‘युवा पीढ़ी भारतीय सिनेमा से दूर हो रही’, आर माधवन ने जताई चिंता; बेटे का उदाहरण देकर रखी बात
अभिनेता आर. माधवन ने भारतीय सिनेमा के बदलते दर्शक वर्ग को लेकर चिंता व्यक्त की है। अपनी आगामी फिल्म ‘GDN’ के प्रमोशन के दौरान उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी का एक बड़ा वर्ग अब भारतीय फिल्मों की बजाय जापानी एनीमे और कोरियन कंटेंट की ओर अधिक आकर्षित हो रहा है। उन्होंने इस बदलाव को भारतीय फिल्म उद्योग के लिए गंभीर चुनौती बताया।
‘नई पीढ़ी भारतीय फिल्मों से बना रही दूरी’
एक बातचीत के दौरान आर. माधवन ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी की पसंद तेजी से बदल रही है। उनके मुताबिक, यह केवल दूसरी फिल्म इंडस्ट्री से प्रतिस्पर्धा का मामला नहीं है, बल्कि दर्शकों के कंटेंट देखने के तरीके में बड़ा बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि युवाओं का एक वर्ग भारतीय फिल्मों के बजाय जापानी एनीमे और कोरियन कंटेंट को प्राथमिकता दे रहा है, जिससे भारतीय सिनेमा के सामने नई चुनौती खड़ी हो रही है।
बेटे वेदांत का उदाहरण देकर समझाई अपनी चिंता
माधवन ने अपनी बात को स्पष्ट करने के लिए अपने 20 वर्षीय बेटे वेदांत की पीढ़ी का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि उनके बेटे की उम्र के कई युवा भारतीय फिल्मों से पहले जितना जुड़ाव महसूस नहीं करते। उनके अनुसार, कई युवा न केवल थिएटर में हिंदी या तमिल फिल्में देखने से दूरी बना रहे हैं, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी विदेशी कंटेंट को अधिक पसंद कर रहे हैं। माधवन का मानना है कि यह रुझान भारतीय फिल्म उद्योग के लिए गंभीर विचार का विषय है।
‘अलग तरह की कहानी कहने का तरीका दर्शकों को आकर्षित कर रहा’
आर. माधवन ने कहा कि भारतीय फिल्म उद्योग दर्शकों को किसी एक विदेशी फिल्म इंडस्ट्री के कारण नहीं खो रहा, बल्कि कहानी कहने के नए और अलग अंदाज के कारण चुनौती का सामना कर रहा है। उन्होंने माना कि वैश्विक स्तर पर दर्शकों के पास अब पहले से कहीं अधिक विकल्प मौजूद हैं, इसलिए भारतीय सिनेमा को भी लगातार नए प्रयोग और बेहतर कंटेंट पर ध्यान देना होगा।
कमर्शियल फिल्मों से आगे बढ़कर करना चाहते हैं अलग काम
माधवन ने अपने करियर को लेकर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि वह चाहते तो लगातार पारंपरिक कमर्शियल फिल्मों में काम कर सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसे किरदार और प्रोजेक्ट चुनने को प्राथमिकता दी, जिनमें अभिनय की गहराई दिखाने का अवसर मिले। उनके अनुसार, एक कलाकार के रूप में नई चुनौतियों को स्वीकार करना और अलग तरह की कहानियों का हिस्सा बनना उनके लिए ज्यादा महत्वपूर्ण है।
कंटेंट की गुणवत्ता पर दिया जोर
अभिनेता का मानना है कि किसी एक फिल्म में जीवन के सभी अनुभवों को समेटना संभव नहीं है, लेकिन हर फिल्म के जरिए दर्शकों तक कुछ नया और सार्थक पहुंचाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि भारतीय सिनेमा को बदलते समय के साथ अपनी कहानियों और प्रस्तुति में भी बदलाव लाना होगा, ताकि युवा दर्शकों से उसका जुड़ाव और मजबूत हो सके।