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सिरोही अस्पताल में मेडिकल जांच पर उठे सवाल, डॉक्टर और स्टाफ पर बीयर मांगने का आरोप

राजस्थान के सिरोही जिला अस्पताल में बच्चों की मेडिकल जांच के दौरान कथित तौर पर डॉक्टर और अस्पताल स्टाफ द्वारा पुलिसकर्मियों से बीयर मांगने के आरोप ने पूरे मामले को विवादों में ला दिया है। शिकायत है कि मांग पूरी नहीं होने पर मेडिकल जांच तत्काल पूरी नहीं की गई। मामला सामने आने के बाद जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने इसे गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की है और अस्पताल प्रशासन ने जांच समिति गठित कर दी है।

मेडिकल जांच के दौरान सामने आया गंभीर आरोप

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अनुसार शुक्रवार रात कोतवाली थाना पुलिस, बाल कल्याण समिति के सदस्य और प्राधिकरण के कर्मचारी दो पीड़ित बच्चों को मेडिकल परीक्षण के लिए जिला अस्पताल लेकर पहुंचे थे। शिकायत में आरोप लगाया गया कि पहले ड्यूटी पर चिकित्सक उपलब्ध नहीं थे। बाद में पहुंचे चिकित्सक और स्टाफ ने कथित रूप से पुलिसकर्मियों से बीयर की बोतलें लाने की बात कही। आरोप है कि मांग पूरी नहीं होने पर मेडिकल जांच तत्काल पूरी करने के बजाय बच्चों को अगले दिन आने के लिए कह दिया गया। शिकायत में ड्यूटी के दौरान नशे में होने का आरोप भी लगाया गया है।

विधिक सेवा प्राधिकरण ने मांगी रिपोर्ट, जांच शुरू

मामले की जानकारी मिलने के बाद जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव सावित्री आनंद निर्भीक ने इसे गंभीर मानते हुए जिला अस्पताल के पीएमओ और सीएमएचओ से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने पूरे घटनाक्रम की जांच के लिए एक समिति गठित कर दी। दोनों पीड़ित बच्चों का मेडिकल परीक्षण बाद में पूरा कराया गया। जिला प्रशासन को भी पूरे मामले से अवगत करा दिया गया है और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

बिना पंजीकरण संचालित हो रहा था हॉस्टल

जिला प्रशासन की जांच में सामने आया कि संबंधित हॉस्टल बिना वैध पंजीकरण के संचालित किया जा रहा था। जिला कलक्टर के निर्देश पर नगर परिषद ने हॉस्टल को सीज कर दिया है। निरीक्षण के दौरान बच्चों के रहने की पर्याप्त व्यवस्था और सुरक्षा मानकों में भी गंभीर खामियां मिलीं। करीब 40 बच्चों के लिए केवल दो शौचालय उपलब्ध थे और परिसर में साफ-सफाई की स्थिति भी संतोषजनक नहीं पाई गई। प्रशासन ने संबंधित नियमों के तहत आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।

रिपोर्ट के बाद होगी नियमानुसार कार्रवाई

जिला अस्पताल के पीएमओ डॉ. वीरेन्द्र महात्मा ने बताया कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए समिति गठित कर दी गई है। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। वहीं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि बच्चों के अधिकारों और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनुचित व्यवहार को गंभीरता से लिया जाएगा।

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