एसडीएम थप्पड़ कांड: गिरफ्तारी वारंट के बाद नरेश मीणा की संपत्ति का रिकॉर्ड तलब, कानूनी कार्रवाई तेज
टोंक जिले के चर्चित एसडीएम थप्पड़ कांड में निर्दलीय प्रत्याशी रहे नरेश मीणा की कानूनी मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। विशेष अदालत से गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद अब पुलिस ने उनकी चल-अचल संपत्ति का रिकॉर्ड मांगा है। यह रिकॉर्ड न्यायालय में प्रस्तुत किया जाएगा। इस बीच मामले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं, जबकि आगे की कार्रवाई न्यायालय की प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी।
कोर्ट के निर्देश के बाद संपत्ति का रिकॉर्ड मांगा गया
नगरफोर्ट थाना पुलिस ने ग्राम पंचायत नयागांव उर्फ नानवता के सरपंच (प्रशासक) को पत्र भेजकर नरेश मीणा की चल-अचल संपत्तियों का विवरण उपलब्ध कराने को कहा है। पुलिस के अनुसार यह रिकॉर्ड एससी-एसटी मामलों की विशेष अदालत, टोंक में प्रस्तुत किया जाना है। न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में यह प्रक्रिया शुरू की गई है। पुलिस की ओर से रिकॉर्ड एकत्र कर आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए अदालत में पेश किया जाएगा।
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10 दिन पहले जारी हुआ था गिरफ्तारी वारंट
इस मामले में विशेष अदालत ने 13 जुलाई को नरेश मीणा की जमानत निरस्त करते हुए उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। पुलिस का कहना है कि जमानत की कुछ शर्तों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए विशेष लोक अभियोजक के माध्यम से अदालत में आवेदन प्रस्तुत किया गया था। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने जमानत निरस्त कर गिरफ्तारी वारंट जारी करने के आदेश दिए। मामले में आगे की कार्रवाई न्यायालय के निर्देशों के अनुसार जारी है।
सहयोगियों ने सरकार पर लगाए राजनीतिक आरोप
नरेश मीणा के सहयोगी राकेश बैंसला ने इस कार्रवाई को राजनीतिक बताया है। उनका आरोप है कि सरकार पंचायत चुनाव से पहले नरेश मीणा की बढ़ती लोकप्रियता से चिंतित है और इसी कारण उनके खिलाफ लगातार कानूनी कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि संपत्ति का रिकॉर्ड मांगे जाने और जमानत निरस्त होने की कार्रवाई को वे राजनीतिक दृष्टि से देख रहे हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वे न्यायपालिका के आदेशों का सम्मान करते हैं और अदालत से न्याय मिलने की उम्मीद रखते हैं। ये आरोप संबंधित पक्ष की ओर से लगाए गए हैं।
क्या है पूरा एसडीएम थप्पड़ कांड?
यह मामला 13 नवंबर 2024 को देवली-उनियारा विधानसभा उपचुनाव के दौरान सामने आया था। आरोप है कि मतदान के दिन समरावता गांव में नरेश मीणा ने तत्कालीन उपखंड अधिकारी (एसडीएम) अमित चौधरी के साथ मारपीट की। घटना के बाद क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी और हिंसा, पथराव तथा आगजनी की घटनाएं भी हुईं। अगले दिन पुलिस ने नरेश मीणा को गिरफ्तार कर लिया था। इस प्रकरण में कई लोगों के खिलाफ भी विभिन्न धाराओं में मामले दर्ज किए गए थे। बाद में उन्हें हाईकोर्ट से सशर्त जमानत मिली थी।
आगे न्यायालय की प्रक्रिया पर टिकी निगाहें
पुलिस अब न्यायालय के निर्देशानुसार नरेश मीणा की संपत्ति संबंधी विवरण जुटाने की प्रक्रिया में है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है और आगे की कार्रवाई अदालत के आदेशों तथा पुलिस जांच के आधार पर तय होगी। फिलहाल इस मामले में सभी की निगाहें आगामी न्यायिक कार्यवाही और पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।