#पॉलिटिक्स

राजस्थान में संगठन पर सियासत: कांग्रेस के अभियान पर भाजपा का तंज, कांग्रेस ने इतिहास का दिया जवाब

राजस्थान में कांग्रेस के ‘संगठन सृजन अभियान’ को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस जहां डिजिटल तकनीक और बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने का दावा कर रही है, वहीं भाजपा इसे केवल कार्यप्रणाली की नकल बताते हुए विचारधारा बदलने की नसीहत दे रही है। दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप के बीच संगठनात्मक मजबूती का मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।

भाजपा का तंज, ‘रणनीति नहीं, विचारधारा बदलने की जरूरत’

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कांग्रेस के संगठन सृजन अभियान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि किसी दूसरे दल की कार्यप्रणाली अपनाने से राजनीतिक सफलता नहीं मिलती। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को “परिवार प्रथम” की राजनीति छोड़कर “राष्ट्र प्रथम” की भावना को प्राथमिकता देनी चाहिए। राठौड़ के अनुसार भाजपा का संगठन वर्षों से तकनीक आधारित मॉनिटरिंग, मजबूत बूथ नेटवर्क और अनुशासित कार्यशैली पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि चुनावी सफलता केवल तकनीक से नहीं बल्कि विचारधारा, संगठन और कार्यकर्ताओं के समर्पण से मिलती है।

कांग्रेस का पलटवार, ‘100 साल पुरानी है हमारी संगठनात्मक परंपरा’

भाजपा के आरोपों पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी। प्रदेश प्रवक्ता स्वर्णिम चतुर्वेदी ने कहा कि कांग्रेस का संगठनात्मक इतिहास एक सदी से अधिक पुराना है और पार्टी हमेशा से जमीनी स्तर पर संगठन निर्माण करती रही है। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस के संगठन पर सवाल उठाने से पहले भाजपा को अपने संगठनात्मक ढांचे और नेतृत्व चयन की प्रक्रिया पर नजर डालनी चाहिए। कांग्रेस का दावा है कि उसका नया अभियान संगठन को अधिक जवाबदेह और सक्रिय बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

15 लाख पदाधिकारी, डिजिटल मॉनिटरिंग और बूथ तक नई संरचना

कांग्रेस के संगठन सृजन अभियान के तहत प्रदेशभर में लगभग 15 लाख पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को अलग-अलग जिम्मेदारियां देने का दावा किया गया है। पार्टी ने बूथ, वार्ड, ग्राम पंचायत, मंडल, ब्लॉक और जिला स्तर तक नई समितियों का गठन किया है। साथ ही ऑनलाइन डेटा प्रबंधन, टास्क मैनेजमेंट, डिजिटल मॉनिटरिंग और रिव्यू सिस्टम के जरिए संगठनात्मक गतिविधियों की निगरानी की व्यवस्था बनाई गई है। कांग्रेस का कहना है कि इससे कार्यकर्ताओं की जवाबदेही बढ़ेगी और संगठन की कार्यक्षमता मजबूत होगी।

भाजपा ने गिनाई अपनी संगठनात्मक ताकत

भाजपा ने दावा किया कि उसका संगठन पहले से ही बूथ स्तर तक मजबूत नेटवर्क पर आधारित है। पार्टी के अनुसार प्रदेश में हजारों मंडलों, शक्ति केंद्रों और 61 हजार से अधिक बूथों पर संगठन सक्रिय है। भाजपा ने डिजिटल प्लेटफॉर्म और ऐप आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम के जरिए चुनावी गतिविधियों और संगठन संचालन को प्रभावी बनाने का दावा भी किया। पार्टी का कहना है कि मजबूत संगठन ही उसकी चुनावी सफलता का प्रमुख आधार रहा है।

विश्लेषकों की राय, मजबूत संगठन चुनावी राजनीति की सबसे बड़ी ताकत

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी भी राजनीतिक दल की चुनावी सफलता में मजबूत संगठन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। विशेषज्ञों के अनुसार कांग्रेस का संगठन सृजन अभियान यदि केवल घोषणाओं तक सीमित न रहकर जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू होता है, तो भविष्य के चुनावों में इसका असर दिखाई दे सकता है। वहीं भाजपा की संगठनात्मक बढ़त को चुनौती देने के लिए कांग्रेस को अपने नए ढांचे को सक्रिय और परिणामोन्मुख बनाना होगा।

author avatar
stvnewsonline@gmail.com

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *