राजस्थान में फर्जी FMGE सर्टिफिकेट मामला: ताजिकिस्तान से MBBS करने वाला डॉक्टर गिरफ्तार, 22 लाख में खरीदने का आरोप
जयपुर। राजस्थान में फर्जी फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन (FMGE) सर्टिफिकेट मामले में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने एक और आरोपी डॉक्टर को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान डॉ. राकेश कुमार यादव के रूप में हुई है। वह ताजिकिस्तान से MBBS की पढ़ाई करके भारत लौटा था। आरोप है कि FMGE परीक्षा पास नहीं कर पाने के बावजूद उसने कथित तौर पर 22 लाख रुपये देकर फर्जी पासिंग सर्टिफिकेट हासिल किया। इसी दस्तावेज के आधार पर उसने राजस्थान मेडिकल काउंसिल (RMC) में इंटर्नशिप के लिए पंजीकरण कराने का आवेदन किया था। SOG अब आरोपी से पूछताछ कर फर्जी प्रमाणपत्र तैयार करने और उपलब्ध कराने वाले नेटवर्क की जांच कर रही है।
FMGE सर्टिफिकेट मामले में SOG की कार्रवाई
राजस्थान में विदेश से मेडिकल की पढ़ाई करके लौटे छात्रों के कथित फर्जी FMGE सर्टिफिकेट का मामला जांच के दायरे में है। इसी मामले में SOG ने डॉ. राकेश कुमार यादव को गिरफ्तार किया है।जांच के अनुसार, आरोपी ने विदेश से MBBS की डिग्री हासिल की थी, लेकिन वह भारत में आवश्यक FMGE परीक्षा पास नहीं कर सका। इसके बावजूद उसने कथित तौर पर फर्जी प्रमाणपत्र हासिल कर लिया।SOG की कार्रवाई के बाद अब यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि प्रमाणपत्र कहां तैयार किया गया और इसे उपलब्ध कराने में किन लोगों की भूमिका थी। जांच एजेंसी यह भी पता लगा रही है कि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोग कहां-कहां सक्रिय हैं।
2022 में ताजिकिस्तान से MBBS करके लौटा था आरोपी
प्रारंभिक जांच के मुताबिक, डॉ. राकेश कुमार यादव वर्ष 2022 में ताजिकिस्तान के एक मेडिकल कॉलेज से MBBS की पढ़ाई पूरी करके भारत लौटा था।विदेश से मेडिकल की पढ़ाई करने वाले भारतीय नागरिकों को भारत में चिकित्सा पंजीकरण और प्रैक्टिस के लिए लागू नियमों का पालन करना होता है। संबंधित पात्रता के अनुसार, FMGE परीक्षा पास करना भी जरूरी होता है।आरोप है कि राकेश यादव परीक्षा पास नहीं कर पाया। इसके बाद उसने कथित तौर पर दलालों के माध्यम से फर्जी FMGE पासिंग सर्टिफिकेट हासिल करने का रास्ता अपनाया।हालांकि, मामले में सामने आए आरोपों और दस्तावेजों की वास्तविकता का अंतिम निर्धारण जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।
22 लाख रुपये में फर्जी सर्टिफिकेट खरीदने का आरोप
SOG की शुरुआती जांच के अनुसार, आरोपी ने फर्जी प्रमाणपत्र हासिल करने के लिए अलवर निवासी नफीस खान और दौसा निवासी शुभम गुर्जर से संपर्क किया था।आरोप है कि इन दलालों ने FMGE परीक्षा पास करने का प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने के बदले 22 लाख रुपये लिए। इसके बाद राकेश यादव को कथित तौर पर ऐसा दस्तावेज दिया गया, जो नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशंस (NBE) के प्रमाणपत्र जैसा दिखाई देता था।जांच एजेंसी अब कथित भुगतान, प्रमाणपत्र तैयार करने की प्रक्रिया और संबंधित लोगों के बीच संपर्क की पड़ताल कर रही है। इन तथ्यों की पुष्टि जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर होगी।
राजस्थान मेडिकल काउंसिल में इंटर्नशिप के लिए किया था आवेदन
आरोप है कि डॉ. राकेश यादव ने कथित फर्जी FMGE सर्टिफिकेट के आधार पर राजस्थान मेडिकल काउंसिल, जयपुर में इंटर्नशिप के पंजीकरण के लिए आवेदन किया था।बताया जा रहा है कि जांच शुरू होने के बाद वह अपनी इंटर्नशिप बीच में छोड़कर फरार हो गया था। इसके बाद SOG ने उसकी तलाश शुरू की और उसे गिरफ्तार कर लिया।अब जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि आवेदन के दौरान कौन-कौन से दस्तावेज जमा किए गए थे और उनकी जांच किस स्तर पर हुई। यदि किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है, तो उसके संबंध में भी नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
शुभम गुर्जर गिरफ्तार, नफीस खान की तलाश
इस मामले में अलवर निवासी नफीस खान और दौसा निवासी शुभम गुर्जर के नाम सामने आए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, शुभम गुर्जर को SOG पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि नफीस खान की तलाश जारी है।जांच एजेंसी कथित फर्जी प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने वाले नेटवर्क और उससे जुड़े लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है। साथ ही यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि क्या इसी तरीके से अन्य लोगों ने भी प्रमाणपत्र हासिल किए थे।किसी आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगी।
100 से अधिक संदिग्ध डॉक्टरों के दस्तावेजों की जांच
SOG की जांच केवल एक आरोपी तक सीमित नहीं बताई जा रही है। अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, विदेश से MBBS करके लौटे 100 से अधिक अन्य डॉक्टरों के FMGE प्रमाणपत्रों का सत्यापन किया जा रहा है।जांच में रूस, चीन, कजाकिस्तान, ताजिकिस्तान, किर्गिस्तान और यूक्रेन सहित विभिन्न देशों से मेडिकल की पढ़ाई करके लौटे लोगों के दस्तावेजों की जांच की जा रही है।SOG के अनुसार, इस प्रकरण में अब तक 32 आरोपियों की गिरफ्तारी की जा चुकी है। इन आंकड़ों और अन्य संदिग्धों की स्थिति की पुष्टि संबंधित जांच एजेंसी की आधिकारिक जानकारी से की जानी चाहिए।
ADG विशाल बंसल के निर्देशन में जांच जारी
SOG के अतिरिक्त महानिदेशक विशाल बंसल के निर्देशन में मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है। जांच एजेंसी कथित फर्जी प्रमाणपत्रों, भुगतान के तरीकों और दलालों के नेटवर्क से जुड़े तथ्यों को खंगाल रही है।इसके अलावा, यह भी जांच का विषय है कि राजस्थान मेडिकल काउंसिल में आवेदन के दौरान दस्तावेजों का सत्यापन कैसे हुआ और क्या किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है।फिलहाल डॉ. राकेश कुमार यादव की गिरफ्तारी के बाद पूछताछ के जरिए मामले की अन्य कड़ियों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे नेटवर्क और संबंधित लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।
मेडिकल पंजीकरण प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल
फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर चिकित्सा पंजीकरण हासिल करने की कोशिश का आरोप मेडिकल शिक्षा और पंजीकरण व्यवस्था में दस्तावेजों के सत्यापन के महत्व को सामने लाता है।विदेश से मेडिकल की पढ़ाई करके लौटने वाले अभ्यर्थियों की पात्रता और परीक्षा संबंधी रिकॉर्ड का सत्यापन जरूरी है। इससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिलती है कि पंजीकरण के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थी निर्धारित मानकों को पूरा करते हैं।फिलहाल, राजस्थान के इस मामले में SOG की जांच जारी है। प्रमाणपत्रों की प्रामाणिकता, कथित लेनदेन और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका सामने आने के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होगी।