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NEET परीक्षार्थी की मौत पर उठा सवाल: ‘और कितनी जानें लेंगे?’ अभिजीत दीपके का केंद्र सरकार पर हमला

राजस्थान के सीकर में NEET परीक्षा की तैयारी कर रहे 22 वर्षीय छात्र उमेश की आत्महत्या ने एक बार फिर देश की परीक्षा प्रणाली, छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव और प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर बहस छेड़ दी है। इस घटना के बाद कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर निशाना साधते हुए सवाल उठाया है कि आखिर छात्रों की मौतों का सिलसिला कब रुकेगा। उन्होंने परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग करते हुए कहा कि बार-बार सामने आ रही गड़बड़ियों और पेपर लीक की घटनाओं ने युवाओं का भरोसा तोड़ दिया है।

सीकर में NEET अभ्यर्थी की आत्महत्या से मचा हड़कंप

सीकर में रहने वाला 22 वर्षीय छात्र उमेश मेडिकल क्षेत्र में करियर बनाने का सपना देख रहा था और NEET परीक्षा की तैयारी कर रहा था। बताया जा रहा है कि वह 21 जून को आयोजित होने वाली NEET री-टेस्ट परीक्षा में शामिल होने वाला था। यह उसका तीसरा प्रयास था और परिवार को उससे काफी उम्मीदें थीं। लेकिन परीक्षा से पहले ही उसने आत्महत्या कर ली। इस घटना के बाद परिवार, मित्रों और कोचिंग जगत में शोक का माहौल है। छात्र की मौत ने प्रतियोगी परीक्षाओं के दबाव और छात्रों की मानसिक स्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अभिजीत दीपके ने शिक्षा मंत्री पर साधा निशाना

छात्र की मौत के बाद कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से सवाल करते हुए लिखा कि आखिर और कितनी जानें ली जाएंगी। दीपके का कहना है कि लगातार सामने आ रहे पेपर लीक, परीक्षा विवाद और अनिश्चितता के कारण लाखों छात्र मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि परीक्षा प्रणाली में मौजूद खामियों को दूर करने के बजाय सरकार केवल औपचारिक बयानबाजी तक सीमित है, जबकि युवा वर्ग इसका खामियाजा भुगत रहा है।

पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले

सीकर में उमेश की मौत कोई अकेली घटना नहीं है। इससे पहले भी इसी क्षेत्र में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों द्वारा आत्महत्या किए जाने के मामले सामने आ चुके हैं। करीब एक महीने पहले झुंझुनूं के रहने वाले 23 वर्षीय प्रदीप माहिच ने भी कथित रूप से मानसिक दबाव के चलते आत्महत्या कर ली थी। वह भी कई वर्षों से NEET की तैयारी कर रहा था। इन घटनाओं ने कोचिंग हब माने जाने वाले राजस्थान में छात्रों की मानसिक स्वास्थ्य स्थिति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतिस्पर्धा और अपेक्षाओं का दबाव कई बार छात्रों को गंभीर मानसिक संकट में धकेल देता है।

परीक्षा प्रणाली और मानसिक स्वास्थ्य पर फिर बहस

लगातार सामने आ रही छात्र आत्महत्या की घटनाओं के बाद परीक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और छात्रों पर पड़ रहे दबाव को लेकर बहस तेज हो गई है। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि केवल परीक्षा सुधार ही नहीं, बल्कि छात्रों के लिए प्रभावी काउंसलिंग और मानसिक स्वास्थ्य सहायता व्यवस्था भी जरूरी है। अभिभावकों और शिक्षकों को भी छात्रों की भावनात्मक स्थिति पर ध्यान देना चाहिए। वहीं विपक्षी दल और सामाजिक संगठन परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने तथा युवाओं के लिए बेहतर सहायता तंत्र विकसित करने की मांग कर रहे हैं।

राहुल गांधी भी छात्रों से करेंगे संवाद

इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी 17 जून को कोटा पहुंचने वाले हैं। कार्यक्रम के दौरान वह प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों से सीधे संवाद करेंगे। कांग्रेस के अनुसार इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों की समस्याओं, परीक्षा संबंधी दबाव और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को समझना है। राहुल गांधी छात्रों के अनुभव सुनेंगे और उनके सुझावों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने का प्रयास करेंगे। इस कार्यक्रम को युवा मुद्दों पर केंद्रित पहल के रूप में देखा जा रहा है।

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