Alwar: करणी माता मंदिर का रास्ता नवरात्र में खुलेगा या नहीं? बाघों की टेरेटरी बनी चुनौती
अलवर के प्रसिद्ध करणी माता मंदिर जाने वाले रास्ते को लेकर शारदीय नवरात्र से पहले संशय बना हुआ है। करीब डेढ़ साल से बंद इस मार्ग पर फिलहाल पीडब्ल्यूडी अस्थाई मरम्मत करा रहा है। स्थायी मरम्मत के लिए 4.80 करोड़ रुपए का टेंडर हो चुका है। हालांकि काम पूरा होने में समय लगेगा। इसके अलावा बंद मार्ग पर वन क्षेत्र में बाघों ने अपनी टेरेटरी बना ली है। ऐसे में सड़क की स्थिति के साथ वन्यजीव सुरक्षा भी महत्वपूर्ण होगी। प्रशासन अगले महीने होने वाली बैठक में रास्ता खोलने पर फैसला करेगा।
डेढ़ साल से बंद है करणी माता मंदिर का रास्ता
करणी माता मंदिर जाने वाला मार्ग पिछले करीब डेढ़ साल से बंद है। जून 2025 में बारिश के दौरान सड़क के करीब 20 मीटर हिस्से में कटाव हो गया था।इसके बाद पीडब्ल्यूडी ने लाखों रुपए खर्च कर सड़क की मरम्मत कराई थी। हालांकि कुछ समय बाद सड़क दोबारा धंस गई। इसके बाद मार्ग को फिर से बंद करना पड़ा।
नवरात्र में पहले भी खोला गया था रास्ता
मार्ग लंबे समय से बंद होने के बावजूद चैत्र और शारदीय नवरात्र के दौरान श्रद्धालुओं के आवागमन के लिए इसे खोला गया था।अब शारदीय नवरात्र नजदीक आने के साथ एक बार फिर रास्ता खोलने की मांग और चर्चा शुरू हो गई है। करणी माता मंदिर अलवर के साथ आसपास के कई जिलों के श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है।नवरात्र के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में रास्ता बंद रहने से श्रद्धालुओं और स्थानीय प्रशासन के सामने परेशानी बढ़ सकती है।
अगले महीने होगी प्रशासनिक बैठक
रास्ता नवरात्र के दौरान श्रद्धालुओं के लिए खोला जाएगा या नहीं, इसका फैसला अगले महीने होने वाली प्रशासनिक बैठक में लिया जाएगा।नवरात्र मेले की तैयारियों को लेकर प्रस्तावित बैठक में सड़क की स्थिति, सुरक्षा और श्रद्धालुओं की आवाजाही पर चर्चा होगी। इसी बैठक के बाद मार्ग को लेकर अंतिम निर्णय होने की संभावना है।
पैदल मार्ग खोलने पर भी हो सकता है फैसला
प्रशासन के सामने एक विकल्प पैदल श्रद्धालुओं के लिए मार्ग खोलने का भी है। हालांकि इसका निर्णय सड़क की मौजूदा स्थिति और वन क्षेत्र की परिस्थितियों को देखते हुए किया जाएगा।यदि वाहनों के लिए रास्ता सुरक्षित नहीं माना जाता है तो पैदल आवागमन की व्यवस्था पर विचार किया जा सकता है। अंतिम फैसला संबंधित विभागों की रिपोर्ट के आधार पर होगा।
बंद रास्ते पर बाघों ने बनाई टेरेटरी
लंबे समय से मार्ग बंद रहने का असर वन क्षेत्र पर भी पड़ा है। इस दौरान कई बाघों ने इस इलाके में अपनी टेरेटरी बना ली है।ऐसे में रास्ता खोलने से पहले वन्यजीवों की मौजूदगी को ध्यान में रखना जरूरी होगा। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के साथ बाघों और अन्य वन्यजीवों की सुरक्षा भी प्रशासन के लिए चुनौती होगी।इसी वजह से सड़क की मरम्मत के साथ वन विभाग की राय भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
स्थायी मरम्मत के लिए 4.80 करोड़ का टेंडर
पीडब्ल्यूडी की ओर से फिलहाल मार्ग की अस्थाई मरम्मत का काम कराया जा रहा है। वहीं स्थायी रूप से सड़क को दुरुस्त करने के लिए 4.80 करोड़ रुपए का टेंडर हो चुका है।स्थायी निर्माण में समय लगने की संभावना है। इसलिए नवरात्र से पहले सड़क की स्थिति और श्रद्धालुओं की आवाजाही को लेकर प्रशासन को अलग व्यवस्था पर विचार करना होगा।
पर्यटकों को लौटना पड़ रहा है निराश
मार्ग बंद होने का असर पर्यटन पर भी पड़ा है। पिछले डेढ़ साल से पर्यटकों और श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।यह क्षेत्र टाइगर सफारी और बाला किला जाने वाले पर्यटकों के लिए भी महत्वपूर्ण है। वन विभाग की ओर से प्रतापबंध से आगे मार्ग बंद किए जाने के कारण पर्यटकों की आवाजाही प्रभावित हुई है।
मंदिर अलवर के साथ आसपास के जिलों की आस्था का केंद्र
करणी माता मंदिर को अलवर के अलावा आसपास के कई जिलों के लोगों की आस्था से जुड़ा माना जाता है। नवरात्र के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।ऐसे में मार्ग खुलने की स्थिति में प्रशासन के सामने यातायात, पैदल यात्रियों, वन्यजीव और सुरक्षा व्यवस्था को एक साथ संभालने की चुनौती होगी।
PWD ने कहा- रास्ते को सही किया जा रहा है
पीडब्ल्यूडी की एक्सईएन अल्का व्यास के अनुसार, मार्ग को सही करने का काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नवरात्र में रास्ता खोलने को लेकर अगले महीने निर्णय लिया जाएगा।फिलहाल प्रशासनिक बैठक और संबंधित विभागों की रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि शारदीय नवरात्र में श्रद्धालुओं के लिए करणी माता मंदिर का रास्ता खुल पाएगा या नहीं।