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Chickenpox Virus: ठीक होने के बाद भी शरीर में छिपा रह सकता है वायरस, बाद में बन सकता है Shingles की वजह

अधिकांश लोग चिकनपॉक्स को बचपन में होने वाली एक सामान्य बीमारी मानते हैं, जो कुछ दिनों में ठीक हो जाती है। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इस बीमारी का कारण बनने वाला वायरस शरीर से पूरी तरह खत्म नहीं होता। अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसी CDC, ब्रिटेन की NHS और Mayo Clinic के मुताबिक, यही वायरस वर्षों तक निष्क्रिय अवस्था में शरीर में मौजूद रह सकता है और बाद में दोबारा सक्रिय होकर Shingles यानी दाद जैसी दर्दनाक समस्या पैदा कर सकता है।

चिकनपॉक्स के लिए जिम्मेदार है Varicella-Zoster Virus

चिकनपॉक्स Varicella-Zoster Virus (VZV) के कारण होने वाला एक संक्रामक संक्रमण है। यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के संपर्क, खांसी या छींक के जरिए फैल सकता है। संक्रमण के बाद शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली वायरस को नियंत्रित कर लेती है और बीमारी के लक्षण खत्म हो जाते हैं। हालांकि, वायरस पूरी तरह नष्ट नहीं होता और शरीर के भीतर ही निष्क्रिय अवस्था में बना रहता है।

नसों में छिपा रह सकता है वायरस

स्वास्थ्य संस्थानों के अनुसार, चिकनपॉक्स से ठीक होने के बाद Varicella-Zoster Virus शरीर की नसों की कोशिकाओं में छिपा रहता है। इस स्थिति को मेडिकल भाषा में “डॉर्मेंट” अवस्था कहा जाता है। कई लोगों में यह वायरस जीवनभर निष्क्रिय बना रह सकता है, लेकिन कुछ परिस्थितियों में यह फिर से सक्रिय हो सकता है और नई समस्या पैदा कर सकता है।

किन परिस्थितियों में दोबारा सक्रिय हो सकता है वायरस?

बढ़ती उम्र, कमजोर इम्यून सिस्टम, लंबे समय तक तनाव, गंभीर बीमारियां या कुछ विशेष दवाएं शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में निष्क्रिय पड़ा वायरस दोबारा सक्रिय हो सकता है। जब यह वायरस दोबारा सामने आता है तो यह चिकनपॉक्स नहीं बल्कि Shingles या दाद के रूप में दिखाई देता है, जिसमें त्वचा पर दर्दनाक फफोले और नसों में तेज दर्द महसूस हो सकता है।

क्या है Shingles और किन लोगों में ज्यादा होता है खतरा?

Shingles एक ऐसी स्थिति है, जिसमें शरीर के किसी एक हिस्से में फफोले जैसे दाने निकलते हैं और उनके साथ जलन तथा तेज दर्द महसूस होता है। कई मामलों में दाने ठीक होने के बाद भी नसों का दर्द लंबे समय तक बना रह सकता है, जिसे Postherpetic Neuralgia कहा जाता है। 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों, कमजोर इम्यूनिटी वाले मरीजों, कैंसर से जूझ रहे लोगों, अंग प्रत्यारोपण करा चुके मरीजों और लंबे समय तक स्टेरॉयड लेने वालों में इसका खतरा अधिक माना जाता है।

क्या Shingles से बचाव संभव है?

विशेषज्ञों के अनुसार, Shingles से बचाव के लिए वैक्सीन उपलब्ध है। खासतौर पर 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को डॉक्टर की सलाह पर Shingles वैक्सीन लगवाने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, नियमित व्यायाम और तनाव को नियंत्रित रखना भी इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाए रखने में मदद कर सकता है।

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