राजस्थान में पंचायत-निकाय चुनावों पर असमंजस, सरकार ने हाईकोर्ट से मांगा अतिरिक्त समय
राजस्थान में पंचायत और नगर निकाय चुनावों को लेकर स्थिति फिलहाल स्पष्ट नहीं है। राज्य सरकार ने राजस्थान हाईकोर्ट से चुनाव कराने के लिए अतिरिक्त समय मांगा है। सरकार का कहना है कि अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के राजनीतिक आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होने और प्रशासनिक तैयारियों में समय लगने के कारण नवंबर से पहले चुनाव कराना संभव नहीं है। मामले पर हाईकोर्ट में सुनवाई प्रस्तावित है।
सरकार ने देरी के बताए ये कारण
राज्य सरकार की ओर से हाईकोर्ट में दायर प्रार्थना पत्र में कहा गया है कि प्रदेश की बड़ी आबादी ओबीसी वर्ग से संबंधित है। ऐसे में राजनीतिक आरक्षण का निर्धारण कानूनी प्रक्रिया के तहत किया जाना आवश्यक है। सरकार के अनुसार, ओबीसी आयोग 14 अगस्त 2026 तक अपनी रिपोर्ट सौंपेगा, जिसके बाद 31 अगस्त तक आरक्षण का अंतिम विवरण तैयार किया जा सकेगा।
चुनाव कराने में लगेगा करीब 90 दिन का समय
राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार, आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनाव कार्यक्रम तैयार करने और मतदान कराने में लगभग 90 दिन का समय लगेगा। प्रस्तावित योजना के मुताबिक पंचायत चुनाव चार चरणों में और नगर निकाय चुनाव दो चरणों में कराए जाएंगे। प्रदेश में करीब 14 हजार ग्राम पंचायतें और 300 से अधिक नगर निकाय होने के कारण चरणबद्ध चुनाव आवश्यक बताए गए हैं।
हाईकोर्ट में होगी अहम सुनवाई
इसी विषय से जुड़ी संयम लोढ़ा की ओर से दायर अवमानना याचिका पर राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ सुनवाई करेगी। इस सुनवाई में सरकार द्वारा मांगे गए अतिरिक्त समय और चुनावी प्रक्रिया की प्रगति पर चर्चा होने की संभावना है। इस मामले पर राजनीतिक दलों और स्थानीय निकायों की भी नजर बनी हुई है।
गोल्फ क्लब निर्माण मामले में भी कोर्ट का फैसला
इसी दौरान हाईकोर्ट ने जयपुर गोल्फ क्लब के पास निर्माणाधीन भवन पर पहले से लागू यथास्थिति (स्टेटस-को) आदेश हटा दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि निर्माण कार्य अंतिम न्यायिक निर्णय के अधीन रहेगा। राज्य सरकार ने अदालत में पक्ष रखा कि निर्माण जेडीए की भूमि पर पूर्व समझौते के अनुरूप किया जा रहा है, इसलिए इसे प्रथम दृष्टया अवैध नहीं माना जा सकता।
चुनाव कार्यक्रम पर कोर्ट के फैसले की नजर
पंचायत और निकाय चुनावों की समय-सीमा को लेकर अब अंतिम स्थिति हाईकोर्ट की आगामी सुनवाई के बाद अधिक स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल सरकार ने प्रशासनिक और कानूनी कारणों का हवाला देते हुए अतिरिक्त समय की मांग की है, जबकि मामले पर न्यायालय के निर्णय का इंतजार किया जा रहा है।