ज़ोजिला टनल में ऐतिहासिक ‘ब्रेकथ्रू’: लद्दाख को हर मौसम में जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की मौजूदगी में ज़ोजिला टनल प्रोजेक्ट ने एक ऐतिहासिक मुकाम हासिल किया। सुरंग की आखिरी चट्टान को तोड़ने की प्रतीकात्मक प्रक्रिया के साथ इस बहुप्रतीक्षित परियोजना ने ‘ब्रेकथ्रू’ हासिल किया, जो लद्दाख को पूरे साल देश से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
ब्रेकथ्रू के साथ सपने को मिला आकार
ज़ोजिला टनल में ‘ब्रेकथ्रू’ का मतलब है कि सुरंग के दोनों छोर अब आपस में जुड़ चुके हैं, जो किसी भी टनल परियोजना का सबसे अहम चरण होता है। इस मौके पर मौजूद केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इसे इंजीनियरिंग और प्रतिबद्धता की बड़ी सफलता बताया। यह सुरंग एशिया की सबसे लंबी दो-तरफा सड़क टनल मानी जा रही है, जो रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। लंबे समय से प्रतीक्षित यह परियोजना अब अपने अंतिम चरणों की ओर बढ़ रही है।
लद्दाख के लिए ‘ड्रीम प्रोजेक्ट’ साबित होगी टनल
लद्दाख के सांसद मोहम्मद हनीफा जान ने इस मौके को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि पिछले कई दशकों से क्षेत्र के लोग इस टनल का इंतजार कर रहे थे। उन्होंने प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और सड़क परिवहन मंत्री का आभार जताते हुए कहा कि इस परियोजना को वास्तविक गति वर्तमान सरकार के कार्यकाल में मिली। उनके अनुसार, यह सुरंग न केवल आवागमन को आसान बनाएगी, बल्कि क्षेत्र के विकास को भी नई दिशा देगी।
सामरिक और आर्थिक दृष्टि से गेमचेंजर
ज़ोजिला टनल का महत्व सिर्फ यातायात तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की सुरक्षा के लिहाज से भी बेहद अहम है। 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान इस क्षेत्र में हर मौसम में संपर्क की आवश्यकता को गहराई से महसूस किया गया था। इस टनल के बन जाने से सेना की आवाजाही सालभर सुगम हो सकेगी। साथ ही, पर्यटन, व्यापार और स्थानीय रोजगार के अवसरों में भी तेजी आने की उम्मीद है।
निर्माण कार्य 80% पूरा, शेष में लगेगा समय
प्रोजेक्ट से जुड़े अथॉरिटी इंजीनियर यूसुफ़ के अनुसार, ज़ोजिला टनल का करीब 80 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। हालांकि शेष 20 प्रतिशत कार्य को पूरा करने में अभी लगभग दो साल का समय लग सकता है। उन्होंने बताया कि यह ‘ब्रेकथ्रू’ तकनीकी रूप से एक बड़ी उपलब्धि है, लेकिन टनल को पूरी तरह आम लोगों के लिए खोलने में अभी लगभग ढाई साल लग सकते हैं।
आपात स्थिति में सीमित उपयोग संभव
इंजीनियर यूसुफ़ ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल टनल आम यातायात के लिए तैयार नहीं है। हालांकि, किसी आपात स्थिति, विशेषकर सैन्य जरूरतों के लिए, सीमित समय के लिए इसका उपयोग किया जा सकता है। उन्होंने भरोसा जताया कि आधुनिक तकनीक और मौजूदा सिस्टम के तहत परियोजना को सुरक्षित और समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा।