कोटा में प्रॉपर्टी मालिकों को बड़ी राहत, KDA ने खत्म की सेल परमिशन की बाध्यता
कोटा शहर के लाखों संपत्ति मालिकों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। कोटा विकास प्राधिकरण (KDA) ने लंबे समय से लागू सेल परमिशन की अनिवार्यता समाप्त करने का निर्णय लिया है। अब जयपुर की तर्ज पर कोटा में भी ई-पट्टा प्रणाली लागू की जाएगी, जिससे संपत्तियों की खरीद-बिक्री की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सरल, तेज और पारदर्शी होगी। इस फैसले के साथ शहर के कई विकास कार्यों को भी मंजूरी दी गई है, जिससे शहरी सुविधाओं को नई गति मिलने की उम्मीद है।
सेल परमिशन खत्म होने से आसान होगी संपत्ति की खरीद-बिक्री
कोटा विकास प्राधिकरण की बैठक में लिया गया यह निर्णय आम नागरिकों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। अब मकान, दुकान, भूखंड या अन्य संपत्तियों की बिक्री के लिए प्राधिकरण से अलग से सेल परमिशन लेने की आवश्यकता नहीं होगी। पहले इस प्रक्रिया में आवेदन, दस्तावेजों की जांच और स्वीकृति के कारण कई सप्ताह तक इंतजार करना पड़ता था। कई मामलों में फाइलों के लंबित रहने से लोगों को आर्थिक और प्रशासनिक परेशानियों का सामना करना पड़ता था। नए निर्णय के बाद संपत्ति हस्तांतरण की प्रक्रिया अधिक सहज और समयबद्ध होने की संभावना है।
जयपुर मॉडल पर लागू होगी ई-पट्टा प्रणाली
KDA ने संपत्ति प्रबंधन को डिजिटल और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से जयपुर की तर्ज पर ई-पट्टा प्रणाली लागू करने का फैसला किया है। इस व्यवस्था के लागू होने के बाद नागरिकों को कई प्रक्रियाओं के लिए कार्यालयों के बार-बार चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। ऑनलाइन माध्यम से दस्तावेजों का प्रबंधन और स्वीकृति की प्रक्रिया तेज होगी। इससे प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता बढ़ेगी और रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण भी आसान होगा। माना जा रहा है कि यह कदम भविष्य में शहरी प्रशासन को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।
KDA की बैठक में विकास परियोजनाओं को भी मिली मंजूरी
संभागीय आयुक्त एवं KDA अध्यक्ष की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में केवल सेल परमिशन समाप्त करने का निर्णय ही नहीं लिया गया, बल्कि शहर के विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को भी स्वीकृति दी गई। वर्ष 2026-27 के प्रस्तावित बजट को मंजूरी देने के साथ श्री मथुराधीश मंदिर कॉरिडोर, कैथूनीपोल चौराहे के सौंदर्यीकरण, सड़क चौड़ीकरण, रामपुरा-आर्य समाज रोड के विकास तथा कुन्हाड़ी क्षेत्र में सीवरेज लाइन, सर्विस रोड और रिटेनिंग वॉल जैसे कार्यों को भी हरी झंडी दी गई। इन परियोजनाओं से शहर के आधारभूत ढांचे को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
सरकारी स्तर पर हुई समीक्षा के बाद लिया गया फैसला
सेल परमिशन की अनिवार्यता समाप्त करने का निर्णय प्रशासनिक समीक्षा के बाद लिया गया। शहरी विकास विभाग के स्तर पर यह पाया गया कि प्रदेश के अधिकांश विकास प्राधिकरणों और नगर निकायों में ऐसी बाध्यता पहले से लागू नहीं थी, जबकि कोटा में यह व्यवस्था लोगों के लिए अतिरिक्त औपचारिकता बन चुकी थी। इसी असमानता को दूर करने के उद्देश्य से नियमों की समीक्षा की गई और प्रक्रिया को सरल बनाने का निर्णय लिया गया। इससे नागरिकों का समय, अनावश्यक खर्च और प्रशासनिक बोझ कम होने की उम्मीद है।
शहर के विकास और नागरिक सुविधाओं को मिलेगा नया आयाम
विशेषज्ञों का मानना है कि सेल परमिशन की बाध्यता समाप्त होने और ई-पट्टा प्रणाली लागू होने से कोटा के रियल एस्टेट क्षेत्र में सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा। संपत्तियों के लेन-देन में पारदर्शिता बढ़ेगी, निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा और नागरिकों को सरकारी प्रक्रियाओं में राहत मिलेगी। साथ ही बैठक में स्वीकृत विकास परियोजनाएं शहर की यातायात व्यवस्था, सीवरेज नेटवर्क और सार्वजनिक सुविधाओं को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाएंगी। यह निर्णय प्रशासनिक सुधार और शहरी विकास दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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