राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का भारत-रोमानिया व्यापार बढ़ाने पर जोर, निवेश और आर्थिक साझेदारी मजबूत करने का आह्वान
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने रोमानिया की राजधानी बुखारेस्ट में आयोजित भारत-रोमानिया व्यापार मंच को संबोधित करते हुए दोनों देशों के बीच आर्थिक, व्यापारिक और निवेश संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत और रोमानिया के बीच कई क्षेत्रों में सहयोग की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं, जिनका लाभ दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को मिलेगा।
भारत-रोमानिया व्यापारिक सहयोग पर दिया जोर
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि भारत और रोमानिया के बीच गहरे व्यापारिक और निवेश संबंध विकसित करने का यह उपयुक्त समय है। उन्होंने रोमानिया की रणनीतिक भौगोलिक स्थिति, कुशल कार्यबल और यूरोपीय संघ के साथ उसके मजबूत जुड़ाव का उल्लेख करते हुए कहा कि यह भारत के लिए एक भरोसेमंद साझेदार होने के साथ-साथ पूरे यूरोपीय बाजार तक पहुंच का महत्वपूर्ण माध्यम भी बन सकता है।
भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते से बढ़ेंगी संभावनाएं
राष्ट्रपति ने कहा कि प्रस्तावित भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता (India-EU Free Trade Agreement) दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई मजबूती देगा। उनके अनुसार, इस समझौते से व्यापार, निवेश और आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुदृढ़ करने में मदद मिलेगी, जिससे भारत और रोमानिया के बीच आर्थिक सहयोग और अधिक व्यापक होगा।
इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की अपील
अपने संबोधन में राष्ट्रपति मुर्मु ने रक्षा विनिर्माण, नवीकरणीय ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन, परमाणु ऊर्जा, सूचना प्रौद्योगिकी, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, साइबर सुरक्षा, परिवहन, लॉजिस्टिक्स, फार्मास्यूटिकल्स, स्वास्थ्य सेवा, कृषि और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में साझेदारी दोनों देशों के लिए नए अवसर पैदा कर सकती है।
‘विकसित भारत 2047’ से वैश्विक निवेशकों को अवसर
राष्ट्रपति ने कहा कि भारत की तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, निवेशक-अनुकूल सुधार और ‘विकसित भारत 2047’ का विजन वैश्विक निवेशकों के लिए आकर्षक अवसर प्रदान करता है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कंपनियों और निवेशकों से भारत में निवेश बढ़ाने और दीर्घकालिक साझेदारी स्थापित करने का आह्वान किया।
संस्थागत तंत्र को बताया सहयोग की मजबूत नींव
राष्ट्रपति मुर्मु ने संयुक्त आर्थिक आयोग, ऊर्जा पर संयुक्त कार्य समूह और संयुक्त रक्षा सहयोग समिति जैसे द्विपक्षीय तंत्रों की भूमिका की सराहना की। उन्होंने विश्वास जताया कि व्यापारिक नेताओं के बीच हुई चर्चाएं नए निवेश, मजबूत साझेदारी और दीर्घकालिक व्यापारिक संबंधों का मार्ग प्रशस्त करेंगी।