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राजस्थान पंचायत चुनाव: कहीं मंत्री की पत्नी तो कहीं विधायक के बेटे मैदान में, नेताओं ने परिजनों पर लगाया दांव

राजस्थान में पंचायत चुनाव 2026 के बीच कई वरिष्ठ नेताओं के परिवार के सदस्य भी चुनावी मैदान में उतर गए हैं। कहीं मंत्री की पत्नी और बेटे चुनाव लड़ रहे हैं, तो कहीं विधायक के बेटे, पूर्व सांसद की पुत्रवधू और पूर्व मंत्रियों के रिश्तेदार अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। सीकर के श्रीमाधोपुर में यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा के परिवार के कई सदस्यों की उम्मीदवारी चर्चा में है। वहीं, नागौर, बांसवाड़ा, कोटा, बीकानेर और डूंगरपुर सहित कई जिलों में भी राजनीतिक परिवारों से जुड़े प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं।

श्रीमाधोपुर में झाबर सिंह खर्रा के परिवार के सदस्य मैदान में

राजस्थान सरकार में नगरीय विकास एवं आवासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा के परिवार की उम्मीदवारी ने श्रीमाधोपुर पंचायत समिति चुनाव को चर्चा में ला दिया है। उनकी पत्नी शांति देवी वार्ड 17 से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं। वहीं, उनके छोटे बेटे अजय सिंह खर्रा वार्ड 20 से भाजपा प्रत्याशी हैं।मंत्री के बड़े बेटे दुर्गा सिंह खर्रा ने वार्ड 19 से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल किया है। इस तरह परिवार के सदस्य अलग-अलग वार्डों से चुनाव मैदान में हैं। दुर्गा सिंह ने निर्दलीय चुनाव लड़ने के पीछे स्थानीय भाजपा नेतृत्व के प्रति कार्यकर्ताओं की नाराजगी का हवाला दिया है।खर्रा परिवार की एक अन्य सदस्य और मंत्री के छोटे भाई की पत्नी प्रतिभा सिंह ने भी जिला परिषद के वार्ड 23 से निर्दलीय दावेदारी पेश की है। इस घटनाक्रम ने परिवार के अलग-अलग सदस्यों की उम्मीदवारी को लेकर राजनीतिक चर्चा बढ़ा दी है।

नागौर में मंत्री और पूर्व विधायक के परिवार से प्रत्याशी

नागौर जिले में भी कई राजनीतिक परिवारों के सदस्य चुनाव लड़ रहे हैं। मंत्री डॉ. मंजू शर्मा बाघामार के जेठ की बेटी श्वेता पंवार भाजपा के टिकट पर चुनाव मैदान में हैं। वहीं, पूर्व विधायक मंजू मेघवाल के जेठ शंकरलाल कांग्रेस के प्रत्याशी हैं।नागौर जिला परिषद के वार्ड 15 से पूर्व विधायक सुखाराम नेतड़िया भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। इन उम्मीदवारी के जरिए जिले में राजनीतिक रूप से सक्रिय परिवारों की भागीदारी सामने आई है।वहीं, सांसद हनुमान बेनीवाल की बहन दाखू देवी राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के टिकट पर पंचायत समिति प्रधान पद की दावेदार बताई गई हैं। अलग-अलग दलों से जुड़े इन प्रत्याशियों की मौजूदगी से स्थानीय चुनावी मुकाबले में कई राजनीतिक समीकरण बन सकते हैं।

सीकर में जिलाध्यक्ष और पूर्व नेताओं के परिवार भी मैदान में

सीकर जिले में भाजपा के जिलाध्यक्ष मनोज बाटड़ की पत्नी गणपति भाजपा के टिकट पर प्रधान पद की दावेदार हैं। वहीं, भाजपा किसान मोर्चा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष हरिराम रणवा के छोटे भाई की पत्नी सुनीता रावणा भी चुनाव लड़ रही हैं।पूर्व केंद्रीय मंत्री महादेव सिंह खंडेला की पत्नी पार्वती कांग्रेस के टिकट पर चुनाव मैदान में हैं। सैनिक कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष प्रेमसिंह बाजौर के भाई बाबूसिंह बाजौर भाजपा के प्रत्याशी हैं।इन नामों से स्पष्ट है कि पंचायत चुनाव में केवल मौजूदा जनप्रतिनिधि ही नहीं, बल्कि पूर्व नेताओं और संगठन से जुड़े पदाधिकारियों के परिवार भी अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं।

बांसवाड़ा, कोटा और बीकानेर में भी परिवारों की भागीदारी

बांसवाड़ा में विधायक अर्जुन बामनिया के बेटे विकास बामनिया कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। कोटा में देहात कांग्रेस जिलाध्यक्ष भानुप्रताप सिंह की पत्नी निकिता कांग्रेस की प्रत्याशी हैं। वहीं, पूर्व जिला परिषद सदस्य डॉ. बद्री गोचर की पत्नी रंजना गोचर भाजपा के टिकट पर मैदान में हैं।बीकानेर में पूर्व मंत्री गोविंदराम मेघवाल की पुत्री सरिता चौहान कांग्रेस की प्रत्याशी हैं। उनकी ओर से पुत्र गौरव चौहान का नाम भी प्रधान पद के दावेदारों में बताया गया है, हालांकि उनके चुनावी क्षेत्र की जानकारी की पुष्टि जरूरी है।भीलवाड़ा में पूर्व मंत्री कालूलाल गुर्जर की पत्नी सरोज देवी गुर्जर भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं। इन उदाहरणों से अलग-अलग जिलों में राजनीतिक परिवारों की भागीदारी का पता चलता है।

उदयपुर और डूंगरपुर में भी प्रमुख नाम मैदान में

उदयपुर जिले के मावली क्षेत्र में विधायक पुष्कर लाल डांगी के बेटे शांतिलाल जिला परिषद सदस्य का चुनाव लड़ रहे हैं। उन्हें जिला प्रमुख पद का दावेदार भी बताया जा रहा है।डूंगरपुर में पूर्व विधायक अनिता कटारा जिला परिषद सदस्य का चुनाव लड़ रही हैं। वह पूर्व मंत्री कनकमल कटारा की पुत्रवधू हैं। भाजपा के पूर्व विधायक देवेंद्र कटारा भी जिला परिषद चुनाव में उम्मीदवार हैं। वहीं, कांग्रेस के पूर्व विधायक पूंजीलाल परमार भी मैदान में हैं।डूंगरपुर जिला परिषद के चुनाव में बीएपी जिलाध्यक्ष प्रसून मसार भी जिला प्रमुख पद की दौड़ में बताए जा रहे हैं। यहां अलग-अलग दलों के उम्मीदवारों के बीच मुकाबले की तस्वीर नामांकन और चुनावी प्रक्रिया के आगे बढ़ने के साथ स्पष्ट होगी।

जिला प्रमुख और प्रधान पदों पर टिकी निगाहें

पंचायत चुनाव में जिला प्रमुख और पंचायत समिति प्रधान के पद राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण हैं। इन पदों के लिए परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों की उम्मीदवारी से स्थानीय स्तर पर राजनीतिक चर्चा तेज हुई है।हालांकि, किसी नेता के परिवार से होने भर से उम्मीदवार की जीत या पद मिलना तय नहीं होता। अंतिम परिणाम मतदाताओं के फैसले और चुनाव प्रक्रिया पर निर्भर करेंगे। अब नजर इस बात पर रहेगी कि इन उम्मीदवारों को अपने-अपने क्षेत्रों में कितना समर्थन मिलता है और जिला प्रमुख तथा प्रधान पदों के लिए कौन दावेदारी मजबूत कर पाता है।

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