राजस्थान में पंचायत-निकाय चुनाव की हलचल तेज, भाजपा और कांग्रेस ने संगठन मजबूत करने पर बढ़ाया जोर
राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनावों की संभावित तैयारियों के बीच सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। हाईकोर्ट की हालिया टिप्पणियों के बाद भाजपा और कांग्रेस दोनों ने संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने की कवायद तेज कर दी है। जहां भाजपा बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय बनाने में जुटी है, वहीं कांग्रेस जिला कार्यकारिणियों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में तेजी ला रही है।
हाईकोर्ट की सख्ती के बाद बढ़ी राजनीतिक सक्रियता
राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनावों को लेकर राजनीतिक दलों की तैयारियां अब जमीन पर नजर आने लगी हैं। चुनाव कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा भले अभी नहीं हुई हो, लेकिन न्यायिक प्रक्रिया और प्रशासनिक गतिविधियों के बाद राजनीतिक दल संगठन को मजबूत करने में जुट गए हैं। दोनों प्रमुख दलों का मानना है कि स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों में मजबूत संगठन ही चुनावी सफलता की सबसे बड़ी कुंजी साबित होगा।
भाजपा का फोकस बूथ स्तर पर संगठन मजबूत करने पर
भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन बूथों पर संगठन तैयार करना है, जहां अभी तक अध्यक्ष या कार्यकारिणी का गठन पूरा नहीं हो पाया है। पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में कुल 61,404 बूथ शामिल हैं, जिनमें से करीब 15 हजार बूथों पर अभी संगठनात्मक नियुक्तियां लंबित बताई जा रही हैं। सूत्रों के अनुसार, प्रदेश नेतृत्व ने सभी जिलों से बूथ, मंडल और जिला स्तर की संगठनात्मक स्थिति की रिपोर्ट तलब की है। जिन क्षेत्रों में संगठन अधूरा है, वहां जल्द नियुक्तियां पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि चुनाव से पहले बूथ स्तर तक पार्टी की पकड़ मजबूत हो सके।
नए संगठनात्मक ढांचे पर भी भाजपा का जोर
राज्य में प्रशासनिक जिलों के पुनर्गठन के बाद भाजपा भी अपने संगठनात्मक ढांचे को नई परिस्थितियों के अनुरूप व्यवस्थित करने में लगी है। पार्टी का संगठन फिलहाल 44 संगठनात्मक जिलों में विभाजित है और कई स्थानों पर नए सिरे से संरचना तैयार की जा रही है। जिला और मंडल स्तर के रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है। पार्टी का मानना है कि मजबूत बूथ नेटवर्क ही मतदाताओं तक प्रभावी पहुंच और चुनावी प्रबंधन का आधार बनेगा।
कांग्रेस की प्राथमिकता जिला कार्यकारिणियों को पूरा करना
दूसरी ओर कांग्रेस भी पंचायत और निकाय चुनावों से पहले अपने संगठन को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। संगठन सृजन अभियान के तहत जिलाध्यक्षों की नियुक्ति हुए कई महीने बीत चुके हैं, लेकिन 50 संगठनात्मक जिलों में से अभी तक 30 जिलों की जिला कार्यकारिणी घोषित हुई है, जबकि 20 जिलों में यह प्रक्रिया जारी है। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि नई कार्यकारिणियों में विभिन्न क्षेत्रों और वरिष्ठ नेताओं के समर्थकों के साथ सक्रिय कार्यकर्ताओं को भी उचित प्रतिनिधित्व मिले।
इन जिलों में कांग्रेस ने घोषित की कार्यकारिणी
कांग्रेस ने अब तक जिन संगठनात्मक जिलों में कार्यकारिणी घोषित की है, उनमें हनुमानगढ़, बीकानेर ग्रामीण, सीकर, जयपुर ग्रामीण (वेस्ट), कोटपूतली-बहरोड़, डीग, धौलपुर, दौसा, सवाई माधोपुर, अजमेर ग्रामीण, अजमेर शहर, डीडवाना-कुचामन, नागौर, ब्यावर, फलौदी, जोधपुर ग्रामीण, जोधपुर शहर, जैसलमेर, बालोतरा, जालौर, सिरोही, सलूंबर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, राजसमंद, कोटा ग्रामीण, बारां और झालावाड़ शामिल हैं। शेष जिलों में भी जल्द कार्यकारिणी घोषित किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
चुनावी तैयारियों पर टिकी राजनीतिक नजर
राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनावों की तारीखों की आधिकारिक घोषणा का इंतजार है, लेकिन उससे पहले दोनों प्रमुख दल संगठनात्मक मजबूती को प्राथमिकता दे रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि स्थानीय चुनावों में बूथ स्तर का मजबूत नेटवर्क और सक्रिय संगठन चुनावी नतीजों पर अहम प्रभाव डाल सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में दोनों दलों की संगठनात्मक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।