NEET विवाद की गूंज विदेशों तक, पांच देशों में छात्रों के समर्थन में प्रदर्शन का दावा
भारत में NEET परीक्षा और छात्र आंदोलन को लेकर जारी विवाद की गूंज अब विदेशों तक पहुंचने का दावा किया जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ब्रिटेन, कनाडा, जर्मनी, आयरलैंड और नीदरलैंड में भारतीय मूल के लोगों और छात्र संगठनों ने प्रदर्शन आयोजित कर भारत में चल रहे छात्र आंदोलन के प्रति एकजुटता जताई। इन प्रदर्शनों में शिक्षा व्यवस्था, छात्रों के अधिकारों और विभिन्न राजनीतिक मांगों को लेकर भी आवाज उठाई गई। इन आयोजनों के सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
पांच देशों में प्रदर्शन होने का दावा
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ब्रिटेन, आयरलैंड, कनाडा, जर्मनी और नीदरलैंड में विभिन्न स्थानों पर भारतीय समुदाय और छात्र समूहों ने प्रदर्शन किए। लंदन में भारतीय उच्चायोग के बाहर सबसे बड़ा प्रदर्शन होने का दावा किया गया है। इसके अलावा एडिनबर्ग, ग्लासगो और मैनचेस्टर में भी लोगों के एकत्र होने की बात कही गई है। वहीं, हेग, बर्लिन, डबलिन और वैंकूवर में भी विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जाने की जानकारी सामने आई है। इन आयोजनों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित भारतीय मिशनों की ओर से नहीं की गई है।
आयोजकों ने क्या कहा?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, छात्र संगठन स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) से जुड़े प्रतिनिधियों का कहना है कि विदेशों में रहने वाले कई भारतीय छात्र और पेशेवर भारत में चल रहे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। उनका दावा है कि प्रदर्शनों का उद्देश्य छात्रों के साथ एकजुटता जताना और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर ध्यान आकर्षित करना था। आयोजकों के अनुसार, कई शहरों में अपेक्षा से अधिक लोग प्रदर्शन में शामिल हुए। यह जानकारी आयोजकों के दावों पर आधारित है।
प्रदर्शनों में उठीं कई मांगें
रिपोर्ट्स के अनुसार, इन प्रदर्शनों में शामिल कुछ लोगों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। वहीं कुछ स्थानों पर अन्य राजनीतिक मांगें और नारे भी लगाए जाने का दावा किया गया। आयोजकों का कहना है कि प्रदर्शन केवल परीक्षा प्रणाली तक सीमित नहीं रहे, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों और छात्रों से जुड़े व्यापक मुद्दों को भी उठाया गया। ये सभी मांगें प्रदर्शनकारियों की ओर से व्यक्त किए गए विचार हैं और इन्हें आधिकारिक सरकारी रुख नहीं माना जाना चाहिए।
सोशल मीडिया के जरिए हुआ आयोजन
प्रदर्शन के आयोजकों का कहना है कि विदेशों में रहने वाले भारतीय मूल के कई लोग सोशल मीडिया के माध्यम से भारत में चल रहे छात्र आंदोलन से जुड़े रहे। उनके अनुसार, विभिन्न शहरों में लोगों को सोशल मीडिया और ऑनलाइन नेटवर्क के जरिए एकजुट किया गया। आयोजकों ने दावा किया कि प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्र शामिल हुए, जबकि अन्य प्रतिभागी विभिन्न पेशों से जुड़े भारतीय मूल के लोग थे। हालांकि, प्रतिभागियों की संख्या और आयोजन के दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना आंदोलन
भारत में परीक्षा प्रणाली और छात्र आंदोलन को लेकर जारी बहस अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बनती दिखाई दे रही है। हालांकि, विदेशों में हुए प्रदर्शनों को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं और इनकी आधिकारिक पुष्टि सीमित है। दूसरी ओर, भारत में सरकार का कहना है कि परीक्षा प्रणाली में सुधार और अनियमितताओं पर कार्रवाई के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं, जबकि आंदोलनकारी अपनी मांगों पर कायम हैं। ऐसे में यह मुद्दा देश के साथ-साथ विदेशों में भी ध्यान आकर्षित कर रहा है।