म कर दिया है। दोनों पक्ष इसे जनता के हित से जोड़कर पेश कर रहे हैं, लेकिन आरोप-प्रत्यारोप के कारण वास्तविक विकास प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर भी लोग अब स्पष्ट नीति की मांग कर रहे हैं।
यूडीएच मंत्री खर्रा का पलटवार
यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने मास्टर प्लान विवाद पर विपक्ष को घेरते हुए कहा कि इस मुद्दे की सबसे ज्यादा चिंता भूमाफियाओं को है। उनका कहना है कि पिछली सरकार ने मास्टर प्लान के नाम पर गलत फैसले किए, जिन्हें अब सुधारने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि सरकार की टीम इस पर काम कर रही है और जल्द ही समाधान सामने आएगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि विकास कार्यों को रोकने का आरोप राजनीति से प्रेरित है।
डोटासरा का तीखा जवाब और आरोप
दूसरी ओर PCC चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने सरकार पर पलटवार करते हुए कहा कि यदि मास्टर प्लान जनता के खिलाफ है तो इसे निरस्त क्यों नहीं किया जा रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले इसे रोककर फिर मंजूरी देने की प्रक्रिया में सरकार खुद उलझी रही। डोटासरा ने यह भी कहा कि भाजपा सरकार ने सीकर को नगर निगम बनाने जैसे वादों पर भी काम नहीं किया है और जनता से जुड़े मुद्दों को नजरअंदाज किया जा रहा है।
विकास योजनाओं और भविष्य की घोषणाएं
यूडीएच मंत्री ने यह भी कहा कि यूआईटी द्वारा नई आवासीय कॉलोनियों को जल्द धरातल पर लाया जाएगा। नगर परिषद में खाली जमीन का उपयोग भी आवासीय योजनाओं के लिए किया जाएगा। सफाई कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया को अक्टूबर में दोबारा शुरू करने की बात भी कही गई है। दूसरी ओर विपक्ष का कहना है कि जब तक मास्टर प्लान पर स्पष्ट नीति नहीं बनती, तब तक शहरी विकास अधूरा रहेगा।