Ajmer Cyber Crime: कम्बोडिया-मलेशिया तक जुड़े साइबर ठगों के तार, 1100 पेज की चार्जशीट में बड़े खुलासे
अजमेर में देशभर के लोगों से साइबर ठगी करने वाले गिरोह के विदेशी कनेक्शन का खुलासा हुआ है। रामगंज थाना पुलिस की 1100 पेज की चार्जशीट में कम्बोडिया और मलेशिया में बैठे कथित आकाओं से नेटवर्क के संपर्क की जानकारी सामने आई है। पुलिस के अनुसार गिरोह डिजिटल अरेस्ट और साइबर फ्रॉड के जरिए रकम जुटाता था। इसके बाद पैसा अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाता था। फिर यूएसडीटी के जरिए रकम विदेश भेजने का नेटवर्क चल रहा था। मामले में सात आरोपी गिरफ्तार हैं, जबकि लोकेश भाटी और महावीर जाट उर्फ माही फरार बताए जा रहे हैं।
सात आरोपी गिरफ्तार, दो अब भी फरार
रामगंज थाना पुलिस ने साइबर ठगी के मामले में सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें लोहाखान निवासी सबरे आलम, प्रवीन भाटी, ध्रुव सुकरिया, सुनील कुमार, प्रिंस यादव, किशनगढ़ निवासी मनीष और फॉयसागर रोड निवासी राजेंद्र शामिल हैं।पुलिस ने सभी सात आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया है। इनके खिलाफ कोर्ट में 1100 पेज की चार्जशीट पेश की गई है।वहीं अलवरगेट क्षेत्र के गुर्जर धरती निवासी लोकेश भाटी और नागौर के निम्बोला वास निवासी महावीर जाट उर्फ माही अभी फरार हैं। दोनों के संबंध में अनुसंधान लंबित रखा गया है।
सबरे आलम के पीछे लोकेश और महावीर का नाम
पुलिस जांच के अनुसार सबरे आलम कथित तौर पर लोकेश भाटी और महावीर जाट उर्फ माही के लिए काम करता था।पुलिस का आरोप है कि दोनों साइबर फ्रॉड, डिजिटल अरेस्ट और विड्रॉल चार्ज जैसे तरीकों से लोगों को ठगी का शिकार बनाते थे।ठगी की रकम पहले अलग-अलग बैंक खातों में पहुंचाई जाती थी। इसके बाद यूएसडीटी के जरिए रकम विदेश भेजने की व्यवस्था की जाती थी।
कम्बोडिया में ट्रेनिंग लेने का भी दावा
पुलिस की प्रारंभिक जांच में सबरे आलम के कम्बोडिया जाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस के अनुसार उसने विदेश में साइबर ठगी से जुड़ी ट्रेनिंग भी ली थी।जांच एजेंसियों को आशंका है कि विदेशी नेटवर्क से संपर्क के जरिए साइबर ठगी के तरीकों और रकम को विदेश भेजने की व्यवस्था तैयार की गई।अब लोकेश भाटी और महावीर जाट की गिरफ्तारी के बाद इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और विदेश में बैठे कथित आकाओं की जानकारी सामने आने की उम्मीद है।
सात खातों से 3.60 करोड़ से ज्यादा का लेनदेन
पुलिस के अनुसार गिरोह ने महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और तेलंगाना से जुड़े सात बैंक खातों में 3 करोड़ 60 लाख 25 हजार रुपए की साइबर ठगी की रकम ट्रांसफर की।जांच में बैंक खातों के ट्रांजेक्शन और निकासी से जुड़े दस्तावेजों को साक्ष्य के रूप में शामिल किया गया है।पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच में ही करोड़ों रुपए के लेनदेन का पता चला। इससे नेटवर्क के बड़े स्तर पर सक्रिय होने की जानकारी सामने आई।
देश के अलग-अलग राज्यों के लोगों से ठगी
पुलिस जांच में कई राज्यों के पीड़ितों से जुड़ी रकम इन खातों में पहुंचने की जानकारी सामने आई है।महाराष्ट्र के चंद्रकांत से 1 करोड़ 30 लाख रुपए, मनोज फेने से 40 लाख रुपए और पुणे की श्रेया जादव से 2.50 लाख रुपए की रकम ट्रांजेक्शन से जुड़ी मिली।पुणे की दिपाली के 2.70 लाख, हैदराबाद की श्रीदेवी के 1 लाख और उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद निवासी नरेंद्र कुमार के 1 करोड़ 37 लाख रुपए भी जांच में सामने आए।गाजियाबाद की श्वेता से जुड़े 47 लाख रुपए के लेनदेन की भी पुलिस ने जांच की है।
डिजिटल अरेस्ट से लेकर USDT तक नेटवर्क
पुलिस के अनुसार गिरोह साइबर फ्रॉड के अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल करता था। इनमें डिजिटल अरेस्ट और विड्रॉल चार्ज जैसे हथकंडे शामिल बताए गए हैं।ठगी के बाद रकम को कई बैंक खातों में घुमाया जाता था। इसके बाद डॉलर से जुड़ी क्रिप्टोकरेंसी USDT के जरिए रकम विदेश भेजने का आरोप है।USDT एक डॉलर से जुड़ा क्रिप्टो टोकन है। इसका इस्तेमाल डिजिटल परिसंपत्ति के रूप में लेनदेन और सीमापार ट्रांसफर में किया जा सकता है।
रेलवे अस्पताल के पास पकड़े गए थे सात युवक
मामले की शुरुआत 28 जुलाई की रात हुई कार्रवाई से हुई। रामगंज थाना पुलिस ने ब्यावर रोड रेलवे अस्पताल के पास संदिग्ध परिस्थितियों में खड़े सात युवकों को पकड़ा था।पूछताछ के दौरान पुलिस को उनके जवाब संतोषजनक नहीं लगे। इसके बाद उन्हें थाने ले जाकर विस्तृत पूछताछ की गई।पुलिस के अनुसार पूछताछ में आरोपियों ने साइबर ठगी के लिए बैंक खाते और मोबाइल सिम उपलब्ध कराने की जानकारी दी।
ATM कार्ड, चेकबुक और सिम कार्ड बरामद
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से बड़ी संख्या में एटीएम कार्ड, चेकबुक और मोबाइल सिम कार्ड बरामद किए।इसके बाद बैंक खातों की जांच की गई। पुलिस को खातों में बड़ी रकम के ट्रांजेक्शन और निकासी की जानकारी मिली।इसी आधार पर पुलिस ने बैंकिंग रिकॉर्ड, मोबाइल डेटा और अन्य तकनीकी साक्ष्यों को जांच में शामिल किया।
विदेश तक फैले नेटवर्क की जांच जारी
पुलिस की जांच अब सिर्फ अजमेर के स्थानीय नेटवर्क तक सीमित नहीं है। चार्जशीट में सामने आए विदेशी कनेक्शन के आधार पर नेटवर्क की आगे की कड़ियों की पड़ताल की जा रही है।फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद विदेश में बैठे कथित संचालकों, साइबर ठगी के प्रशिक्षण और रकम विदेश भेजने के तरीकों से जुड़े और तथ्य सामने आ सकते हैं।फिलहाल पुलिस का फोकस फरार आरोपियों की गिरफ्तारी और नेटवर्क की बाकी कड़ियों तक पहुंचने पर है।
‘शॉर्टकट’ से कमाई का लालच बना अपराध का रास्ता
अजमेर एसपी हर्षवर्धन अग्रवाला के अनुसार, शुरुआती जांच में सामने आया है कि कुछ युवा कम समय में पैसा कमाने के लालच में इस नेटवर्क से जुड़े।पुलिस के मुताबिक, गिरोह ने देशभर के लोगों को साइबर ठगी का शिकार बनाया और उनकी रकम को अलग-अलग माध्यमों से आगे पहुंचाया।पुलिस ने मामले में पर्याप्त साक्ष्य जुटाकर सात आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट पेश की है। अब फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद जांच को आगे बढ़ाया जाएगा।