Rafale F5: हाइपरसोनिक परमाणु मिसाइल से लैस होगा राफेल, बढ़ेगी फ्रांस की रणनीतिक ताकत
फ्रांस ने अपने भविष्य के राफेल F5 लड़ाकू विमान के लिए अगली पीढ़ी की ASN4G हाइपरसोनिक मिसाइल विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। यह नई परमाणु-सक्षम मिसाइल मौजूदा ASMP प्रणाली की जगह लेगी और फ्रांस की रणनीतिक प्रतिरोध क्षमता को नई मजबूती देगी। इस परियोजना पर भारत की भी नजरें हैं, क्योंकि भारतीय वायुसेना पहले से राफेल विमानों का संचालन कर रही है और भविष्य में राफेल F5 को लेकर भी चर्चाएं जारी हैं।
2035 तक सेवा में शामिल करने की तैयारी
फ्रांस की रक्षा खरीद एजेंसी ने ASN4G कार्यक्रम को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक प्रक्रिया शुरू कर दी है। लक्ष्य है कि वर्ष 2035 तक इस नई मिसाइल को राफेल F5 के साथ पूरी तरह एकीकृत कर दिया जाए। इसे फ्रांसीसी वायुसेना और नौसेना के रणनीतिक परमाणु बलों में शामिल करने की योजना है। बदलते सुरक्षा माहौल और उन्नत वायु रक्षा प्रणालियों को ध्यान में रखते हुए इस मिसाइल को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित किया जा रहा है।
ASMP की जगह लेगी नई हाइपरसोनिक मिसाइल
ASN4G फ्रांस की मौजूदा ASMP परमाणु स्टैंड-ऑफ मिसाइल का स्थान लेगी। नई मिसाइल स्क्रैमजेट तकनीक से संचालित होगी और हाइपरसोनिक गति हासिल करने में सक्षम मानी जा रही है। रिपोर्टों के अनुसार इसकी मारक क्षमता लगभग 1,000 किलोमीटर तक हो सकती है। अधिक गति और उन्नत तकनीक के कारण यह दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को भेदने में पहले की तुलना में ज्यादा प्रभावी साबित हो सकती है।
हाइपरसोनिक क्लब में मजबूत होगी फ्रांस की स्थिति
ASN4G के सफल विकास के बाद फ्रांस उन चुनिंदा देशों में शामिल हो सकता है, जिनके पास हवाई प्लेटफॉर्म से लॉन्च होने वाले हाइपरसोनिक हथियार मौजूद हैं। फिलहाल रूस और चीन इस क्षेत्र में आगे माने जाते हैं, जबकि अमेरिका भी अपने कार्यक्रमों पर काम कर रहा है। ऐसे में फ्रांस का यह कदम यूरोप में उसकी रणनीतिक स्वायत्तता और परमाणु प्रतिरोध क्षमता को नई ऊंचाई देने वाला माना जा रहा है।
राफेल F5 को मिलेगा नई पीढ़ी का अपग्रेड
डसॉल्ट एविएशन द्वारा विकसित किए जा रहे राफेल F5 को मौजूदा संस्करणों की तुलना में अधिक उन्नत बनाया जा रहा है। इसमें बेहतर इंजन, आधुनिक डेटा लिंक, उन्नत सर्वाइवेबिलिटी और मानव रहित सहयोगी ड्रोन के साथ संयुक्त अभियान चलाने जैसी क्षमताएं शामिल होंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह संस्करण भविष्य के युद्धक्षेत्र की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है, जिससे इसकी ऑपरेशनल क्षमता और बढ़ जाएगी।
भारत के लिए क्यों अहम है यह परियोजना?
भारतीय वायुसेना पहले से राफेल लड़ाकू विमानों का उपयोग कर रही है, इसलिए राफेल F5 से जुड़ी हर प्रगति भारत के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि भारत की ओर से इस संस्करण की खरीद को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन रक्षा सहयोग के क्षेत्र में फ्रांस और भारत के बीच लगातार बातचीत जारी है। ऐसे में भविष्य में राफेल F5 और उससे जुड़ी नई तकनीकों को लेकर भारत की रणनीति पर भी नजरें टिकी रहेंगी।