Rajasthan Politics: संयम लोढ़ा को टारगेट करने की साजिश का खुलासा, लॉरेंस गैंग के शूटर गिरफ्तार
राजस्थान के पूर्व विधायक संयम लोढ़ा को कथित तौर पर निशाना बनाने की साजिश का पुलिस ने खुलासा किया है। एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF) और जोधपुर पुलिस की कार्रवाई में लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े बताए जा रहे शूटर गिरफ्तार किए गए हैं। जांच के अनुसार, गैंग से जुड़े आर्जू बिश्नोई और उसके सहयोगी सुमित सन्नी पर साजिश रचने का आरोप है। पुलिस के मुताबिक शूटर सिरोही पहुंचे थे और लोढ़ा के फार्म हाउस की रेकी की थी। उनके पास से विदेशी हथियार और 36 कारतूस बरामद किए गए हैं।
विदेश से ऑपरेट हो रही साजिश का आरोप
पुलिस जांच में सामने आया है कि पूर्व विधायक संयम लोढ़ा को निशाना बनाने की कथित योजना लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े लोगों ने बनाई थी। रिपोर्टों के अनुसार आर्जू बिश्नोई और उसके सहयोगी सुमित सन्नी का नाम साजिश से जोड़ा गया है।जांच एजेंसियों का कहना है कि नेटवर्क को विदेश से संचालित किए जाने के संकेत मिले हैं। हालांकि, साजिश के पीछे अंतिम मकसद और सभी आरोपियों की भूमिका की जांच अभी जारी है।
सिरोही पहुंचकर फार्म हाउस की रेकी
पुलिस के अनुसार, गैंग से जुड़े शूटर सिरोही पहुंचे थे। उन्होंने संयम लोढ़ा के फार्म हाउस और आसपास के इलाके की रेकी की।जांच में यह भी सामने आया है कि संदिग्ध शूटरों ने सिरोही में मोटरसाइकिल खरीदी और पेट्रोल पंप पर जाते हुए सीसीटीवी फुटेज में दिखाई दिए। पुलिस अब बाइक खरीद के दस्तावेजों और सीसीटीवी फुटेज के जरिए नेटवर्क की दूसरी कड़ियों की पहचान कर रही है।
विदेशी हथियार और 36 कारतूस बरामद
AGTF की कार्रवाई के दौरान आरोपियों के पास से विदेशी पिस्टल और बड़ी संख्या में कारतूस बरामद किए गए हैं।रिपोर्टों के मुताबिक, बरामद हथियारों में विदेशी पिस्टल शामिल हैं और कुल 36 कारतूस बरामद किए गए। हथियारों की बरामदगी ने जांच को और गंभीर बना दिया है। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि हथियार कहां से आए और इन्हें किस उद्देश्य से इस्तेमाल किया जाना था।
रेकी के लिए बाइक खरीदने का भी खुलासा
जांच में सामने आया है कि संदिग्ध शूटरों ने सिरोही में एक नई मोटरसाइकिल खरीदी थी। बाइक खरीदते और पेट्रोल पंप पर ईंधन भरवाते हुए उनके सीसीटीवी फुटेज सामने आए हैं।जांच एजेंसियां शोरूम से मिले दस्तावेजों और फुटेज के आधार पर यह पता लगाने में जुटी हैं कि शूटर किन लोगों के संपर्क में थे और रेकी के दौरान स्थानीय स्तर पर किसने उनकी मदद की।
वारदात से पहले ही पुलिस को मिला इनपुट
पुलिस और AGTF की सतर्कता के कारण कथित साजिश को वारदात से पहले ही रोक दिया गया। रिपोर्टों के अनुसार शूटरों ने कई दिनों तक इलाके में रहकर संभावित वारदात की तैयारी की थी।समय रहते कार्रवाई होने के कारण कथित योजना को अंजाम नहीं दिया जा सका। इसके बाद पुलिस ने गिरफ्तारियों और बरामद हथियारों के आधार पर नेटवर्क की आगे की जांच शुरू की।
मोबाइल में मिली लोढ़ा की तस्वीर की भी जांच
जांच से जुड़े एक महत्वपूर्ण पहलू के तौर पर गिरफ्तार शूटरों के मोबाइल फोन में संयम लोढ़ा की तस्वीर मिलने की बात भी सामने आई है।पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि तस्वीर किस उद्देश्य से रखी गई थी और रेकी में स्थानीय स्तर पर किसने मदद की। इन डिजिटल साक्ष्यों को अन्य जांच सामग्री के साथ जोड़ा जा रहा है।
साजिश के पीछे मकसद क्या था?
फिलहाल पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल कथित साजिश के पीछे का मकसद है। उपलब्ध रिपोर्टों में रंगदारी, राजनीतिक रंजिश या अन्य कारणों की संभावनाओं की जांच किए जाने की बात सामने आई है।हालांकि, पुलिस की ओर से अभी किसी एक वजह को अंतिम कारण के तौर पर स्थापित नहीं किया गया है। जांच आगे बढ़ने के बाद ही साजिश के उद्देश्य की तस्वीर साफ होगी।
संयम लोढ़ा की सुरक्षा बढ़ाई गई
कथित हत्या की साजिश का खुलासा होने के बाद संयम लोढ़ा की सुरक्षा को लेकर भी पुलिस-प्रशासन सतर्क हुआ है। हालांकि सिरोही पुलिस अधीक्षक ने सुरक्षा व्यवस्था को रूटीन सुरक्षा व्यवस्था बताया है।राजस्थान कांग्रेस के नेताओं ने भी मामले को गंभीर बताते हुए साजिश में शामिल सभी लोगों की पहचान और कार्रवाई की मांग की है।
जांच में सामने आ सकती हैं और कड़ियां
AGTF और पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर नेटवर्क की बाकी कड़ियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि शूटरों को किसने भेजा, स्थानीय स्तर पर किसने मदद की, हथियार कहां से आए और कथित साजिश का अंतिम निर्देश किस स्तर से मिला था। आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां या खुलासे हो सकते हैं।
संयम लोढ़ा कौन हैं?
संयम लोढ़ा सिरोही से पूर्व विधायक रहे हैं। 2018 में उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव जीतकर विधानसभा में प्रवेश किया था और बाद में तत्कालीन कांग्रेस सरकार को समर्थन दिया था। 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा।हाल के समय में वे राजस्थान के निकाय और पंचायती राज चुनावों को लेकर अपनी कानूनी गतिविधियों के कारण भी चर्चा में रहे हैं।