Rajasthan Urban Service Camp: छूट लेने आए लोगों को लाखों की पेनल्टी का झटका, शहरी सेवा शिविर पर उठे सवाल
राजस्थान में आमजन को राहत देने के लिए लगाए गए शहरी सेवा शिविर अब कुछ लंबित मामलों को लेकर सवालों के घेरे में हैं। शिविरों में विभिन्न शुल्क, ब्याज और पेनल्टी में छूट का प्रावधान किया गया था। साथ ही विभाग ने स्पष्ट किया था कि शिविर अवधि में प्राप्त लेकिन लंबित आवेदनों का निस्तारण संबंधित छूट और शिथिलताओं के साथ किया जाए। नगरीय विकास विभाग के 15 जुलाई के आदेश में भी लंबित ऑनलाइन आवेदन और प्रकरणों को शिविर अवधि की छूट लागू मानते हुए निस्तारित करने के निर्देश दिए गए थे।इसके बावजूद जयपुर, सवाईमाधोपुर और सीकर से ऐसे मामले सामने आने का दावा किया गया है, जहां आवेदकों को छूट के बजाय ब्याज और पेनल्टी जोड़कर डिमांड नोट जारी हुए। कुछ मामलों में राशि लाखों रुपए तक पहुंच गई। अब इन आवेदनों के निस्तारण और छूट के प्रावधान को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
शिविर में आवेदन, लेकिन बाद में बढ़ी रकम
राज्य सरकार ने शहरी सेवा शिविरों का आयोजन नागरिकों के लंबित मामलों के त्वरित निस्तारण के उद्देश्य से किया था। 2026 में ये शिविर 12 जून से 15 जुलाई तक आयोजित किए गए थे। बाद में फॉलोअप कैंप की व्यवस्था भी की गई।शिविरों में पट्टे, नामांतरण, लीज संबंधी मामलों और अन्य नागरिक सेवाओं से जुड़े प्रकरणों में राहत देने का प्रावधान था। ऐसे में समय पर आवेदन करने वाले लोगों को बाद में अतिरिक्त ब्याज और पेनल्टी के साथ डिमांड मिलने से विवाद की स्थिति बनी है।
जयपुर में 30 हजार की मूल राशि पर 1.09 लाख का डिमांड
जयपुर के गोपालपुरा बाईपास निवासी राजेन्द्र गुप्ता ने पट्टे के लिए निर्धारित अवधि में आवेदन किया था।उनके मामले में करीब 30 हजार रुपए की मूल राशि बताई गई, लेकिन डिमांड नोट में करीब 79 हजार रुपए ब्याज जोड़ दिया गया। इससे कुल मांग करीब 1.09 लाख रुपए हो गई।आवेदक ने इस पर आपत्ति जताते हुए संशोधित डिमांड नोट जारी करने की मांग की है। उनका कहना है कि आवेदन शिविर की निर्धारित अवधि में किया गया था, इसलिए उन्हें शिविर में घोषित राहत का लाभ मिलना चाहिए।
सवाईमाधोपुर में 1.14 लाख का डिमांड नोट
सवाईमाधोपुर की सूर्यनगर कॉलोनी निवासी सुमित श्रीमाली का मामला भी सामने आया है।उन्होंने पट्टे के लिए शहरी सेवा शिविर के दौरान आवेदन किया था। इसके बाद उन्हें करीब 1.14 लाख रुपए का डिमांड नोट जारी किया गया।आवेदक के अनुसार डिमांड में पेनल्टी, ब्याज और अन्य राशि शामिल की गई। आपत्ति जताने पर उन्हें कथित तौर पर यह बताया गया कि अब मामले में तत्काल बदलाव करना संभव नहीं है।
सीकर में 90ए आवेदन पर 1.19 लाख की मांग
सीकर नगर परिषद में 90ए यानी कृषि भूमि के गैर-कृषि उपयोग से जुड़ा एक मामला भी चर्चा में है।आवेदक के अनुसार शिविर के दौरान आवेदन किया गया था। लेकिन प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण प्रकरण लंबित रहा। बाद में जारी डिमांड में करीब 1 लाख 19 हजार रुपए जमा कराने को कहा गया।आवेदक का दावा है कि शिविर में आवेदन करते समय उसे छूट मिलने की जानकारी दी गई थी। अब अतिरिक्त राशि की मांग किए जाने पर उसने आपत्ति जताई है।
सरकारी आदेश में लंबित आवेदनों पर छूट का प्रावधान
नगरीय विकास विभाग के 15 जुलाई 2026 के आदेश में कहा गया था कि शहरी सेवा शिविर अवधि में प्राप्त ऑनलाइन आवेदन, प्रार्थना-पत्र और लंबित प्रकरणों का निस्तारण किया जाए। साथ ही शिविर अवधि में दी गई छूट और शिथिलताओं को लागू मानते हुए इनका निस्तारण निर्धारित समय में करने के निर्देश दिए गए थे।यही प्रावधान अब सामने आए मामलों में महत्वपूर्ण हो जाता है। यदि आवेदन निर्धारित अवधि में प्राप्त हुए थे, तो उनके निस्तारण में संबंधित छूट लागू हुई या नहीं, यह प्रशासनिक जांच का विषय बन सकता है।
सरकार ने शिविरों को बताया था राहत का माध्यम
शहरी सेवा शिविरों का उद्देश्य नागरिकों को अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर से राहत देना और लंबित प्रकरणों का समयबद्ध निस्तारण करना था। जुलाई 2026 में नगरीय विकास मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने भी शिविरों में प्रत्येक प्रकरण का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे।विभागीय स्तर पर यह भी बताया गया था कि शिविरों में प्राप्त आवेदनों की ऑनलाइन एंट्री और मॉनिटरिंग की जा रही है। इससे लंबित मामलों की निगरानी और जवाबदेही तय करने का उद्देश्य रखा गया था।
आवेदकों को दोबारा आवेदन की सलाह पर सवाल
आवेदकों का कहना है कि जब उन्होंने निर्धारित अवधि में आवेदन कर दिया था, तो बाद में उन्हें दोबारा किसी अभियान में आवेदन करने के लिए कहना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है।ऐसे मामलों में मुख्य सवाल यह है कि पुराने आवेदन की स्थिति क्या है। क्या संबंधित आवेदन पर शिविर की छूट लागू होगी या नए आवेदन के साथ प्रक्रिया फिर से शुरू होगी। प्रशासन को इस संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश देने होंगे।
मंत्री बोले- नियमों के अनुरूप नहीं हुआ तो समीक्षा करेंगे
नगरीय विकास मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा है कि शहरी सेवा शिविर जनहित को ध्यान में रखकर शुरू किए गए थे। यदि कहीं नियमों के अनुरूप काम नहीं हो रहा है या किसी तरह की परेशानी सामने आ रही है, तो उसकी समीक्षा की जाएगी।मंत्री ने जरूरत पड़ने पर इस संबंध में दोबारा स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की बात कही है।
अब डिमांड नोट और पुराने आवेदनों की समीक्षा की मांग
इन मामलों के सामने आने के बाद अब ऐसे सभी लंबित प्रकरणों की समीक्षा की मांग उठ सकती है, जिनमें शिविर अवधि में आवेदन किया गया था लेकिन उनका निस्तारण बाद में हुआ।खास तौर पर यह जांचना महत्वपूर्ण होगा कि डिमांड नोट जारी करते समय शिविर में घोषित छूट, ब्याज राहत और पेनल्टी में शिथिलता को लागू किया गया या नहीं।
शिविर की मंशा और जमीनी नतीजे के बीच सवाल
शहरी सेवा शिविरों की मूल भावना आमजन को राहत और सरल प्रशासन उपलब्ध कराने की थी। विभाग ने लंबित मामलों के समयबद्ध निस्तारण के लिए फॉलोअप व्यवस्था भी की थी।अब यदि समय पर आवेदन करने वाले लोगों को बाद में भारी ब्याज या पेनल्टी वाले डिमांड नोट मिलते हैं, तो इससे योजना के क्रियान्वयन पर सवाल उठना स्वाभाविक है। आने वाले समय में विभाग की समीक्षा और नए निर्देशों से इन मामलों की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।