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‘फेरारी जैसा हुनर, लेकिन संकट बरकरार’… राहुल गांधी ने जयपुर के बस बॉडी बिल्डर्स से जानी उद्योग की चुनौतियां

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के राजस्थान दौरे का एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है। वीडियो में राहुल गांधी जयपुर के बस और ट्रक बॉडी निर्माण उद्योग से जुड़े कारीगरों और छोटे उद्यमियों से बातचीत करते नजर आते हैं। इस दौरान उन्होंने उनके कामकाज, तकनीकी दक्षता और उद्योग के सामने मौजूद चुनौतियों को समझने की कोशिश की। वहीं, कारीगरों ने बसों में आग लगने की घटनाओं, सरकारी नीतियों और छोटे उद्योगों के सामने आने वाली परेशानियों को लेकर अपनी बातें रखीं। इन दावों पर संबंधित वाहन निर्माताओं या सरकार की ओर से तत्काल कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

राहुल गांधी ने कारीगरों के हुनर को करीब से देखा

वीडियो में राहुल गांधी स्थानीय बस बॉडी निर्माण इकाइयों का दौरा करते हुए कारीगरों से निर्माण प्रक्रिया की जानकारी लेते दिखाई देते हैं। कारीगरों ने बताया कि बसों का ढांचा तैयार करने में पारंपरिक तकनीक और हाथ के कौशल का बड़ा योगदान होता है। लोहे की शीट को कई बार आकार देकर मजबूत संरचना तैयार की जाती है। इस प्रक्रिया को देखने के बाद राहुल गांधी ने कारीगरों के कौशल की सराहना करते हुए कहा कि दुनिया की कई लग्जरी कार कंपनियां भी हाथ से तैयार किए जाने वाले उच्च गुणवत्ता वाले निर्माण कार्य के लिए जानी जाती हैं।

बसों में आग लगने को लेकर कारीगरों ने रखी अपनी बात

बातचीत के दौरान कुछ कारीगरों ने दावा किया कि सड़क पर बसों में आग लगने की घटनाओं के लिए अक्सर स्थानीय बॉडी बिल्डर्स को जिम्मेदार ठहराया जाता है, जबकि उनके अनुसार कई मामलों में मूल चेसिस की वायरिंग या अन्य तकनीकी हिस्सों में समस्या भी एक कारण हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदूषण नियंत्रण प्रणाली से जुड़े कुछ तकनीकी पहलुओं पर भी ध्यान देने की जरूरत है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और न ही वाहन निर्माताओं या संबंधित एजेंसियों की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है।

सरकारी नीतियों और एमएसएमई सेक्टर पर भी उठे सवाल

कारीगरों और उद्योग से जुड़े लोगों ने बातचीत के दौरान आरोप लगाया कि वर्तमान व्यवस्था में बड़े वाहन निर्माताओं को अपेक्षाकृत अधिक अवसर मिलते हैं, जबकि छोटे और मध्यम उद्योगों (MSMEs) को कई स्तरों पर चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने लाइसेंस प्रक्रिया, सरकारी टेंडर और नियामकीय बदलावों को लेकर अपनी चिंताएं भी साझा कीं। उनका कहना था कि यदि छोटे उद्योगों को समान अवसर और नीति समर्थन मिले तो वे रोजगार सृजन और उत्पादन क्षमता में कहीं अधिक योगदान दे सकते हैं।

स्थानीय उद्योग की क्षमता और रोजगार पर जोर

बातचीत के दौरान उद्योग प्रतिनिधियों ने दावा किया कि राजस्थान के कुछ प्रमुख केंद्र हर वर्ष बड़ी संख्या में बस बॉडी का निर्माण करते हैं और इस क्षेत्र से हजारों लोगों की आजीविका जुड़ी हुई है। राहुल गांधी ने उनकी बातें सुनने के बाद भरोसा दिलाया कि छोटे उद्योगों और कारीगरों से जुड़े मुद्दों को उचित मंच पर उठाने का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि देश के पारंपरिक कौशल और लघु उद्योगों को मजबूत करना आर्थिक विकास और रोजगार सृजन के लिए महत्वपूर्ण है।

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