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PoK में बढ़ते प्रदर्शनों के बीच पाकिस्तानी सेना पर आतंकी नेटवर्क के इस्तेमाल की आशंका

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच पाकिस्तानी सेना की रणनीति को लेकर गंभीर दावे सामने आए हैं। मीडिया रिपोर्टों और खुफिया सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि शांतिपूर्ण आंदोलन को कमजोर करने और उस पर सख्त कार्रवाई का आधार तैयार करने के लिए प्रतिबंधित आतंकी संगठनों से जुड़े तत्वों का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

खुफिया रिपोर्टों में सामने आए गंभीर दावे

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, भारतीय खुफिया एजेंसियों को ऐसी जानकारी मिली है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI कथित तौर पर PoK में चल रहे आंदोलन की दिशा बदलने की रणनीति पर काम कर रही है। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि आंदोलन के दौरान अशांति फैलाकर प्रदर्शन को बदनाम करने की कोशिश की जा सकती है। इन दावों की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।

शांतिपूर्ण रैलियों में घुसपैठ की आशंका

रिपोर्टों में कहा गया है कि कुछ प्रतिबंधित आतंकी संगठनों से जुड़े लोगों को प्रदर्शनकारियों के बीच शामिल कर हिंसक घटनाएं भड़काने की योजना बनाई जा सकती है। आशंका जताई गई है कि यदि ऐसा होता है तो उसके बाद सुरक्षा बलों को व्यापक कार्रवाई का आधार मिल सकता है। हालांकि इस संबंध में पाकिस्तान की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

आंदोलन को बदनाम करने की साजिश का दावा

सूत्रों के हवाले से प्रकाशित रिपोर्टों में कहा गया है कि यदि प्रदर्शन हिंसक रूप लेते हैं तो उन्हें सरकार विरोधी या आतंकवाद से जुड़ी गतिविधियों के रूप में पेश किया जा सकता है। इससे आंदोलन के खिलाफ कठोर कार्रवाई को उचित ठहराने की कोशिश की जा सकती है। इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकी है।

एक महीने से अधिक समय से जारी हैं प्रदर्शन

जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी के नेतृत्व में PoK में पिछले एक महीने से अधिक समय से प्रदर्शन जारी हैं। प्रदर्शनकारी स्थानीय मुद्दों, प्रशासनिक नीतियों और नागरिक अधिकारों को लेकर अपनी मांगें उठा रहे हैं। कई स्थानों पर बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरकर विरोध दर्ज करा चुके हैं, जिससे क्षेत्र की राजनीतिक स्थिति पर लगातार नजर बनी हुई है।

स्थिति पर बनी हुई है नजर

PoK में जारी घटनाक्रम पर क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजर रखी जा रही है। फिलहाल सामने आए दावे मीडिया रिपोर्टों और खुफिया सूत्रों पर आधारित हैं तथा इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। आने वाले दिनों में पाकिस्तान सरकार या संबंधित एजेंसियों की आधिकारिक प्रतिक्रिया के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।

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