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राम मंदिर ट्रस्ट बैठक से पहले चंपत राय के समर्थन में संतों की विशेष पूजा, प्रतिनिधित्व की भी उठी मांग

अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक से पहले धार्मिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। संत समाज ने विशेष वैदिक अनुष्ठान और हनुमान पूजा का आयोजन कर ट्रस्ट के सुचारु संचालन तथा चंपत राय को दोबारा महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने की कामना की। साथ ही रामानंदी वैष्णव परंपरा से जुड़े संतों को ट्रस्ट में पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने की मांग भी दोहराई गई।

ट्रस्ट बैठक से पहले हुआ विशेष वैदिक अनुष्ठान

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की प्रस्तावित बैठक से पहले अयोध्या में संत समाज ने धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किया। साकेत भवन में महंत सीताराम दास के नेतृत्व में वैदिक मंत्रोच्चार, हनुमान पूजा और विशेष प्रार्थना की गई। संतों ने भगवान राम और हनुमान से प्रार्थना की कि मंदिर की धार्मिक परंपराएं निरंतर सुचारु रूप से संचालित होती रहें और ट्रस्ट के निर्णय समाज एवं मंदिर की गरिमा के अनुरूप हों। इस अवसर पर कई संतों और वैदिक विद्वानों ने भी अनुष्ठान में भाग लिया।

चंपत राय के योगदान का किया उल्लेख

अनुष्ठान के दौरान संतों ने चंपत राय के लंबे सार्वजनिक और संगठनात्मक योगदान का उल्लेख किया। उनका कहना था कि राम मंदिर आंदोलन से लेकर मंदिर निर्माण और ट्रस्ट के विभिन्न कार्यों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। संतों ने विश्वास जताया कि उनके अनुभव और प्रशासनिक समझ का लाभ भविष्य में भी ट्रस्ट को मिलना चाहिए। हालांकि ट्रस्ट में नियुक्ति या जिम्मेदारी का अंतिम निर्णय संबंधित प्रक्रिया के तहत ही लिया जाएगा।

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रामानंदी वैष्णव संतों को प्रतिनिधित्व देने की मांग

संत समाज ने ट्रस्ट की भावी संरचना को लेकर भी अपनी राय रखी। उनका कहना है कि अयोध्या की धार्मिक परंपराओं से जुड़े रामानंदी वैष्णव संतों को ट्रस्ट में पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। संतों का तर्क है कि इससे मंदिर की पूजा-पद्धति, धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत का संचालन परंपरागत व्यवस्था के अनुरूप बनाए रखने में सहायता मिलेगी। उन्होंने इस मांग को लंबे समय से चली आ रही अपेक्षा बताया।

बैठक में निष्पक्ष निर्णय की प्रार्थना

महंत सीताराम दास ने कहा कि पूजा-अर्चना का उद्देश्य केवल किसी व्यक्ति विशेष का समर्थन करना नहीं, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि ट्रस्ट की बैठक में सभी सदस्य निष्पक्ष, शांत और सकारात्मक वातावरण में निर्णय लें। उन्होंने कहा कि मंदिर से जुड़े फैसले श्रद्धालुओं की आस्था और धार्मिक परंपराओं को ध्यान में रखकर लिए जाने चाहिए। संत समाज ने उम्मीद जताई कि बैठक में मंदिर के हित में संतुलित और सकारात्मक निर्णय होंगे।

बैठक के फैसलों पर रहेगी सभी की नजर

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक को संगठनात्मक और प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैठक में विभिन्न विषयों पर चर्चा होने की संभावना है। संत समाज ने कहा कि यदि उनकी अपेक्षाओं के अनुरूप निर्णय नहीं होते हैं, तो वे अपनी बात लोकतांत्रिक और संवैधानिक माध्यमों से संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाएंगे। फिलहाल अयोध्या में ट्रस्ट की बैठक और उससे जुड़े संभावित निर्णयों को लेकर धार्मिक और सामाजिक स्तर पर व्यापक चर्चा बनी हुई है।

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