प्रियंका का बयान रिकॉर्ड से हटा, राहुल गांधी ने नए शिक्षा मंत्री पर तेज किए हमले
लोकसभा में लोक परीक्षा संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी की नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी को लेकर की गई टिप्पणी पर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। स्पीकर ओम बिरला ने टिप्पणी को सदन की कार्यवाही से हटाने का निर्देश दिया। इसके बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सदन के बाहर प्रेस से बातचीत में शिक्षा मंत्री की नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। वहीं सत्ता पक्ष ने कांग्रेस के आरोपों को निराधार बताते हुए माफी की मांग की।
स्पीकर ने बयान हटाया, सदन में बढ़ा राजनीतिक टकराव
लोकसभा में विधेयक पर चर्चा के दौरान प्रियंका गांधी ने नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उनके बयान पर सत्ता पक्ष ने तत्काल आपत्ति जताई, जिसके बाद सदन में जोरदार हंगामा हुआ। स्पीकर ओम बिरला ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि किसी भी मंत्री के खिलाफ बिना पुष्ट तथ्यों के इस तरह की टिप्पणी करना उचित नहीं है। इसके बाद उन्होंने संबंधित टिप्पणी को कार्यवाही से हटाने का निर्देश दिया। इस घटनाक्रम ने संसद के भीतर राजनीतिक माहौल को और अधिक गरमा दिया तथा सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली।
राहुल गांधी ने शिक्षा मंत्री की नियुक्ति पर उठाए सवाल
प्रियंका गांधी का बयान हटाए जाने के बाद लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने संसद परिसर में मीडिया से बातचीत करते हुए नए शिक्षा मंत्री की नियुक्ति को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। राहुल गांधी ने कहा कि देश में शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली को लेकर युवाओं में असंतोष है, ऐसे समय में सरकार को ऐसी नियुक्ति करनी चाहिए थी जिस पर किसी प्रकार का विवाद न हो। उन्होंने शिक्षा मंत्री को लेकर तीखी टिप्पणी करते हुए सरकार के फैसले पर सवाल उठाए और कहा कि प्रधानमंत्री के पास कई विकल्प मौजूद थे, लेकिन उन्होंने अलग निर्णय लिया।
प्रियंका गांधी बोलीं- महिलाओं के सम्मान का मुद्दा
राहुल गांधी के बयान के दौरान प्रियंका गांधी भी उनके साथ मौजूद रहीं। उन्होंने कहा कि उनका मुद्दा किसी व्यक्ति विशेष पर हमला करना नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान और जवाबदेही से जुड़ा है। प्रियंका ने दावा किया कि उन्होंने सदन में जो बातें कहीं, उनके समर्थन में तथ्य मौजूद हैं और आवश्यकता पड़ने पर वे उन्हें सार्वजनिक भी करेंगी। कांग्रेस का कहना है कि सरकार को विपक्ष के सवालों का जवाब देने के बजाय उन्हें दबाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
सत्ता पक्ष ने आरोपों को बताया निराधार
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज किया। रिजिजू ने कहा कि बिना प्रमाण किसी मंत्री पर इस तरह के आरोप लगाना संसदीय मर्यादा के खिलाफ है और इसे चरित्र हनन की कोशिश माना जाना चाहिए। उन्होंने प्रियंका गांधी से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की। वहीं प्रह्लाद जोशी ने कहा कि यदि कोई आरोप लगाए जा रहे हैं तो उनके समर्थन में ठोस प्रमाण भी पेश किए जाने चाहिए। सरकार का कहना है कि विपक्ष तथ्यों के बजाय राजनीतिक आरोपों के सहारे माहौल बनाने का प्रयास कर रहा है।
विवाद ने संसद से बाहर भी पकड़ा राजनीतिक रंग
संसद के भीतर शुरू हुआ यह विवाद अब राजनीतिक बयानबाजी का नया विषय बन गया है। कांग्रेस जहां इसे जवाबदेही और पारदर्शिता का मुद्दा बता रही है, वहीं भाजपा इसे निराधार आरोपों के जरिए राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश करार दे रही है। दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप के कारण शिक्षा सुधार, परीक्षा व्यवस्था और विधेयक पर होने वाली चर्चा भी राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गई है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर संसद और राजनीतिक मंचों पर और तीखी बयानबाजी देखने को मिल सकती है।