SBI vs BOB FD: सीनियर सिटीजन का पैसा कब होगा डबल? जानिए पूरा हिसाब
रिटायरमेंट के बाद अधिकतर लोग ऐसे निवेश विकल्प की तलाश करते हैं, जहां पूंजी सुरक्षित रहे और निश्चित रिटर्न मिलता रहे। फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) इसी वजह से वरिष्ठ नागरिकों के बीच सबसे लोकप्रिय निवेश विकल्पों में शामिल है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) और बैंक ऑफ बड़ौदा (BOB) वर्तमान में सीनियर सिटीजन को आकर्षक ब्याज दरें दे रहे हैं। लंबी अवधि की FD में निवेश करने पर लगभग 10 वर्षों में निवेश की गई राशि दोगुनी होने के करीब पहुंच सकती है
बैंक ऑफ बड़ौदा में कितना मिल रहा है ब्याज?
बैंक ऑफ बड़ौदा सीनियर सिटीजन को अलग-अलग अवधि की FD पर अतिरिक्त ब्याज का लाभ दे रहा है। एक वर्ष की FD पर 6.75 प्रतिशत ब्याज उपलब्ध है, जबकि तीन वर्ष और पांच वर्ष की अवधि पर भी आकर्षक दरें दी जा रही हैं। वहीं, पांच वर्ष से लेकर 10 वर्ष तक की लंबी अवधि वाली FD पर बैंक 7 प्रतिशत सालाना ब्याज की पेशकश कर रहा है। लंबे समय तक निवेश बनाए रखने वाले वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह एक स्थिर आय का विकल्प माना जा रहा है।
SBI की FD में मिल रहा है थोड़ा ज्यादा रिटर्न
देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक SBI ने भी वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष ब्याज दरें तय की हैं। एक वर्ष की FD पर 6.75 प्रतिशत और तीन वर्ष की जमा पर 6.80 प्रतिशत ब्याज दिया जा रहा है। वहीं, पांच और 10 वर्ष की FD पर बैंक 7.05 प्रतिशत की दर से रिटर्न दे रहा है। ब्याज दर में मामूली अंतर होने के बावजूद लंबी अवधि में इसका असर कुल रिटर्न पर दिखाई देता है।
5 लाख रुपये पर कितना मिलेगा रिटर्न?
यदि कोई वरिष्ठ नागरिक बैंक ऑफ बड़ौदा में 5 लाख रुपये की FD 10 वर्षों के लिए कराता है, तो 7 प्रतिशत की ब्याज दर के आधार पर मैच्योरिटी राशि लगभग 10 लाख रुपये के करीब पहुंच सकती है। दूसरी ओर, SBI में समान अवधि और 7.05 प्रतिशत की दर पर निवेश करने पर मैच्योरिटी राशि इससे थोड़ी अधिक हो सकती है। इस तरह दोनों बैंकों में लंबी अवधि का निवेश पूंजी को लगभग दोगुना करने की क्षमता रखता है।
रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए क्यों है FD बेहतर विकल्प?
विशेषज्ञों के अनुसार, जिन निवेशकों की प्राथमिकता पूंजी की सुरक्षा और नियमित आय है, उनके लिए FD एक भरोसेमंद विकल्प साबित हो सकती है। वरिष्ठ नागरिकों को मिलने वाली अतिरिक्त ब्याज दरें इसे और आकर्षक बनाती हैं। हालांकि निवेश करने से पहले मौजूदा ब्याज दरों, टैक्स नियमों और अपनी वित्तीय जरूरतों का मूल्यांकन करना जरूरी है, ताकि सही अवधि और सही बैंक का चयन किया जा सके।