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सरिस्का में दिखा दुर्लभ ‘गोल्डन सांभर’, पर्यटकों ने कैमरों में कैद किया अनोखा नजारा

अलवर के सरिस्का टाइगर रिजर्व में वन्यजीव प्रेमियों को एक बेहद दुर्लभ दृश्य देखने को मिला है। गंगोरीतोप क्षेत्र में पर्यटकों को सुनहरे रंग का एक अनोखा सांभर दिखाई दिया, जिसे ‘गोल्डन सांभर’ कहा जा रहा है। सामान्यतः गहरे भूरे रंग में नजर आने वाले सांभर के इस अलग रूप ने पर्यटकों और वन्यजीव विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। इसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं।

गंगोरीतोप क्षेत्र में दिखा दुर्लभ वन्यजीव

सरिस्का भ्रमण पर पहुंचे पर्यटकों ने जब जंगल के बीच सुनहरे रंग के सांभर को देखा तो सभी हैरान रह गए। वन्यजीवों के बीच यह दृश्य बेहद अलग और आकर्षक नजर आया। पर्यटकों ने तुरंत अपने कैमरों और मोबाइल फोन से इसकी तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्ड किए। कुछ ही समय में यह दृश्य सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे दुर्लभ जीवों का प्राकृतिक आवास में दिखाई देना सरिस्का की समृद्ध जैव विविधता को दर्शाता है।

सामान्य सांभर से बिल्कुल अलग है रंग

विशेषज्ञों के अनुसार सामान्य सांभर का रंग गहरा भूरा या स्लेटी होता है, जबकि इस सांभर का रंग सुनहरा दिखाई दे रहा है। यही वजह है कि इसे ‘गोल्डन सांभर’ कहा जा रहा है। वन्यजीव जानकारों का कहना है कि इस तरह के दुर्लभ रंग वाले जीव प्रकृति में बहुत कम देखने को मिलते हैं। ऐसे जीवों की मौजूदगी वन्यजीव अनुसंधान के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि यह आनुवंशिक विविधता के रोचक उदाहरण प्रस्तुत करते हैं।

आनुवंशिक बदलाव हो सकता है वजह

वन्यजीव विशेषज्ञों और स्थानीय गाइडों के अनुसार जीवों के रंग में इस प्रकार का बदलाव आनुवंशिक कारणों या रंगद्रव्य से जुड़े प्राकृतिक परिवर्तनों की वजह से हो सकता है। कुछ मामलों में त्वचा और बालों के रंग को प्रभावित करने वाले जीन अलग तरीके से कार्य करते हैं, जिसके कारण सामान्य रंग के बजाय असामान्य रंग दिखाई देता है। जंगलों में ऐसे जीवों का लंबे समय तक सुरक्षित रहना भी अपने आप में विशेष माना जाता है, क्योंकि उनका रंग उन्हें आसानी से अलग पहचान दिला देता है।

सरिस्का में पहले भी दिख चुके हैं दुर्लभ जीव

सरिस्का टाइगर रिजर्व में समय-समय पर दुर्लभ वन्यजीवों के दर्शन होते रहे हैं। हाल ही में यहां एक दुर्लभ सफेद मोर देखे जाने की खबर भी चर्चा में रही थी। अब गोल्डन सांभर के दिखाई देने से सरिस्का एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। वन्यजीव प्रेमियों का मानना है कि ऐसे दुर्लभ जीव सरिस्का की पहचान को और मजबूत करते हैं तथा प्रकृति संरक्षण के महत्व को भी रेखांकित करते हैं।

बाघ संरक्षण में भी बना मिसाल

सरिस्का टाइगर रिजर्व देश के सफल वन्यजीव संरक्षण मॉडलों में गिना जाता है। वर्ष 2005 में बाघों से खाली हो चुके इस अभयारण्य ने संरक्षण प्रयासों के बल पर नई पहचान बनाई। लगातार निगरानी, पुनर्वास कार्यक्रमों और बेहतर प्रबंधन के चलते यहां बाघों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्तमान में सरिस्का में बाघों की संख्या 50 से अधिक बताई जाती है। ऐसे में गोल्डन सांभर जैसे दुर्लभ वन्यजीव का दिखाई देना इस समृद्ध पारिस्थितिकी तंत्र की एक और बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

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