महिला आरक्षण पर सियासत तेज: परिसीमन से अलग लागू करने की मांग, भाजपा पर कांग्रेस का भ्रम फैलाने का आरोप
अलवर में कांग्रेस महासचिव पूनम गोयल ने महिला आरक्षण कानून को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि इसे जनगणना और परिसीमन से जोड़ना महिलाओं के अधिकारों में देरी करने जैसा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा इस मुद्दे पर भ्रम फैलाकर राजनीतिक लाभ लेना चाहती है, जबकि कांग्रेस ने हमेशा महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण को प्राथमिकता दी है।
महिला आरक्षण पर भाजपा पर आरोप
कांग्रेस महासचिव पूनम गोयल ने प्रेस वार्ता में कहा कि महिला आरक्षण बिल को लेकर भाजपा द्वारा जनता को गुमराह किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार इस कानून को लागू करने के बजाय इसे जनगणना और परिसीमन जैसी प्रक्रियाओं से जोड़कर टालने की कोशिश कर रही है। गोयल के अनुसार, यह रणनीति महिलाओं को उनके अधिकारों से वंचित रखने के समान है। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि महिलाओं का संवैधानिक और सामाजिक अधिकार है, जिसे बिना देरी के लागू किया जाना चाहिए।
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कांग्रेस का इतिहास और महिला सशक्तिकरण
गोयल ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने हमेशा महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करने में अग्रणी भूमिका निभाई है। उन्होंने वर्ष 1992 में पंचायती राज संस्थाओं और नगरीय निकायों में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू किए जाने का उल्लेख किया। साथ ही, 2010 में यूपीए सरकार द्वारा राज्यसभा में महिला आरक्षण बिल पारित करवाना भी कांग्रेस की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने यह भी कहा कि 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून में भी कांग्रेस का महत्वपूर्ण योगदान रहा, लेकिन इसके बावजूद इसका क्रियान्वयन अभी तक नहीं हो पाया है।
परिसीमन और जनगणना से जोड़ने पर आपत्ति
गोयल ने केंद्र सरकार के उस रुख पर आपत्ति जताई जिसमें महिला आरक्षण कानून को जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया से जोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि यह कदम कानून के लागू होने में अनावश्यक देरी पैदा करेगा। उनके अनुसार, सरकार को चाहिए कि वह इसे तत्काल प्रभाव से लागू करे, ताकि महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में उचित प्रतिनिधित्व मिल सके। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी समय में इस मुद्दे को उठाकर भाजपा राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास कर रही है।
ओबीसी महिलाओं के प्रतिनिधित्व की मांग
प्रेस वार्ता के दौरान गोयल ने अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की महिलाओं के लिए भी आरक्षण में उचित हिस्सेदारी सुनिश्चित करने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण कानून तभी पूर्ण रूप से प्रभावी होगा जब इसमें समाज के सभी वर्गों की महिलाओं को समान अवसर मिलेगा। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि महिलाओं का राजनीतिक प्रतिनिधित्व बढ़ाना लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और इसे किसी भी तरह की राजनीतिक रणनीति से प्रभावित नहीं होना चाहिए।
स्थानीय नेताओं की मौजूदगी
इस अवसर पर कांग्रेस के कई स्थानीय नेता और पदाधिकारी भी उपस्थित रहे। इनमें जिला अध्यक्ष प्रकाश गंगावत, पूर्व जिला अध्यक्ष योगेश मिश्रा, अजीत यादव, श्वेता दीपेंद्र सैनी, गफूर खान, जोगेंद्र कोचर, पुष्पेंद्र धाबाई, अशोक सैनी, इम्तियाज हुसैन, राजेश कृष्ण सिद्ध और महिला जिला अध्यक्ष कमलेश सैनी सहित अन्य कार्यकर्ता शामिल थे। सभी नेताओं ने एक स्वर में महिला आरक्षण कानून को शीघ्र लागू करने की मांग का समर्थन किया और इसे महिलाओं के अधिकारों से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बताया।