‘इस्तीफा देने के बजाय लिया जाना चाहिए था’, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर बोले गहलोत, डोटासरा और जूली
NEET-UG परीक्षा विवाद को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद राजस्थान की राजनीति में भी तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। जयपुर में राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने केंद्र सरकार पर करारा हमला बोला। राज्य के वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं ने इसे देश के युवाओं, राहुल गांधी और सत्याग्रही छात्रों के संघर्ष की जीत बताया और कहा कि सरकार को इस्तीफे का इंतजार करने के बजाय मंत्री को बर्खास्त करना चाहिए था।
पूर्व सीएम अशोक गहलोत का हमला: ‘लोकतंत्र की जीत और तानाशाही की हार’
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह निर्णय राहुल गांधी और लाखों परीक्षार्थियों के सतत संघर्ष का परिणाम है। गहलोत ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार लगातार जवाबदेही से भाग रही थी और लंबे समय तक मंत्री का बचाव करती रही, लेकिन व्यापक जनाक्रोश के आगे प्रधानमंत्री को झुकना पड़ा। उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान छात्रों पर हुई बर्बरता और विरोध दबाने के प्रयासों के बावजूद युवाओं की आवाज बुलंद रही। यह ऐतिहासिक घटनाक्रम साबित करता है कि लोकतंत्र में तानाशाही रवैये के आगे जनता की मांग सर्वोपरि होती है।
गोविंद सिंह डोटासरा का बयान: ‘युवाओं ने तोड़ा अहंकार, शिक्षा व्यवस्था बदलने तक जारी रहेगा संघर्ष’
राजस्थान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि देश के युवाओं ने एकजुट होकर सरकार के अहंकार को तोड़ने का काम किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल एक मंत्री के पद छोड़ने से यह लड़ाई खत्म नहीं होती। डोटासरा ने राहुल गांधी के वक्तव्य का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी का असल लक्ष्य देश की समूची परीक्षा और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शी सुधार लाना है। जब तक हर मेधावी छात्र को न्याय नहीं मिल जाता और पेपर लीक जैसी कुप्रथा पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाती, तब तक यह राजनीतिक और सामाजिक संघर्ष जारी रहेगा।
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली का कड़ा रुख: ‘विदेशी फंडिंग का आरोप और सोनम वांगचुक का दमन निंदनीय’
जयपुर में प्रेस को संबोधित करते हुए नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा, “देर आए दुरुस्त आए, लेकिन इस्तीफा देने के बजाय मंत्री को तुरंत पद से बर्खास्त किया जाना चाहिए था।” उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने ‘छात्रों की गूंज’ अभियान के माध्यम से सबसे पहले इस मांग को मुखरता से उठाया था। इसके साथ ही जूली ने केंद्र सरकार द्वारा छात्र आंदोलन को दबाने के लिए ‘विदेशी फंडिंग’ के भ्रामक आरोप लगाने की कड़ी निंदा की। उन्होंने पर्यावरणविद सोनम वांगचुक के साथ हुए अलोकतांत्रिक व्यवहार का मुद्दा उठाते हुए मांग की कि सरकार युवाओं के प्रति अपने रुख पर स्थिति स्पष्ट करे।
राजस्थान के अभ्यर्थियों पर असर: जवाबदेही और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग
राजस्थान के लाखों परीक्षार्थी जो दिन-रात विभिन्न प्रतियोगी और प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी में जुटते हैं, उनके लिए यह मुद्दा सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। राज्य के कांग्रेसी नेताओं का कहना है कि केंद्र और राज्य स्तर पर परीक्षाओं की शुचिता बनाए रखना सरकार का नैतिक दायित्व है। जयपुर में उठे इस राजनीतिक घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि राजस्थान की राजनीति में भी NEET विवाद और छात्र हितों का मुद्दा आने वाले समय में एक प्रमुख राजनीतिक बहस का केंद्र बना रहेगा।